Sunday, January 5, 2020

सिक्ख इतिहास प्रश्नोत्तरी:-


1. दस गुरु साहिबानों के नाम तरतीब वार लिखें
गुरु नानक देव जी (1469-1539)
गुरु अंगद देव जी (1504-1552)
गुरु अमर दास जी (1479-1574)
गुरु राम दास जी (1534-1581)
गुरु अरजन देव जी (1563-1606)
गुरु हरगोबिंद जी (1595-1644)
गुरु हरिराय जी (1630-1661)
गुरु हरिकृष्ण जी (1656-1664)
गुरु तेगबहादुर जी (1621-1675)
गुरु गोबिंद सिंह जी (1666-1708)

2. उन दो साहिबजादों के नाम बताईये जिन्हें जिन्दा नीवों में चिनवा दिया गया था
बाबा फ़तेह सिंह जी
बाबा जोरावर सिंह जी

3. उन दो साहिबजादों के नाम बताईये जो चमकोर की लड़ाई में शहीद हुए थे
बाबा अजीत सिंह जी
बाबा जुझार सिंह जी

4. सिक्ख पंथ के पहले पांच प्यारों के नाम बताईये
भाई दया सिंह जी
भाई धरम सिंह जी
भाई हिम्मत सिंह जी
भाई मोहकम सिंह जी
भाई साहिब सिंह जी

5. सिक्ख धर्म के पांच ककारों के नाम बताईये
केस
कंघा
किरपान
कड़ा
कछिहरा

6. खालसे के धरम पिता कौन हैं
गुरु गोबिंद सिंह जी

7. खालसे की धरम माता कौन हैं
माता साहिब कौर जी

8. खालसा पंथ की नींव कहाँ रखी गयी थी
आनंदपुर साहिब

9. जब सिक्ख आपस में मिलते हैं तो क्या कह कर एक दुसरे को संबोधित करते हैं
वाहेगुरु जी का खालसा
वाहेगुरु जी की फ़तेह

10. जैकारा क्या है
बोले सो  निहाल
सति श्री अकाल

11. ‘सिक्ख’ शब्द से आप क्या समझते हैं
शिष्य (सीखने वाला)

12. पांच तख्तों के नाम बताईये
श्री अकाल तख़्त साहिब, अंमृतसर, पंजाब
श्री हरिमंदिर साहिब, पटना, बिहार (पटना साहिब)
श्री केसगढ़ साहिब, आनंदपुर, पंजाब (आनंदपुर साहिब)
श्री हजूर साहिब, नांदेड़, महाराष्ट्र
श्री दमदमा साहिब, तलवंडी साबो, बठिंडा, पंजाब  

13. गुरमुखी लिपि पड़ाना सबसे पहले किसने शुरू किया था
गुरु अंगद देव जी

14. ‘गुरु का लंगर’ की प्रथा सबसे पहले किस ने शुरू की थी
गुरु अमरदास जी

15. आदि श्री गुरु ग्रन्थ साहिब (पोथी साहिब) सबसे पहले किसने लिखी थी
गुरु अरजन देव जी

16. श्री हरिमंदिर साहिब अंमृतसर में श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी का प्रकाश सबसे पहले कब हुआ था
सन 1604 में

17. श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी के पहले ग्रंथी कौन थे
बाबा बुड्डा जी

18. श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी के कितने अंग (पन्ने) हैं
1430

19. श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी में कितने गुरुओं की बाणी दर्ज है
कुल 6 गुरुओं की : पहले पांच एवं नोवें गुरु जी की

20. किस गुरु को ‘शहीदों के सरताज’ भी कहा जाता है
गुरु अरजन देव जी

21. किस गुरु को ‘मीरी-पीरी के मालिक’ भी कहा जाता है
गुरु हरिगोबिंद जी

22. किस गुरु का सिर धड से अलग किया गया था
गुरु तेगबहादुर जी
23. किस गुरु को ‘हिन्द-दी-चादर’ भी कहा जाता है
गुरु तेगबहादुर जी

24. सिमरन कैसे होता है
सर्वशक्तिमान सर्वव्यापक अकालपुरख को याद करना

25. सिक्ख धरम में शादी को क्या कहते हैं
आनन्द कारज

26. गुरु नानक देव जी की यात्राओं को क्या कहा जाता है
उदासी

27. गुरु नानक देव जी के साथ रबाब कौन बजाता था
भाई मरदाना जी

28. उस गुरुद्वारे का नाम बताईये जहाँ वली कंधारी का अहंकार टुटा था
पंजा साहिब

29. गुरु नानक देव जी कहाँ एवं कब ज्योति ज्योत समाये थे
1539, करतार पुर

30. गुरु अंगद देव जी का पहला नाम क्या था
भाई लहणा जी

31. गुरु अमरदास जी ने गुरु अंगद देव जी की सेवा कितने समय तक की
12 वर्ष

32. उस नदी का नाम बताईये जहाँ से गुरु अमरदास जी रोज पैदल जा कर गुरु अंगद देव जी के लिए पानी भर के लाया करते थे
ब्यास नदी

33. ‘मसंद’ प्रचारक किसने शुरू किये थे
गुरु अमरदास जी

34. गुरु अरजन देव जी के पुत्र का नाम बताईये
हरगोबिंद जी

35. गुरु रामदास जी का पहला नाम क्या था
भाई जेठा जी

36. वहां कौन सा गुरुदवारा है जहाँ गुरु अरजन देव जी को शहीद किया गया था
डेरा साहिब लाहौर

37. गुरु हरिगोबिंद जी को कैदी की तरह क्या रखा गया था
ग्वालियर का किला

38. गुरु हरिगोबिंद जी को जब रिहा किया गया तब उनके साथ उनका चोला पकड़ के और कितने राजाओं को रिहा किया गया था
52 राजा

39. गुरु हरगोबिंद जी ने दो तलवारें धारण की थी, उनके नाम बताओ
मीरी पीरी

40. अकाल तख़्त की स्थापना किसने की थी
गुरु हरिगोबिंद जी

41. गुरु हरिगोबिंद जी को जपुजी साहिब के पाठ का शुद्ध उच्चारण किसने सुनाया था
भाई गोपाला जी
42. बाबा बुड्डा जी ने कितने गुरुओं की सेवा की
6
43. ओरंगजेब को गुरबाणी गलत पढ़ कर सुनाने के लिये किसे सजा मिली थी
राम राय, गुरु हरि राय जी के पुत्र  
44. गुरु हरि कृष्ण जी की कितनी उम्र थी जब उनको गुरुगद्दी मिली थी
5 साल
45. मिर्जा राजा जय सिंह के बंगले पर अब कौन सा गुरुद्वारा है जहाँ गुरु हरि कृष्ण जी ठहरे थे जब वह दिल्ली आये थे
गुरुद्वारा बंगला साहिब
46. गुरु हरि कृष्ण जी की कितनी उम्र थी जब वह ज्योति ज्योत समाये थे
8 साल
47. जहाँ गुरु हरि कृष्ण जी का अंतिम संस्कार हुआ वहां अब कौन सा गुरुद्वारा है
गुरुद्वारा बाला साहिब
48. गुरु हरि कृष्ण जी के अंतिम शब्द क्या थे जब वह अगले गुरु जी के बारे में बता रहे थे
‘बाबा बकाले’ इसका मतलब है की अगले गुरु बकाला नाम के गावं में मिलेंगे
49. सोढ़ी परिवार के कितने लोग अपने आप को गुरु कहते हुए बकाला में मिले
22
50. बकाला में गुरु तेगबहादुर जी को ढूंड कर दुनिया के सामने लाने वाले व्यक्ति कौन थे
भाई मक्खन शाह लुबाना
51. गुरु तेगबहादुर जी की पत्नी का क्या नाम था
माता गुजरी जी
52. गुरु तेगबहादुर जी के साथ शहीद होने वाले तीन सिक्ख कौन थे
भाई मती दास जी
भाई सती दास जी
भाई दयाला जी
 
53. गुरु तेगबहादुर जी के साथ शहीद होने वाले तीन सिक्खों को कैसे शहीद किया गया था
भाई मती दास जी (आरी से काट के शहीद किया गया)
भाई सती दास जी (रुई में लपेट कर आग लगा दी गई)
भाई दयाला जी (गर्म पानी में उबाला गया)
54. किसके नेतृत्व में 500 कश्मीरी पंडित गुरु तेगबहादुर जी के पास मदद मांगने के लिये आये थे
पंडित कृपा राम (जो की बाद में गुरु गोबिंद सिंह जी के संस्कृत के गुरु भी बने एवं फिर खालसा सजे  एवं अंत में चमकोर की लड़ाई में शहीद हो गए)
55. गोबिंद राय (गुरु गोबिंद सिंह जी की उस वक्त कितनी उम्र थी)
9 साल
56. जहाँ गुरु तेगबहादुर जी को शहीद किया गया वहां कौन सा गुरुद्वारा है
गुरुद्वारा सीस गंज, चांदनी चौंक दिल्ली
57. गुरु तेगबहादुर जी के शरीर का संस्कार किसने किया
भाई लक्खी शाह वणजारा
58. जहाँ गुरु तेगबहादुर जी के शरीर का संस्कार हुआ वहां कौन सा गुरुद्वारा है
गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब, दिल्ली
59. गुरु तेगबहादुर जी के सीस को आनंदपुर साहिब कौन ले के गया था
भाई जैता जी (भाई जीवन सिंह जी)
60. वहां कौन सा गुरुद्वारा है जहाँ श्री गुरु तेगबहादुर जी के सीस का संस्कार हुआ था
गुरुद्वारा सीस गंज साहिब, आनंदपुर
61. पीर बुद्धू शाह जी के कितने पुत्र थे और भंगानी के युद्ध में कितने शहीद हुए थे
4 पुत्र, भंगानी के युद्ध में 2 शहीद हुए
62. भंगानी के युद्ध में पीर बुद्धू शाह जी की सेवाओं के बदले में गुरु गोबिंद सिंह जी ने उन्हें क्या उपहार दिये थे
कंघा (कुछ टूटे हुए बालों सहित), किरपान एवं दस्तार
63. आनंदपुर की लड़ाई में शराब पिला कर मस्त किये हुए हाथी के साथ कौन से सिक्ख ने युद्ध किया था
भाई बच्चितर सिंह
64. आनंदपुर की लड़ाई के दौरान गंभीर रूप से घायल सिपाहियों को कौन पानी पिलाता था (इस बात की परवाह किये बिना की वो सिक्ख हैं या मुस्लिम)
भाई कन्हैया जी
65. माता गुजरी जी और दो छोटे साहिबजादों की खबर सिरहंद के नवाब को किसने दी थी
गंगू ब्राह्मण
66. चमकोर की लड़ाई के बाद गुरु गोबिंद सिंह जी नंगे पैर कौन से जंगलों में रहे
माछीवाड़ा
67. उन दो पठानों के नाम बताईये जिन्होंने गुरु गोबिंद सिंह जी को मुगलों से बचाया था
नबी खान और गनी खान
68. मुक्तसर की लड़ाई में शहीद होने वाले चालीस मुक्तों का नेतृत्व किसने किया था
भाई महा सिंह
69. अंमृतसर शहर के पांच सरोवरों के नाम बताईये
अंमृतसर
कौलसर
संतोखसर
बिबेकसर
रामसर
70. गुरु गोबिंद सिंह जी ने माधो दास को अमृत पान के बाद क्या नाम दिया
बंदा सिंह
71. बंदा सिंह ने पंजाब छोड़ने से पहले सिक्खों को क्या दिया
निशान साहिब एवं नगाड़ा
72. गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ का पहला जत्थेदार किसे बनाया था
बंदा सिंह
73. मिसल के समूह को क्या कहते थे
दल खालसा
74. पहले दल खालसा की स्थापना किसने की थी
नवाब कपूर सिंह
75. उस सिक्ख सिपाही का नाम बताईये जिसे सुल्तान उल कौम का ख़िताब मिला
जस्सा सिंह आहलूवालिया
76. दिल्ली की उस जगह का क्या नाम है जहाँ सरदार बघेल सिंह अपने 30,000 साथियों के साथ ठहरे थे
तीस हजारी
77. शेरे-ए-पंजाब का ख़िताब किसे प्राप्त है
महाराजा रणजीत सिंह
78. सरदार हरी सिंह नलवा ने कौन से प्रसिद्ध गुरुद्वारा की स्थापना की
गुरुद्वारा पंजा साहिब
79. मोदीखाना साखी कौन से गुरु जी से सम्बंधित है
गुरु नानक देव जी
80. सुखमनी साहिब के रचेता कौन है
गुरु अरजन देव जी
81. होला मोहल्ला का त्यौहार कौन से गुरु जी ने शुरू किया था
गुरु गोबिंद सिंह जी
82. गुरु गोबिंद सिंह जी के कौन से सिक्ख ने भंगानी की लड़ाई में अपना साथ दिया और अपने दो पुत्र भी शहीद करवाए
        पीर बुद्धू शाह
83. सिक्खों के कैलेन्डर का क्या नाम है
नानकशाही कैलेन्डर
84. नानकशाही कैलेन्डर सूर्य या चन्द्र किसकी गति के हिसाब से चलता है
सूर्य
85. नानकशाही कैलेन्डर का पहला वर्ष कौन सा है
          1469 (जब गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ था)
86. भाई लालो जी के घर गुरु नानक देव जी ने किस का भिजवाया हुआ लंगर वापिस कर दिया था
मालिक भागो
87. गुरु नानक देव  जी और सिद्धों के बीच मुलाकात (सिद्ध गोस्ट) कहाँ पर हुआ था
                कैलाश पर्वत (सुमेर पर्वत)
88. माता खीवी जी कौन थी
                   माता खीवी जी गुरु अंगद देव जी की पत्नी थी और वह सिक्ख इतिहास की एकमात्र स्त्री हैं जिनका नाम गुरु ग्रन्थ साहिब में दर्ज है
89. अकाल तख़्त का क्या मतलब होता है
                     सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापक,       अकाल पुरख का सिंहासन
90. गुरु तेग बहादुर जी को गुरु नानक देव जी की याद में एक बड़ा टीला कहां स्थापित मिला
          डुबरी, आसाम
91. किस मुग़ल बादशाह ने गुरु तेगबहादुर जी का सिर धड से अलग करने का हुक्म दिया था
                   औरंगजेब
92. गुरु गोबिंद सिंह जी को अपनी रक्षा के लिये पंज प्यारों ने किस किले को छोड़ने का आदेश दिया था
             चमकोर का किला
93. सुखमनी साहिब में कितनी अष्टपदीयां हैं
             24  
94. ‘सिंह’ शब्द से आप क्या समझते हैं
        शेर
95. कौर शब्द से आप क्या समझते हैं
               राजकुमारी
96. गुरु नानक देव जी संगल द्वीप मे किस से    मिले थे
            राजा शिव नाथ
97. गुरु अमरदास जी ने कौन सा शहर बसाया था, जहाँ वह गुरु बनने के बाद रुक गये थे
          गोइंदवाल
98. गुरु अरजन देव जी की पत्नी का क्या नाम था
               माता गंगा जी
99. श्री गुरु ग्रन्थ साहिब में गुरबाणी कितने रागों में लिखी गयी है
                 31
100. श्री गुरु ग्रन्थ साहिब में मूल मंत्र कितनी बार आया है
                  33

Thursday, January 2, 2020

POOR BRAHMINS



It is amazing to see that how fiction can become truth in course of time!

Let's examine truth based on facts and real history. 

1. To start with, there is no SINGLE Brahmin God in Hinduism!

2. All Gods are from backward castes, dalits and tribals.

3. Brahmins never created the concept of Gods in Hinduism. 

4. There was not even a SINGLE Brahmin King that ruled India.

5. To be able to oppress others requires positions of power. Brahmins were teachers, scholars, priests, advisors but not rulers.

6. The Brahmin’s traditional occupation was that of temple priest (purohit), officiating religious functions. Their sole income was Biksha (alms) given by the land-lords (non-Brahmins).

7. And another section of Brahmins were teachers, that too without salary.

8. Vedic literature was mostly written by non-Brahmins! The most powerful of the dharma shaastra, that gives Brahmins a high status, is the Manusmriti written by Manu, a non-Brahmin.
Brahmin means a profession (Varna) - not a caste.

9. If the reading and writing of Sanskrit was confined to Brahmins then how do you have the tribal Valmiki composing Ramayana? Ved Vyas, who classified four vedas and wrote Mahabharata, was born to a fisher-woman.

10. Sanskrit was used mostly by non-Brahmin writers - there are very few scriptures in Sanskrit authored by Brahmins.

11. We consider the teachings of Ved Vyas, Vashishtha, Valmiki, Krishna, Rama, Agasthya, Vishwamitra, Shrunga, Gowthama, Buddha, Mahavira, Sai, Thiruvalluvar, Kabir, Vivekananda, Gandhi, Narayana guru etc as most valuable.

12. If none of them were Brahmins why cry out loudly that "Brahmins did not allow you to learn?" There are numerous works on bhakti by non-Brahmin bhakti saints.

13. Brahmins never prevented others from learning.

14. Brahmins were neither rich nor powerful at any point of time in history. Pick up any old Indian story book, you will see ‘Garib Brahmin’ (Poor Brahmin) quoted as a virtue. (Remember Kuchela-Krishna story?)

15. Though their profession was considered as highest stature of the society, the Brahmin ascetics' only way of survival was alms given by people.

16. The biggest contribution of Brahmins is sustaining the best language ever spoken in the earth - Sanskrit. If you learn English or Arab, you have commercial benefits.

17. Nobody ever promoted Sanskrit.
Without any benefits, Brahmins took up voluntary task of learning Sanskrit. Then, now you accuse them of monopoly in Sanskrit!

Besides, Brahmins were never , they were not Kings.. They didn't enjoy powers and wealth.. Naturally, they worked hard on gaining knowledge, led life of austerity.. So there is no question of exploitation by Brahmins.. 
When population of Brahmins range from just 2% in Tamilnadu to 12 %in Uttarakhand how can they dominate majority.. 

After reading all this can anyone blame Brahmins for anything !!

 👆Please forward and kill this virus of misinformation dividing the Society.

भारत को मोदी योगी नहीं विराथू चाहिये!

#विराथू
👉 जो काम अमेरिका फ्रांस भारत रूस कोई नहीं कर पाया...वो बर्मा के "विराथू" जी ने कर दिखाया...! !

👉 आज बर्मा में करोडो रुपये के बने मस्जिद वीरान पड़े हैं...क्यूंकि आज देश मे मुसलमान देखने को नहीं है... जो की वहां जाए और देखे मस्जिदों को...और जो है वहां, उसकी तबीयत से ठुकाई हो रही है...!
"विराथु" जिसके बाद ही लोग जान पाए कि ये महान इंसान कौन है...? ! और इन्होने क्या कर डाला है...? !

👉 क्या भारत को भी एक ऐसे आसीन "विराथू" की जरुरत है...? ! कौन इस सन्त की तरह भूमिका निभा सकता भारत मे...? ! मित्रो "आसीन विराथु" - वो भगवा संत जिसके नाम से काँपते हैं मुसलमान...!
"विराथु"...जी हाँ, बस ये शब्द ही काफी है म्यांमार में, इस शब्द को सुनकर मुस्लिमों में कंपकपी मच जाती है...!
  
👉 बर्मा के बौद्ध गुरु "विराथु जी" ने आखिर किस तरीके से मुस्लिम को भगाया या कमज़ोर किया समझो...!
जैसे मुसलमानों का '७८६' का नंबर लकी माना जाता है वैसे ही विराथु ने '"९६९"' का नंबर निकाला...और उन्होंने पुरे देश के लोगों से आह्वान किया...कि जो भी राष्ट्रभक्त बौद्ध है वो इस स्टीकर को अपने अपनी जगह पर लगायें...!
  
👉 इसके बाद टैक्सी चलाने वालों ने टैक्सी पर...
दूकान वालों ने दूकान पर...
इसको लगाना शुरू किया...
लेकिन "विराथु" का सन्देश साफ़ था...कि
हर (हम) बौद्ध अपनी सारी खरीदारी और व्यापार वहीँ करेंगे जहां ये स्टीकर लगा होगा...
किसी को टैक्सी में चढ़ना हो तो उसी टैक्सी में चढ़ेंगे जिसके ऊपर ये स्टीकर होगा...
उसी रेस्टोरेंट में खायेंगे जहां ये स्टीकर होगा...!

👉 उन्होंने ये भी कहा कि हो सकता है ऐसी हालत में मुस्लिम सऊदी से आये पैसों के दम पर अपने माल को कम कीमत पर बेच कर आपको आकर्षित करे...
लेकिन आप ध्यान रखना...
आप दो पैसा ज्यादा देना... और सोचना कि आपने अपने देश के लिए पैसा लगाया है...
 दो पैसे कम में खरीद कर मातृभूमि से गद्दारी मत करना... "वो आपके पैसे आपको ही मिटाने में लगाते हैं... मुर्खता मत करना...!"

👉 दोस्तों...हालत ये हो गए कि "मुस्लिम के व्यापार ठप्प पड़ गए... मुस्लिम इतने आतंकित हुए कि इस स्टीकर लगी टैक्सी को चढ़ना तो दूर... किनारे से कन्नी काटने लगे... पुरे देश में मुसलमानों के होश ठिकाने आ गए... और फिर ये स्टीकर एक तरह से देशभक्ति का प्रमाण बन गया... उनके जिहाद का जवाब बन गया... और इस अनोखे आईडिया का प्रभाव आप देख सकते हैं कि आज बर्मा से मुस्लिम भाग चुके हैं...!"
 
👉 "विराथु" वो संत हैं जिन्होंने आतंक के खिलाफ पूरे म्यांमार को खड़ा कर दिया गया और फिर वहां से लोगों ने अवैध मुस्लिमों को खदेड़ डाला...!

👉 लोग जो भगवान बुद्ध की बातों पर अमल करते आ रहे थे उन लोगों ने देश की रक्षा के लिए बुद्ध की बातों को छोड़ संत "विराथु" की बातों पर अमल किया...!

👉 "विराथु" ने कहा, "चाहे आप कितने भी दयावान और शांतिप्रिय हो पर आप एक पागल कुत्ते के साथ नहीं सो सकते अन्यथा आपकी शांति वहां कोई काम नहीं आएगी और आप बर्बरता से ख़त्म कर दिए जाओगे"
उन्होंने कहा, "शांति स्थापित करने के लिए हथियार उठाना होगा, शांति के लिए युद्ध जरुरी है।" ये सारी बातें "विराथु" ने गीता से ली और फिर आतंक की बीमारी झेल रहे म्यांमार के लोग एकजुट हो गए वो "विराथु" के लिए जान लेने और देने को तैयार हो गए और पूरे म्यांमार से अवैध मुसलमानो को खदेड़ा जाने लगा...!"
 
👉 विराथू के प्रवचनों को अगर कोई सुने तो उसे लग सकता है कि शांत स्वरों में मोक्षप्राप्ति की बात चल रही है...!!!!

👉 म्यांमार में हुई हिंसक घटनाओं के बाद से अब प्राय: पूरी दुनिया में बौद्धों और मुस्लिमों में भारी तनातनी पैदा हो गई है... जिनमें "अशीन विराथु" बौद्ध दुनिया के एक नायक एवं जेहादी दुनिया के लिए एक बड़े खलनायक बन कर उभरे हैं...। म्यांमार में हुए कई सर्वेक्षणों के बाद ये प्रमाणित हो चुका है कि जनता एवं बौद्ध भिक्षु विराथु" के साथ है...। "विराथु" का स्वयं भी कहना है कि वह न तो घृणा फैलाने में विश्वास रखते हैं और न हिंसा के समर्थक हैं। लेकिन हम कब तक मौन रहकर सारी हिंसा और अत्याचार को झेलते रह सकते हैं...?
 
👉 इसलिए वह अब पूरे देश में घूम-घूम कर भिक्षुओं तथा सामान्यजनों को उपदेश दे रहे हैं कि... "यदि हम आज कमजोर पड़े, तो अपने ही देश में हम शरणार्थी हो जाएंगे...।"
🚩🚩🚩

Thursday, December 26, 2019

Ambernath Temple (अम्बरनाथ मंदिर)

शिव को हि कहा जाता है अम्बरनाथ जिसका अर्थ अम्बर(आकाश) नाथ(राजा)
आकाश के राजा है भोले नाथ।

यह मंंदीर मुम्बई से काफी करीब है। मुम्बई आ कर भी इनके दर्शन नही किये हो तो अब कर लेेना।

कल्याण से 2 स्टेशन बाद (कर्जत की और) आता है। अम्बरनाथ स्टेशन
स्टेशन से आप 
पैदल(लगभग 2 से 2.5km) भी जा सकते है|
वैसे तमाम Auto Rikshaw मील जाएंगे आप को!

उल्हस नदी के करीब

दर्शन के लिये वीडियो लिंक पे click करें
https://youtu.be/MTc68HjhwyQ

Wednesday, December 25, 2019

खंडग्रास (कंकण आकृति) सूर्यग्रहण 26 दिसंबर 2019


क्या होता है सूर्य ग्रहण ?

पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमने के साथ-साथ सूर्य के चारों ओर भी चक्कर लगाती है। दूसरी ओर, चंद्रमा पृथ्वी का चक्कर लगता है, इसलिए, जब भी चंद्रमा चक्कर काटते-काटते सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है, तब पृथ्वी पर सूर्य आंशिक या पूर्ण रूप से दिखना बंद हो जाता है। इसी घटना को सूर्यग्रहण कहा जाता है। इस
खगोलीय स्थिति में सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी तीनों एक ही सीधी रेखा में आ जाते हैं। सूर्यग्रहण अमावस्या के दिन होता है,जबकि चंद्रग्रहण हमेशा पूर्णिमा के दिन पड़ता
है।  पृथ्वी से सूर्य ओर चन्द्र की दूरी व समीपता घटती-बढ़ती रहती है, जिससे हमें इनके बिम्ब छोटे-बड़े होते दिखते हैं। जब सूर्यग्रहण के समय चन्द्र-बिम्ब सूर्य-बिम्ब
के बराबर होता है, तब सूर्य का पूर्णग्रास ग्रहण, जब वह सूर्य-बिम्ब से कुछ बड़ा होता है, तब सूर्यखग्रास ग्रहण और जब वह सूर्य-बिम्ब से कुछ छोटा होता है, तब सूर्यग्रहण कंकणाकृति होता है। उस समय चन्द्र-बिम्ब सूर्य-बिम्ब को इस प्रकार ढकता है कि-सूर्य-बिम्ब के लगभग मध्य में चन्द्र बिम्ब समाविष्ट होता है, जिससे उस समय सूर्य-बिम्ब का अनाच्छादित बाहरी भाग चांदी, के चमकते कंकण (कंगन) की तरह दिखाई देने लगता है, इसीलिए इस ग्रहण को कंकणाकृति ग्रहण कहा जाता है। 

शास्त्रों के अनुसार ग्रहण के सूतक समय को अशुभ मुहूर्त माना जाता है. इस दौरान कोई शुभ या नए काम की शुरुआत नहीं करनी चाहिए. इसके साथ ही भगवान की पूजा भी नहीं करना चाहिए और ना हि देव दर्शन करना चाहिए. धार्मिक नियमें के अनुसार सूर्यग्रहण के 12 घंटे से पहले ही सूतक लग जाता है और यह ग्रहणकाल के समाप्त होने के मोक्ष काल के बाद स्नान, धर्म स्थलों को फिर से पवित्र करने के बाद ही समाप्त होता है।

भारत में सूर्यग्रहण तारीख और समय
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सूर्यग्रहण 26 दिसंबर को पड़ रहा है. भारतीय समय अनुसार ग्रहण का स्पर्श 26
दिसंबर के दिन प्रातः 8 बजकर 10 मिनट से आरंभ होगा इसका मध्य (ग्रहण मध्य) प्रातः 9 बजकर 31 मिनट पर रहेगा तथा ग्रहण मोक्ष (ग्रहण खत्म) प्रातः 10 बजकर 51 मिनट पर होगा ग्रहण का पर्वकाल (स्नान, दान आदि) का समय दोपहर 2 बजकर 41 मिनट तक मान्य होगा। ग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले 25 दिसंबर की रात 8 बजकर 10 मिनट से आरंभ हो जाएगा।  

इस विषयक संहिता प्रतिफल यह कि यह ग्रहण मूल नक्षत्र एवं धनु राशि मण्डल पर मान्य है। अत: इस नक्षत्र राशि वालों को ग्रहण दर्शन नहीं करना चाहिए। अपितु अपने इष्टदेव की आराधना गुरूमंत्र जप एवं धार्मिक ग्रन्थ का पठन-मनन करना चाहिए।

यह ग्रहण भारत में दक्षिण का कुछ क्षेत्र छोड़कर (क्योंकि दक्षिणी भारत
में कंकणा कृति सूर्य ग्रहण होगा।) पूर्वी सउदी अरेबिया, ओमान, यमन, पूर्वी इथियोपिया, सोमालिया, पूर्वी व मध्य केन्या, भारत का "दक्षिणी-पश्चिमी समुद्री क्षेत्र, रूस  का दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र,
उज्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, इरान, दुबई,
अफगानिस्तान, पाकिस्तान,
ताजिकिस्तान, 'मंगोलिया, कोरिया, चीन, नेपाल, भूटान, म्यामार, बांग्लादेश, मलेशिया, ब्रूनेई, फिलीपीन्स, इंडोनेशिया,
श्रीलंका, उत्तरी पूर्वी पश्चिमी आस्ट्रेलिया, जापान आदि में , खण्डग्रास रूप में दृश्य होगा तथा भारत में पेराम्बुर, मंगलुरू,
पुत्तुर, कन्नूर, कोझिकोडे, बांदपुर, टाईगर रिजर्व, पलक्कड़, तिरूपुर, इरोडे, डिंडीगुल, मदुराई, तिरुचिरापल्ली तथा भारत के अतिरिक्त उत्तरी श्रीलंका, मध्य इंडोनेशिया, मलेशिया, सउदी अरेबिया का उत्तर-पूर्वी क्षेत्र आदि में यह ग्रहण कंकणा
कृति रूप में दृश्य होगा।

ग्रहणकाल के दौरान क्या करें
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ग्रहण का सूतक शुरू होने से पहले खाने की बनी हुई चीजों में कुशा अथवा तुलसी के पत्ते डालकर रखें. दूध में भी तुलसी या कुशा डालना ना भूलें। माना जाता है कि  कुशा और तुलसी के पत्ते ग्रहण के समय निकलने वाली हानिकारक तरंगों से भोजन
को दूषित होने से बचा लेता है। ग्रहण काल के बाद स्नान करना चाहिए और घरों आदि की सफाई धुलाई अवश्य करें। ग्रहण काल के समाप्त होने के बाद पूरे घर में झाडू
लगाकर गंगाजल का छिड़काव करके उसे शुध्द करें। मंदिर या मंदिर घर को गंगाजल छिड़ककर शुध्द करें और धूप-दीप कर उन्हें भोग लगाएं। ग्रहण खत्म होने के
बाद गरीब और जरूरतमंद को अनाज, कपड़े और पैसे आदि का दान करें। 

ग्रहणकाल के दौरान क्या न करें
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ग्रहण एवं ग्रहण के सूतक के दौरान किसी भी नए कार्य को करना शुभ नहीं माना जाता है। इस दौरान किसी भी नए काम को शुरू नहीं करना चाहिए। ग्रहणकाल के दौरान भोजन करना, खाना पकाना, नहाना, शौच के लिए जाना और सोना
नहीं चाहिए। ग्रहण के दौरान तुलसी अथवा अन्य देववृक्षो को नहीं छूना चाहिए और ग्रहण खत्म होने के बाद तुलसी के पौधे को
गंगाजल छिड़ककर शुध्द करना चाहिए। ग्रहण के दौरान मंदिर या मंदिर घर में पूजा न करें। भगवान की मूर्ति को स्पर्श नहीं करना चाहिए। भगवान की प्रतिमा को कपड़े से ढककर रखना चाहिये। ग्रहण के दौरान घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए और ग्रहण दर्शन तो भूलकर भी
नहीं करना चाहिए। हिन्दू धर्म में सूर्य ग्रहण का एक अलग महत्व है। वहीं विज्ञान के नजरिये से इसकी अलग ही परिभाषा है,
विज्ञान केवल इसे खगोलिय घटना मानता है। सूर्य ग्रहण के नाम से कई लोग ऐसे भी हैं जो सूर्य ग्रहण देखने के लिए इच्छा जताते हैं। लेकिन बता दें सूर्य ग्रहण को
देखने के लिए कई सावधानियां बरतनी होती है। सूर्य ग्रहण देखने से कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है
आम तौर पर लोग सूर्य ग्रहण को पानी में सूर्य की छवि को देखते हैं। जो कि ऐसा करना बिल्कुल गलत है इससे आंखों को काफी नुकसान पहुच सकता है। इसके अलावा कई लोग पानी में हल्दी या कोई पदार्थ डाल कर देखते हैं लेकिन ये भी काफी घातक हो सकता है। इसलिए सूर्य ग्रहण को देखने के लिए ऐसे प्रक्रिया
का इस्तेमाल ना करें और अपनी आखों को नुकसान पहुंचाने से बचाएं।

ग्रहण का राशिफल
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इस ग्रहण का स्पर्श-मोक्ष मूल नक्षत्र एवं धन राशि में ही हो रहा है। अत: धनु राशिस्थ-चन्द्र एवं मूल नक्षत्र में घटित
होने से मूल नक्षत्र एवं धनु राशि में जन्म लेने वाले किंवा धनु नामराशि वाले व्यक्तियों के लिए यह ग्रहण विशेष कष्टप्रद है। जन्म किंवा नाम राशि के आधार पर विभिन्न राशि वाले व्यक्तियों के लिए इस सूर्यग्रहण' का फल नीचे दिया गया है।

धनु-राशिगत सूर्यग्रहण का 12 राशियों पर फल
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राशि जन्म/नाम          फल 
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मेष                        अपमान
वृषभ                     महाकष्ट
मिथुन                    स्त्री/पति कष्ट
कर्क                      सुख
सिंह                       चिन्ता
कन्या                     कष्ट
तुला                      धनलाभ
वृश्चिक                   हानि
धनु                       घात
मकर                     हानि
कुम्भ                     लाभ
मीन                      सुख प्राप्ति।

ग्रहण दर्शन के राशि अनुसार फल
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मेष, मिथुन, सिंह, वृश्चिक राशि हेतु सामान्य मध्यम फल, 

वृषभ, कन्या, धनु, मकर राशि हेतु नेष्ट अशुभ दर्शन करना योग्य नहीं। 

कर्क, तुला, कुंभ, मीन राशि हेतु दर्शन शुभ सुखद फल। 

पौष मास में ग्रहण का फल
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"पौषे द्विज-क्षत्र-जनोपरोध: 
ससैन्धवारब्या: कुकुरा विदेहाः।
ध्वंसं ब्रजन्त्यत्र च मन्दवृष्टिं 
भयं च विन्द्यादसुभिक्ष-युक्तम्।।"

क्योंकि यह सूर्यग्रहण पौषी अमावस (पौष
मास) में हो रहा हैं, अतः बुद्धिजीवि वर्ग एवं शस्त्रधारी किंवा यद्धति वर्ग में परस्पर उपद्रव की सम्भावना रहेगी। सिंध प्रदेश, कुकुर प्रदेश, विदेह (मिथिला-प्रदेश) भारी कष्टप्रद परिस्थिति में रहें।

इस वर्ष कुछ प्रान्तों में वर्षा से हानि, कहीं दुर्भिक्ष से परेशानी का सामना करना पड़े।

(ग्रहणवेध-अवधि के लगभग तक) गुरु, सूर्य, चन्द्र, बुध, शनि एवं केतु-ये षड्ग्रह सूर्यग्रहण कालीन राशि (धनु) में रहेंगे। उल्लिखित ग्रहस्थिति भारतीय राजनीति में प्रतिष्ठित व्यक्तियों, व्यापारियो, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों एवं सैन्य अधिकारियों के लिए भयावह है यह स्थिति पाक, अमरीका. इजराइल, उ.कोरिया एवं भारत आदि की
शासन-व्यवस्था में उलटफेर का संकेत देती है। भारत एवं भारतेतर कुछ मुस्लिम राष्ट्रों एवं चीन, जापान आदि मे भी भयंकर प्राकृतिक आपदा (भूकम्प, विस्फोट आदि) से भारी जनधनहानि के योग बनते हैं। प्रतिष्ठित व्यक्ति का पद रिक्त होने का भी संकेत मिलता है।

विशेष👉 उपरोक्त ग्रहण विवरण ऋषिकेश के भारतीय स्थानीय समयानुसार है। अपने ग्राम/नगर का सूर्यग्रहण जानने के लिये स्थानीय पञ्चाङ्ग का अनुसरण करें।

भारत के कुछ प्रमुख नगरों के ग्रहण-समय

स्थान   ग्रहण-प्रारम्भ समय  ग्रहण-समाप्ति 
अहमदाबाद      8-06 से      10-53 तक
दिल्ली              8-17 से      10-58 तक
मुंबई व सूरत     8-04 से      10-56 तक
श्रीनगर            8-22 से      10-48 तक
जोधपुर            8-09 से      10-51 तक
लखनऊ           8-19 से      11-07 तक
भोपाल            8-10 से      11-03 तक
रायपुर (छ.ग.)  8-14 से       11-16 तक
देहरादून           8-10 से       10-51 तक
चंडीगढ़           8-19 से        10-55 तक
रांची व पटना    8-22 से        11-23 तक
कोलकाता        8-27 से        11-33 तक
भुवनेश्वर          8-19 से        11-29 तक
चेन्नई               8-08 से        11-20 तक
बेंगलुरु,हैदराबाद 8-06 से      11-12 तक

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Thursday, December 12, 2019

पूरी दुनिया को मुसलमान बनाने के लिए कितने संगठन कार्य कर रहे हैं ! आओ जाने!


 1) अल -शबाब (अफ्रीका ), 
2) अल मुराबितुंन (अफ्रीका ), 
3) अल -कायदा (अफगानिस्तान ), 
4) अल -क़ाएदा (इस्लामिक मघरेब ), 
5) अल -क़ाएदा (इंडियन सबकॉन्टिनेंट ), 
6) अल -क़ाएदा (अरेबियन पेनिनसुला ),
7) हमास (पलेस्टाइन ), 
8) पलिस्तीनियन इस्लामिक जिहाद (पलेस्टाइन ), 
9) पॉपुलर फ्रंट फॉर द लिबरेशन ऑफ़ (पलेस्टाइन ), 
10) हेज़बोल्ला (लेबनान ), 
11) अंसार अल -शरीया -बेनग़ाज़ी (लेबनान ), 
12) असबात अल -अंसार (लेबनान ), 
13) ISIS (इराक ), 
14) ISIS (सीरिया ),
15) ISIS (कवकस )
16) ISIS (लीबिया )
17) ISIS (यमन )
18) ISIS (अल्जीरिया ), 
19) ISIS (फिलीपींस )
20) जुन्द अल -शाम (अफगानिस्तान ), 
21) मौराबितौं (लेबनान ), 
22) अलअब्दुल्लाह अज़्ज़म ब्रिगेड्स (लेबनान ), 
23) अल -इतिहाद अल -इस्लामिया (सोमालिया ), 
24) अल -हरमैन फाउंडेशन (सऊदी अरबिया ), 
25) अंसार -अल -शरीया (मोरोक्को ),
26) मोरोक्को मुदजादिने (मोरक्को ), 
27) सलफीआ जिहदिआ (मोरक्को ), 
28) बोको हराम (अफ्रीका ), 
29) इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ (उज़्बेकिस्तान ), 
30) इस्लामिक जिहाद यूनियन (उज़्बेकिस्तान ), 
31) इस्लामिक जिहाद यूनियन (जर्मनी ), 
32) DRW True -रिलिजन (जर्मनी )
33) फजर नुसंतरा मूवमेंट (जर्मनी )
34) DIK हिल्देशियम (जर्मनी )
35) जैश -ए -मुहम्मद (कश्मीर ), 
36) जैश अल -मुहाजिरीन वल -अंसार (सीरिया ), 
37) पॉपुलर फ्रंट फॉर द लिबरेशन ऑफ़ पलेस्टाइन (सीरिया ), 
38) जमात अल दावा अल क़ुरान (अफगानिस्तान ), 
39) जुंदल्लाह (ईरान )
40) क़ुद्स फाॅर्स (ईरान )
41) Kata'ib हेज़बोल्लाह (इराक ), 
42) अल -इतिहाद अल -इस्लामिया (सोमालिया ), 
43) Egyptian इस्लामिक जिहाद (Egypt ), 
44) जुन्द अल -शाम (जॉर्डन )
45) फजर नुसंतरा मूवमेंट (ऑस्ट्रेला )
46) सोसाइटी ऑफ़ द रिवाइवल ऑफ़ इस्लामिक हेरिटेज (टेरर फंडिंग , वर्ल्डवाइड ऑफिसेस )
47) तालिबान (अफगानिस्तान ), 
48) तालिबान (पाकिस्तान ), 
49) तहरीक -i-तालिबान (पाकिस्तान ), 
50) आर्मी ऑफ़ इस्लाम (सीरिया ), 
51) इस्लामिक मूवमेंट (इजराइल )
52) अंसार अल शरीया (तुनिशिया ), 
53) मुजाहिदीन शूरा कौंसिल इन द एनवीरोंस ऑफ़ (जेरूसलम ), 
54) लिबयान इस्लामिक फाइटिंग ग्रुप (लीबिया ), 
55) मूवमेंट फॉर वेनेस्स एंड जिहाद इन (वेस्ट अफ्रीका ), 
56) पलिस्तीनियन इस्लामिक जिहाद (पलेस्टाइन )
57) तेव्हीद-सेलम (अल -क़ुद्स आर्मी )
58) मोरक्कन इस्लामिक कोंबटेंट ग्रुप (मोररोको ), 
59) काकेशस अमीरात (रूस ), 
60) दुख्तरान -ए -मिल्लत फेमिनिस्ट इस्लामिस्ट्स (इंडिया ),
61) इंडियन मुजाहिदीन (इंडिया ), 
62) जमात -उल -मुजाहिदीन (इंडिया )
63) अंसार अल -इस्लाम (इंडिया )
64) स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ (इंडिया ), 
65) हरकत मुजाहिदीन (इंडिया ), 
66) हिज़्बुल मुझेडीन (इंडिया )
67) लश्कर ए इस्लाम (इंडिया )
68) जुन्द अल -खिलाफह (अल्जीरिया ), 
69) तुर्किस्तान इस्लामिक पार्टी ,
70) Egyptian इस्लामिक जिहाद (Egypt),
71) ग्रेट ईस्टर्न इस्लामिक रेडर्स' फ्रंट (तुर्की),
72) हरकत -उल -जिहाद अल -इस्लामी (पाकिस्तान ),
73) तहरीक -ए -नफ़ज़ -ए -शरीअत -ए -मोहम्मदी (पाकिस्तान ), 
74) लश्कर ए तोइबा (पाकिस्तान )
75) लश्कर ए झांगवी (पाकिस्तान )
76) अहले सुन्नत वल जमात (पाकिस्तान ),
77) जमात उल -एहरार (पाकिस्तान ), 
78) हरकत -उल -मुजाहिदीन (पाकिस्तान ), 
79) जमात उल -फुरकान (पाकिस्तान ), 
80) हरकत -उल -मुजाहिदीन (सीरिया ), 
81) अंसार अल -दिन फ्रंट (सीरिया ), 
82) जब्हत फ़तेह अल -शाम (सीरिया ), 
83) जमाह अन्शोरूट दौलाह (सीरिया ), 
84) नौर अल -दिन अल -ज़ेन्कि मूवमेंट (सीरिया ),
85) लिवा अल -हक़्क़ (सीरिया ), 
86) अल -तौहीद ब्रिगेड (सीरिया ), 
87) जुन्द अल -अक़्सा (सीरिया ), 
88) अल -तौहीद ब्रिगेड (सीरिया ), 
89) यरमूक मार्टियर्स ब्रिगेड (सीरिया ), 
90) खालिद इब्न अल -वालिद आर्मी (सीरिया ), 
91) हिज़्ब -ए इस्लामी गुलबुद्दीन (अफगानिस्तान ), 
92) जमात -उल -एहरार (अफगानिस्तान ) 
93) हिज़्ब उत -तहरीर (वर्ल्डवाइड कलिफाते ), 
94) हिज़्बुल मुजाहिदीन ( इंडिया), 
95) अंसार अल्लाह (यमन ), 
96) हौली लैंड फाउंडेशन फॉर रिलीफ एंड डेवलपमेंट (USA), 
97) जमात मुजाहिदीन (इंडिया ), 
98) जमाह अंशरूत तौहीद (इंडोनेशिया ), 
99) हिज़्बुत तहरीर (इंडोनेशिया ), 
100) फजर नुसंतरा मूवमेंट (इंडोनेशिया ), 
101) जेमाह इस्लामियाह (इंडोनेशिया ), 
102) जेमाह इस्लामियाह (फिलीपींस ), 
103) जेमाह इस्लामियाह (सिंगापुर ), 
104) जेमाह इस्लामियाह (थाईलैंड ), 
105) जेमाह इस्लामियाह (मलेशिया ), 
106) अंसार दीने (अफ्रीका ), 
107) ओस्बत अल -अंसार (पलेस्टाइन ), 
108) हिज़्ब उल -तहरीर (ग्रुप कनेक्टिंग इस्लामिक केलिफेट्स अक्रॉस द वर्ल्ड इनटू वन वर्ल्ड इस्लामिक केलिफेट्स )
109) आर्मी ऑफ़ द मेन ऑफ़ द नक्शबंदी आर्डर (इराक )
110) अल नुसरा फ्रंट (सीरिया ), 
111) अल -बदर (पाकिस्तान ), 
112) इस्लाम 4UK (UK), 
113) अल घुरबा (UK), 
114) कॉल टू सबमिशन (UK), 
115) इस्लामिक पथ (UK), 
116) लंदन स्कूल ऑफ़ शरीया (UK), 
117) मुस्लिम्स अगेंस्ट क्रुसडेस (UK), 
118) नीड 4Khilafah (UK), 
119) द शरिया प्रोजेक्ट (UK), 
120) द इस्लामिक दवाह एसोसिएशन (UK), 
121) द सवियर सेक्ट (UK), 
122) जमात उल -फुरकान (UK), 
123) मिनबर अंसार दीन (UK), 
124) अल -मुहाजिरों (UK) (Lee Rigby, लंदन 2017 मेंबर्स ), 
125) इस्लामिक कौंसिल ऑफ़ ब्रिटैन (UK) (नॉट टू बी कन्फ्यूज्ड विद ओफ़फिशिअल मुस्लिम कौंसिल ऑफ़ ब्रिटैन ), 
126) अहलुस सुन्नाह वल जमाह (UK), 
128) अल -गामा'अ (Egypt ), 
129) अल -इस्लामियया (Egypt), 
130) आर्म्ड इस्लामिक मेन ऑफ़ (अल्जीरिया ), 
131) सलाफिस्ट ग्रुप फॉर कॉल एंड कॉम्बैट (अल्जीरिया ), 
132) अन्सारु (अल्जीरिया ), 
133) अंसार -अल -शरीया (लीबिया ), 
134) अल इत्तिहाद अल इस्लामिआ (सोमालिया ), 
135) अंसार अल -शरीया (तुनिशिया ), 
136) शबब (अफ्रीका ), 
137) अल -अक़्सा फाउंडेशन (जर्मनी )
138) अल -अक़्सा मार्टियर्स' ब्रिगेड्स (पलेस्टाइन ), 
139) अबू सय्याफ (फिलीपींस ), 
140) अदेन-अबयान इस्लामिक आर्मी (यमन ), 
141) अजनाद मिस्र (Egypt), 
142) अबू निदाल आर्गेनाइजेशन (पलेस्टाइन ), 
143) जमाह अंशरूत तौहीद (इंडोनेशिया )

कई लोग गलत तरीके से इस्लाम को बदनाम करते हैं ! ये ऊपर लिखे सारे इस्लामिक संगठन तो शांति की स्थापना में लगे हुए है ! *बस केवल आरएसएस ही ऐसा संगठन है जो पूरे विश्व में आतंकवाद फैलाता ह*ै, मतलब हद हैं मानसिक विकलांगता की।