Friday, May 8, 2020

महाराणा प्रताप जी का जन्म 9 मई को हुवा था।

"महा पराक्रमी- वीर योद्धा- वीर राजा- महाराणा प्रताप" जी का जन्म ९ मई १५४० में कुम्भलगढ़ दुर्ग, जिला राजसमंद राजस्थान (वर्तमान में चावंड, जिला उदयपुर) पिता महाराणा उदयसिंह एवं माता महाराणी जयवंताबाई के यहाँ हुआ था। 

राजस्थान के वीर सपूत, महान योद्धा, अद्भुत शौर्य और पराक्रम के प्रतीक महाराण प्रताप उन्हें बचपन और युवावस्था में 'कीका' नाम से पुकारा जाता था। ये नाम उन्हें भीलों से मिला था जिनकी संगत में उन्होंने शुरूआती दिन बिताये थे। भीलों की बोली में कीका का अर्थ होता है---"बेटा"।

महाराणा प्रताप की वीरता की कहानियों में चेतक का अपना स्थान है। उसका फुर्ती, रफ्तार और बहादुरी की कई लड़ाइयां जितने में अहम भूमिका रही। महाराणा प्रताप ने मुगलों से कई लड़ाइयां लड़ी लेकिन सबसे ऐतिहासिक हल्दीघाटी का युद्ध जिसमें उनका मानसिंह के नेतृत्व वाली अकबर की विशाल सेना से आमना-सामना हुआ। १५७६ में हुए इस जबरदस्त युद्ध में करीब २० हजार सैनिकों के साथ महाराणा प्रताप ने ८० हजार सैनिकों का मुकाबला किया। 

यह मध्यकालीन भारतीय इतिहास का सबसे चर्चित युद्ध है। इस युद्ध में महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक जख्मी हो गया था। अधिकांश राजपूत राजा मुगलों के आधीन हो गये थे लेकिन महाराणा प्रताप ने कभी स्वाभिमान को नहीं छोड़ा। उन्होंने मुगल सम्राट अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की जिसके कारण कई वर्षों तक संघर्ष किया। 

१५८२ में दिवेर के युद्ध में महाराणा प्रताप ने उन क्षेत्रों पर फिर से अधिकार जमा लिया था जो कभी मुगलों के हाथों गंवा दिये थे। कर्नल जेम्स टाॅ ने मुगलों के साथ हुए इस युद्ध को मेवाड़ का मैराथन कहा था। १५८५ तक लंबे संघर्ष के बाद वे मेवाड़ को मुक्त कराने में सफल रहे। 

१५९६ में शिकार खेलते समय उन्हें चोट लगी, जिसके कारण वो कभी उबर नहीं पाये। १९ जनवरी १५९७ को ५७ वर्ष की आयु में चावड़ में उनका देहांत हो गया। इस महा पराक्रमी वीर योद्धा की मौत की खबर सुनकर अकबर भी रोया था।                     

कुत्त नहीं मेरा बेटा है! (लोकडाउन कि एक घटना)

लोकडाउन के समय की यह सच्ची घटना आपको आश्चर्यचकित कर देगी।



वे लोग पिछले कई दिनों से इस जगह पर खाना बाँट रहे थे।हैरानी की बात ये थी कि एक कुत्ता हर रोज आता था और किसी न किसी के हाथ से खाने का पैकेट छीनकर ले जाता था।आज उन्होने एक आदमी की ड्यूटी भी लगाई थी कि खाने को लेने के चक्कर में कुत्ता किसी आदमी को न काट ले। 

लगभग ग्यारह बजे का समय हो चुका था और वे लोग अपना खाना वितरण शुरू कर चुके थे। तभी देखा कि वह कुत्ता तेजी से आया और एक आदमी के हाथ से खाने की थैली झपटकर भाग गया।वह लड़का जिसकी ड्यूटी थी कि कोई जानवर किसी पर हमला न कर दे, वह डंडा लेकर उस कुत्ते का पीछा करते हुए कुत्ते के पीछे भागा।कुत्ता भागता हुआ थोड़ी दूर एक झोंपड़ी में घुस गया।वह आदमी भी उसका पीछा करता हुआ झोंपड़ी तक आ गया।कुत्ता खाने की थैली झोंपड़ी में रख के बाहर आ चुका था।

वह आदमी बहुत हैरान था।वह झोंपड़ी में घुसा तो देखा कि एक आदमी अंदर लेटा हुआ है। चेहरे पर बड़ी सी दाढ़ी है और उसका एक पैर भी नहीं है।गंदे से कपड़े हैं उसके।

"ओ भैया! ये कुत्ता तुम्हारा है क्या?"

"मेरा कोई कुत्ता नहीं है।कालू तो मेरा बेटा है। उसे कुत्ता मत कहो।"
अपंग बोला।

"अरे भाई !हर रोज खाना छीनकर भागता है वो। किसी को काट लिया तो ऐसे में कहाँ डॉक्टर मिलेगा.... उसे बांध के रखा करो।खाने की बात है तो कल से मैं खुद दे जाऊंगा तुम्हें।"उस लड़के ने कहा।

"बात खाने की नहीं है।मैं उसे मना नहीं कर सकूँगा।मेरी भाषा भले ही न समझता हो लेकिन मेरी भूख को समझता है।जब मैं घर छोड़ के आया था तब से यही मेरे साथ है।मैं नहीं कह सकता कि मैंने उसे पाला है या उसने मुझे पाला है। मेरे तो बेटे से भी बढ़कर है। मैं तो रेड लाइट पर पैन बेचकर अपना गुजारा करता हूँ..... पर अब सब बंद है।"

वह लड़का एकदम मौन हो गया।उसे ये संबंध समझ ही नहीं आ रहा था।उस आदमी ने खाने का पैकेट खोला और आवाज लगाई, "कालू ! ओ बेटा कालू ..... आ जा खाना खा ले।"

कुत्ता दौड़ता हुआ आया और उस आदमी का मुँह चाटने लगा।खाने को उसने सूंघा भी नहीं। उस आदमी ने खाने की थैली खोली और पहले कालू का हिस्सा निकाला,फिर अपने लिए खाना रख लिया। 

"खाओ बेटा !"उस आदमी ने कुत्ते से कहा।मगर कुत्ता उस आदमी को ही देखता रहा।तब उसने अपने हिस्से से खाने का निवाला लेकर खाया। उसे खाते देख कुत्ते ने भी खाना शुरू कर दिया। दोनों खाने में व्यस्त हो गए।उस लड़के के हाथ से डंडा छूटकर नीचे गिर पड़ा था।जब तक दोनों ने खा नहीं लिया वह अपलक उन्हें देखता रहा। 

"भैया जी !आप भले गरीब हों ,मजबूर हों,मगर आपके जैसा बेटा किसी के पास नहीं होगा।" उसने जेब से पैसे निकाले और उस भिखारी के हाथ में रख दिये। 

"रहने दो भाई,किसी और को ज्यादा जरूरत होगी इनकी।मुझे तो कालू ला ही देता है।मेरे बेटे के रहते मुझे कोई चिंता नहीं।" 

वह लड़का हैरान था कि आज आदमी,आदमी से छीनने को आतुर है,और ये कुत्ता...बिना अपने मालिक के खाये.... खाना भी नहीं खाता है। उसने अपने सिर को ज़ोर से झटका और वापिस चला आया।अब उसके हाथ में कोई डंडा नहीं था।
प्यार पर कोई वार कर भी कैसे सकता है.... और ये तो प्यार की पराकाष्ठा थी।

            🙏राम राम

Sunday, May 3, 2020

मोहिनी एकादशी (4 मई 2020 सोमवार) व्रत कथा:



(एकादशी के दिन इस महात्म्य को मात्र पढ़ने और सुनने से ही सहस्र गौदान का फल मिलता है)

युधिष्ठिर ने पूछा : जनार्दन ! वैशाख मास के शुक्लपक्ष में किस नाम की एकादशी होती है? उसका क्या फल होता है? उसके लिए कौन सी विधि है?

भगवान श्रीकृष्ण बोले : धर्मराज ! पूर्वकाल में परम बुद्धिमान श्रीरामचन्द्रजी ने महर्षि वशिष्ठजी से यही बात पूछी थी, जिसे आज तुम मुझसे पूछ रहे हो ।

श्रीराम ने कहा : भगवन् ! जो समस्त पापों का क्षय तथा सब प्रकार के दु:खों का निवारण करनेवाला, व्रतों में उत्तम व्रत हो, उसे मैं सुनना चाहता हूँ ।

वशिष्ठजी बोले : श्रीराम ! तुमने बहुत उत्तम बात पूछी है । मनुष्य तुम्हारा नाम लेने से ही सब पापों से शुद्ध हो जाता है । तथापि लोगों के हित की इच्छा से मैं पवित्रों में पवित्र उत्तम व्रत का वर्णन करुँगा । वैशाख मास के शुक्लपक्ष में जो एकादशी होती है, उसका नाम ‘मोहिनी’ है । वह सब पापों को हरनेवाली और उत्तम है । उसके व्रत के प्रभाव से मनुष्य मोहजाल तथा पातक समूह से छुटकारा पा जाते हैं ।

सरस्वती नदी के रमणीय तट पर भद्रावती नाम की सुन्दर नगरी है । वहाँ धृतिमान नामक राजा, जो चन्द्रवंश में उत्पन्न और सत्यप्रतिज्ञ थे, राज्य करते थे । उसी नगर में एक वैश्य रहता था, जो धन धान्य से परिपूर्ण और समृद्धशाली था । उसका नाम था धनपाल । वह सदा पुण्यकर्म में ही लगा रहता था । दूसरों के लिए पौसला (प्याऊ), कुआँ, मठ, बगीचा, पोखरा और घर बनवाया करता था । भगवान विष्णु की भक्ति में उसका हार्दिक अनुराग था । वह सदा शान्त रहता था । उसके पाँच पुत्र थे : सुमना, धुतिमान, मेघावी, सुकृत तथा धृष्टबुद्धि । धृष्टबुद्धि पाँचवाँ था । वह सदा बड़े बड़े पापों में ही संलग्न रहता था । जुए आदि दुर्व्यसनों में उसकी बड़ी आसक्ति थी । वह वेश्याओं से मिलने के लिए लालायित रहता था । उसकी बुद्धि न तो देवताओं के पूजन में लगती थी और न पितरों तथा ब्राह्मणों के सत्कार में । वह दुष्टात्मा अन्याय के मार्ग पर चलकर पिता का धन बरबाद किया करता था। एक दिन वह वेश्या के गले में बाँह डाले चौराहे पर घूमता देखा गया । तब पिता ने उसे घर से निकाल दिया तथा बन्धु बान्धवों ने भी उसका परित्याग कर दिया । अब वह दिन रात दु:ख और शोक में डूबा तथा कष्ट पर कष्ट उठाता हुआ इधर उधर भटकने लगा । एक दिन किसी पुण्य के उदय होने से वह महर्षि कौण्डिन्य के आश्रम पर जा पहुँचा । वैशाख का महीना था । तपोधन कौण्डिन्य गंगाजी में स्नान करके आये थे । धृष्टबुद्धि शोक के भार से पीड़ित हो मुनिवर कौण्डिन्य के पास गया और हाथ जोड़ सामने खड़ा होकर बोला : ‘ब्रह्मन् ! द्विजश्रेष्ठ ! मुझ पर दया करके कोई ऐसा व्रत बताइये, जिसके पुण्य के प्रभाव से मेरी मुक्ति हो ।’

कौण्डिन्य बोले : वैशाख के शुक्लपक्ष में ‘मोहिनी’ नाम से प्रसिद्ध एकादशी का व्रत करो । ‘मोहिनी’ को उपवास करने पर प्राणियों के अनेक जन्मों के किये हुए मेरु पर्वत जैसे महापाप भी नष्ट हो जाते हैं |’

वशिष्ठजी कहते है : श्रीरामचन्द्रजी ! मुनि का यह वचन सुनकर धृष्टबुद्धि का चित्त प्रसन्न हो गया । उसने कौण्डिन्य के उपदेश से विधिपूर्वक ‘मोहिनी एकादशी’ का व्रत किया । नृपश्रेष्ठ ! इस व्रत के करने से वह निष्पाप हो गया और दिव्य देह धारण कर गरुड़ पर आरुढ़ हो सब प्रकार के उपद्रवों से रहित श्रीविष्णुधाम को चला गया । इस प्रकार यह ‘मोहिनी’ का व्रत बहुत उत्तम है । इसके पढ़ने और सुनने से सहस्र गौदान का फल मिलता है ।


जय श्री कृष्णा। राधे राधे🙏🏻

कृष्ण और कर्ण के बीच सबसे अच्छा संवाद क्या था?



महाभारत में कर्ण ने भगवान कृष्ण से पूछा -

“मेरी माँ ने मुझे उसी क्षण छोड़ दिया जब मैं पैदा हुआ था। क्या यह मेरी गलती है कि मैं एक नाजायज बच्चा पैदा हुआ?
मुझे द्रोणाचार्य से शिक्षा नहीं मिली थी क्योंकि मुझे गैर-क्षत्रिय माना जाता था।
परशु-राम ने मुझे सिखाया लेकिन फिर मुझे एक क्षत्रिय होने के बाद सब कुछ भूल जाने का शाप दे दिया।
एक गाय गलती से मेरे तीर से टकरा गई थी और उसके मालिक ने बिना किसी दोष के मुझे शाप दिया था।
मुझे द्रौपदी के स्वयंवर में अपमानित होना पड़ा।
यहाँ तक कि कुंती ने भी आखिरकार मुझे अपने बाकी बेटों को बचाने के लिए ही सच कहा।
मुझे जो कुछ भी मिला वह दुर्योधन के दान के माध्यम से था।
तो मैं उसका पक्ष लेने में कैसे गलत हूँ? ”

भगवान कृष्ण जवाब देते हैं,

“कर्ण, मैं एक जेल में पैदा हुआ था और जन्म से पहले ही मृत्यु मेरी प्रतीक्षा कर रही थी।
जिस रात मैं पैदा हुआ था, मैं अपने जन्म के माता-पिता से अलग हो गया था।
बचपन से तलवारों, रथों, घोड़ों, धनुष और तीरों का शोर सुनकर बड़ा हुआ। मेरे चलने से पहले ही मुझे सिर्फ गाय के झुंड, गोबर और साथे में मुझे जान से मारने के कई प्रयास मिले!
न सेना, न शिक्षा। लोगों कहते थे कि मैं उनकी सभी समस्याओं का कारण हूं।
जब आप सभी को आपके शिक्षकों द्वारा आपकी वीरता के लिए सराहा जा रहा था तो मैंने भी कोई शिक्षा नहीं ली थी। मैं केवल 16 साल की उम्र में ऋषि संदीपनी के गुरुकुल में शामिल हो गया!
आप अपनी पसंद की लड़की से शादी कर रहे हैं। मुझे उन लड़कियों से शादी करनी पड़ी जिन्हें मैंने राक्षसों से बचाया था।
मुझे अपने पूरे समुदाय को जरासंध से बचाने के लिए यमुना के तट से दूर समुद्र के किनारे तक जाना पड़ा। मुझे भाग जाने के लिए कायर कहा जाता था !!
यदि दुर्योधन युद्ध जीतता है तो आपको बहुत अधिक श्रेय मिलेगा। धर्मराज युद्ध जीतने पर मुझे क्या मिलेगा??? युद्ध और सभी संबंधित समस्याओं के लिए केवल दोष ?
एक बात याद रखना, कर्ण। हर किसी के जीवन में चुनौतियां होती हैं। जीवन किसी के लिए भी पूरी तरह से उचित या अच्छा नहीं है !!! दुर्योधन के जीवन में भी उसे बहुत सी परेशानियाँ मिली और युधिष्ठिर को भी।

लेकिन क्या सही (धर्म) है इसका निर्णय आपको अपने दिमाग (विवेक) से लेना होता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हमें कितनी परेशानियां मिली, हमें कितनी बार वह अवसर नहीं मिले जिसके हम लायक थे, जो महत्वपूर्ण है वह यह कि आपकी उस समय प्रतिक्रिया क्या थी।

शिकयत करना बंद करो। जीवन की अनुचितता आपको गलत रास्ते पर चलने का लाइसेंस नहीं देती है…

हमेशा याद रखें, जीवन एक बिंदु पर कठिन हो सकता है, लेकिन हमारा भाग्य हमें मिले रास्तों से नहीं बनता बल्कि बनता है की हम उन रास्तों पर कैसे चले।

दुनिया का सबसे ताकतवर पोषण पूरक आहार है- सहजन (मुनगा)Drumstick।


कहा जाता है!! दुनिया का सबसे ताकतवर पोषण पूरक आहार है- सहजन (मुनगा)ड्रमस्टिक। इसकी जड़ से लेकर फूल, पत्ती, फल्ली, तना, गोंद हर चीज उपयोगी होती है। 
           आयुर्वेद में सहजन से तीन सौ रोगों का उपचार संभव है। सहजन के पौष्टिक गुणों की तुलना :- विटामिन सी- संतरे से सात गुना अधिक। विटामिन ए- गाजर से चार गुना अधिक। कैलशियम- दूध से चार गुना अधिक। पोटेशियम- केले से तीन गुना अधिक। प्रोटीन- दही की तुलना में तीन गुना अधिक। 
            स्वास्थ्य के हिसाब से इसकी फली, हरी और सूखी पत्तियों में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन-ए, सी और बी-काम्प्लेक्स प्रचुर मात्रा में पाई जाते हैं। इनका सेवन कर कई बीमारियों को बढ़ने से रोका जा सकता है, इसका बॉटेनिकल नाम ' मोरिगा ओलिफेरा ' है। हिंदी में इसे सहजना, सुजना, सेंजन और मुनगा नाम से भी जानते हैं, जो लोग इसके बारे में जानते हैं, वे इसका सेवन जरूर करते हैं। 
          सहजन का फूल पेट और कफ रोगों में, इसकी फली वात व उदरशूल में, पत्ती नेत्ररोग, मोच, साइटिका, गठिया आदि में उपयोगी है। इसकी छाल का सेवन साइटिका, गठिया, लीवर में लाभकारी होता है। सहजन के छाल में शहद मिलाकर पीने से वात और कफ रोग खत्म हो जाते हैं। 
          सहजन की पत्ती का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया, साइटिका, पक्षाघात, वायु विकार में शीघ्र लाभ पहुंचता है। साइटिका के तीव्र वेग में इसकी जड़ का काढ़ा तीव्र गति से चमत्कारी प्रभाव दिखाता है। मोच इत्यादि आने पर सहजन की पत्ती की लुगदी बनाकर सरसों तेल डालकर आंच पर पकाएं और मोच के स्थान पर लगाने से जल्दी ही लाभ मिलने लगता है।
            सहजन के फली की सब्जी खाने से पुराने गठिया, जोड़ों के दर्द, वायु संचय, वात रोगों में लाभ होता है। इसके ताजे पत्तों का रस कान में डालने से दर्द ठीक हो जाता है साथ ही इसकी सब्जी खाने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी कटकर निकल जाती है। इसकी जड़ की छाल का काढ़ा सेंधा नमक और हींग डालकर पीने से पित्ताशय की पथरी में लाभ होता है। 
          सहजन के पत्तों का रस बच्चों के पेट के कीड़े निकालता है और उल्टी-दस्त भी रोकता है। ब्लड प्रेशर और मोटापा कम करने में भी कारगर सहजन का रस सुबह-शाम पीने से हाई ब्लड प्रेशर में लाभ होता है। इसकी पत्तियों के रस के सेवन से मोटापा धीरे-धीरे कम होने लगता है। इसकी छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़े नष्ट होते हैं और दर्द में आराम मिलता है। 
            सहजन के कोमल पत्तों का साग खाने से कब्ज दूर होता है, इसके अलावा इसकी जड़ के काढ़े को सेंधा नमक और हींग के साथ पीने से मिर्गी के दौरों में लाभ होता है। इसकी पत्तियों को पीसकर लगाने से घाव और सूजन ठीक होते हैं। 
          सहजन के बीज से पानी को काफी हद तक शुद्ध करके पेयजल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसके बीज को चूर्ण के रूप में पीसकर पानी में मिलाया जाता है। पानी में घुल कर यह एक प्रभावी नेचुरल क्लोरीफिकेशन एजेंट बन जाता है। यह न सिर्फ पानी को बैक्टीरिया रहित बनाता है, बल्कि यह पानी की सांद्रता को भी बढ़ाता है।
            कैंसर तथा शरीर के किसी हिस्से में बनी गांठ, फोड़ा आदि में सहजन की जड़ का अजवाइन, हींग और सौंठ के साथ काढ़ा बनाकर पीने का प्रचलन है। यह काढ़ा साइटिका (पैरों में दर्द), जोड़ों में दर्द, लकवा, दमा, सूजन, पथरी आदि में भी लाभकारी है |
            सहजन के गोंद को जोड़ों के दर्द तथा दमा आदि रोगों में लाभदायक माना जाता है। आज भी ग्रामीणों की ऐसी मान्यता है कि सहजन के प्रयोग से वायरस से होने वाले रोग, जैसे चेचक आदि के होने का खतरा टल जाता है। 
           सहजन में अधिक मात्रा में ओलिक एसिड होता है, जो कि एक प्रकार का मोनोसैच्युरेटेड फैट है और यह शरीर के लिए अति आवश्यक है। सहजन में विटामिन-सी की मात्रा बहुत होती है। यह शरीर के कई रोगों से लड़ता है। यदि सर्दी की वजह से नाक-कान बंद हो चुके हैं तो, सहजन को पानी में उबालकर उस पानी का भाप लें। इससे जकड़न कम होती है। सहजन में कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है, जिससे हड्डियां मजबूत बनती हैं। इसका जूस गर्भवती को देने की सलाह दी जाती है, इससे डिलवरी में होने वाली समस्या से राहत मिलती है और डिलवरी के बाद भी मां को तकलीफ कम होती है, गर्भवती महिला को इसकी पत्तियों का रस देने से डिलीवरी में आसानी होती है।
           सहजन के फली की हरी सब्जी को खाने से बुढ़ापा दूर रहता है इससे आंखों की रोशनी भी अच्छी होती है। सहजन को सूप के रूप में भी पी सकते हैं,  इससे शरीर का खून साफ होता है। 
            सहजन का सूप पीना सबसे अधिक फायदेमंद होता है। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है। विटामिन सी के अलावा यह बीटा कैरोटीन, प्रोटीन और कई प्रकार के लवणों से भरपूर होता है, यह मैगनीज, मैग्नीशियम, पोटैशियम और फाइबर से भरपूर होते हैं। यह सभी तत्व शरीर के पूर्ण विकास के लिए बहुत जरूरी हैं। 
            कैसे बनाएं सहजन का सूप? सहजन की फली को कई छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लेते हैं। दो कप पानी लेकर इसे धीमी आंच पर उबलने के लिए रख देते हैं, जब पानी उबलने लगे तो इसमें कटे हुए सहजन की फली के टुकड़े डाल देते हैं, इसमें सहजन की पत्त‍ियां भी मिलाई जा सकती हैं, जब पानी आधा बचे तो सहजन की फलियों के बीच का गूदा निकालकर ऊपरी हिस्सा अलग कर लेते हैं, इसमें थोड़ा सा नमक और काली मिर्च मिलाकर पीना चाहिए। 
           १. सहजन के सूप के नियमित सेवन से सेक्सुअल हेल्थ बेहतर होती है. सहजन महिला और पुरुष दोनों के लिए समान रूप से फायदेमंद है। 
           २. सहजन में एंटी-बैक्टीरियल गुण पाया जाता है जो कई तरह के संक्रमण से सुरक्षित रखने में मददगार है. इसके अलावा इसमें मौजूद विटामिन सी इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने का काम करता है। 
          ३. सहजन का सूप पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाने का काम करता है, इसमें मौजूद फाइबर्स कब्ज की समस्या नहीं होने देते हैं। 
          ४. अस्थमा की शिकायत होने पर भी सहजन का सूप पीना फायदेमंद होता है. सर्दी-खांसी और बलगम से छुटकारा पाने के लिए इसका इस्तेमाल घरेलू औषधि के रूप में किया जाता है। 
          ५. सहजन का सूप खून की सफाई करने में भी मददगार है, खून साफ होने की वजह से चेहरे पर भी निखार आता है। 
          ६. डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए भी सहजन के सेवन की सलाह दी जाती है।
प्रस्तुति - जितेन्द्र रघुवंशी, प्रज्ञाकुंज, हरिद्वार

Thursday, April 23, 2020

प्रधानमंत्री जी (श्री नरेंद्र मोदी जी) की दिनचर्या


प्रधान मंत्री मोदी जी की दिनचर्या

सबेरे 4:45 जागना:
–आपका सोने का समय जो कुछ भी हो, पर जागने का समय निश्चित 4:45 है।
—प्रति दिन सबेरे आप 30 मिनट शौच-स्नान इत्यादि में लगाते हैं।
साथ साथ प्रमुख समाचारों को भी देख लेते हैं।
—पश्चात 30 मिनट ( योगासन ) व्यायाम करते हैं।
—–एवं गत दिवस के संसार के समाचारों का चयन, और भारत के और भाजप के समाचारों की (चयनित ) ध्वनि मुद्रिका  (रिकार्डिंग) सुनते हैं।
—–उपरान्त मंदिर में बैठ 10 मिनट ध्यान करते हैं।
—–फिर एक कप चाय लेते हैं। साथ कोई अल्पाहार (नाश्ता) नहीं लेते।
—–6:15 बजे एक शासकीय विभाग आप के बैठक कक्ष में प्रस्तुति के लिए सज्ज रहता है। उनकी प्रस्तुति होती है।

—–7 से 9 आई हुयी सारी  संचिकाएँ  (फाइलों) देख लेते हैं।
——और आप की माता जी से दूरभाष (फोन)पर बात होती है। कुशल- क्षेम -स्वास्थ्य समाचार पूछते हैं।
{लेखक: *भारत का प्रधान मंत्री अपनी माँ के लिए समय निकालता है। क्या, हम भी ऐसा समय निकाल पाते हैं? या हम प्रधान मंत्री जी से अधिक व्यस्त हैं?*}

अल्पाहार:
—-9 बजे गाजर और अन्य शाक-फल इत्यादि का अल्पाहार होता है।
साथ निम्न विधि से बना हुआ पंचामृत (पेय) पीते हैं। {पंचामृत विधि: 20 मिलिलिटर मधु, 10 मिलिलिटर देशी गौ का घी,  पुदिना, तुलसी, और नीम की कोमल पत्तियों का रस )

कार्यालय
—–9:15 पर कार्यालय पहुंच कर महत्वपूर्ण बैठकें करते हैं।

भोजन
—-दुपहर भोजन में पाँच वस्तुएं होती है। (गुजराती रोटी, शाक, दाल, सलाद, छाछ)
—–संध्या को चार बजे बिना दूध की नीबू वाली चाय पीते हैं।
—–और  6 बजे खिचडी और दूध का भोजन.
—–रात्रि के 9 बजे देशी गौ का दूध एक गिलास, सोंठ (अद्रक का चूर्ण) डालकर।
—–मुखवास में, नीबू, काली मिर्च, और भूँजी हुयी अजवाइन (जिससे वायु नही होता) का मिश्रण।
घूमना:
—–9 से  9:30 घूमना, साथ एक विषय के जानकार, चर्चा करते हुए  साथ घूमते हैं।
—–9:30 से 10:00 सामाजिक  संचार माध्यम (Social Media), साथ  साथ चुने हुए पत्रों के उत्तर देते हैं।
विशेष:
नरेंद्र भाई ने जीवन में कभी बना बनाया, पूर्वपक्व आहार  (Fast Food), नहीं खाया, न बना बनाया पेय(soft drink) पिया है।
—–भारत के 400 जिलों का प्रवास आप ने किया हुआ है।
—–जब गुजरात से दिल्ली गए, तो दो ही वस्तुएँ साथ ले गए। कपडे और पुस्तकें। (लेखक की जानकारी है, कि,उन्हें स्वभावतः कपडों की विशेष रूचि है।)वे एक  कपडों से भरी, और 6 पुस्तकों से भरी (अलमारियाँ)धानियाँ,  ले गए।
——सतत प्रवास में आप रात को किसी संत के साथ आश्रम में, या किसी छोटे कार्यकर्ता के घर रूकते थे। होटल में कभी नहीं।
—–वडनगर वाचनालय की सारी पुस्तकें आपने पढी थी।
—–किसी प्रसंग विशेष पर आप निजी उपहार में, पुस्तक ही देते थे। गत एक दशक में नव विवाहितों को “सिंह पुरुष” पुस्तक उपहार में देते थे। अब भारत के प्रधान मंत्री के नाते “भगवदगीता उपहार में देते है।
—–वे ब्रश से नहीं पर करंज का दातुन करते हैं।
—–आप की रसोई में नमक नहीं, पर सैंधव नमक का प्रयोग होता है।
—–प्रवास के समयावधि में  संचिकाएँ (फाइलें), और चर्चा करने वाले मंत्री साथ होते हैं।
—–64 वर्ष की आयु में आप सीढी पर कठडे़ का आश्रय नहीं  लेते।
—–एक दिन में आपने,19 तक, सभाएँ की है।
—–आँख त्रिफला के पानी  से धोते हैं।( त्रिफला: हरडे, आँवला, बेहडा-रात को भीगो कर सबेरे उस का पानी)
—–गुजरात में मुख्य मंत्री थे तब, एक बार स्वाईन फ्लू और एक बार दाढ की पीडा के समय आप को डॉक्टर की आवश्यकता पडी थी।
—–प्रधान मंत्री पद पर आने के पश्चात भी गुजरात के भाजपा के कार्यकर्ताओं को दुःखद प्रसंग पर सांत्वना देने के लिए अवश्य दूरभाष करते हैं। (बडे बनने पर भूले नहीं है)
—– आप की निजी सेवा में नियुक्त सभी कर्मचारियों की संतानों की शिक्षा एवं विशेष प्रवृत्तियों के विषय में आप जानकारी रखते हैं। और पूछ ताछ करते रहते हैं!                                                                         धन्य हैं हम...... जिन्हें ऐसे व्यक्तित्व की छत्रछाया मिली...                                 मैं तो कृतग्य हूँ...!
🙏🙏🙏🙏🙏

*मेरे पास आया मैने पढ कर अच्छा 🙏💐😊समझा तो आप सबको भी भेज दिया आप सबको भी जो अच्छा लगे मान ले और जो बुरा लगे उसे छोड दे ।*💐😊🙏

जय हिन्द जय भारत

कुछ 100 जानकारी जिसका ज्ञान सबको होना चाहिए


1. योग, भोग और रोग ये तीन अवस्थाएं है।
2. *लकवा* - सोडियम की कमी के कारण होता है।
3. *हाई बी पी में* -  स्नान व सोने से पूर्व एक गिलास जल का सेवन करें तथा स्नान करते समय थोड़ा सा नमक पानी मे डालकर स्नान करे।
4. *लो बी पी* - सेंधा नमक डालकर पानी पीयें।
5. *कूबड़ निकलना* - फास्फोरस की कमी।
6. *कफ* - फास्फोरस की कमी से कफ बिगड़ता है, फास्फोरस की पूर्ति हेतु आर्सेनिक की उपस्थिति जरुरी है। गुड व शहद खाएं।
7. *दमा, अस्थमा* - सल्फर की कमी।
8. *सिजेरियन आपरेशन* - आयरन, कैल्शियम की कमी।
9. *सभी क्षारीय वस्तुएं दिन डूबने के बाद खायें।*
10. *अम्लीय वस्तुएं व फल दिन डूबने से पहले खायें।*
11. *जम्भाई* - शरीर में आक्सीजन की कमी।
12. *जुकाम* - जो प्रातः काल जूस पीते हैं वो उस में काला नमक व अदरक डालकर पियें।
13. *ताम्बे का पानी* - प्रातः खड़े होकर नंगे पाँव पानी ना पियें।
14. *किडनी* - भूलकर भी खड़े होकर गिलास का पानी ना पिये।
15. *गिलास* एक रेखीय होता है तथा इसका सर्फेसटेन्स अधिक होता है। गिलास अंग्रेजो (पुर्तगाल) की सभ्यता से आयी है अतः लोटे का पानी पियें, लोटे का कम सर्फेसटेन्स होता है।
16. *अस्थमा, मधुमेह, कैंसर* से गहरे रंग की वनस्पतियाँ बचाती हैं।
17. *वास्तु* के अनुसार जिस घर में जितना खुला स्थान होगा उस घर के लोगों का दिमाग व हृदय भी उतना ही खुला होगा।
18. *परम्परायें* वहीँ विकसित होगीं जहाँ जलवायु के अनुसार व्यवस्थायें विकसित होगीं।
19. *पथरी* - अर्जुन की छाल से पथरी की समस्यायें ना के बराबर है।
20. *RO* का पानी कभी ना पियें, यह गुणवत्ता को स्थिर नहीं रखता। कुएँ का पानी पियें। बारिस का पानी सबसे अच्छा, पानी की सफाई के लिए *सहिजन* की फली सबसे बेहतर है।
21. *सोकर उठते समय* हमेशा दायीं करवट से उठें या जिधर का *स्वर* चल रहा हो उधर करवट लेकर उठें।
22. *पेट के बल सोने से* हर्निया, प्रोस्टेट, एपेंडिक्स की समस्या आती है।
23. *भोजन* के लिए पूर्व दिशा, *पढाई* के लिए उत्तर दिशा बेहतर है।
24. *HDL* बढ़ने से मोटापा कम होगा LDL व VLDL कम होगा।
25. *गैस की समस्या* होने पर भोजन में अजवाइन मिलाना शुरू कर दें।
26. *चीनी* के अन्दर सल्फर होता जो कि पटाखों में प्रयोग होता है, यह शरीर में जाने के बाद बाहर नहीं निकलता है। चीनी खाने से *पित्त* बढ़ता है। 
27. *शुक्रोज* हजम नहीं होता है *फ्रेक्टोज* हजम होता है और भगवान् की हर मीठी चीज में फ्रेक्टोज है।
28. *वात* के असर में नींद कम आती है।
29. *कफ* के प्रभाव में व्यक्ति प्रेम अधिक करता है।
30. *कफ* के असर में पढाई कम होती है।
31. *पित्त* के असर में पढाई अधिक होती है।
33. *आँखों के रोग* - कैट्रेक्टस, मोतियाविन्द, ग्लूकोमा, आँखों का लाल होना आदि ज्यादातर रोग कफ के कारण होता है।
34. *शाम को वात*-नाशक चीजें खानी चाहिए।
35. *प्रातः 4 बजे जाग जाना चाहिए।*
36. *सोते समय* रक्त दवाव सामान्य या सामान्य से कम होता है।
37. *व्यायाम* - *वात रोगियों* के लिए मालिश के बाद व्यायाम, *पित्त वालों* को व्यायाम के बाद मालिश करनी चाहिए। *कफ के लोगों* को स्नान के बाद मालिश करनी चाहिए।
38. *भारत की जलवायु* वात प्रकृति की है, दौड़ की बजाय सूर्य नमस्कार करना चाहिए।
39. *जो माताएं* घरेलू कार्य करती हैं उनके लिए व्यायाम जरुरी नहीं।
40. *निद्रा* से *पित्त* शांत होता है, मालिश से *वायु* शांति होती है, उल्टी से *कफ* शांत होता है तथा *उपवास* (लंघन) से बुखार शांत होता है।
41. *भारी वस्तुयें* शरीर का रक्तदाब बढाती है, क्योंकि उनका गुरुत्व अधिक होता है।
42. *दुनियां के महान* वैज्ञानिक का स्कूली शिक्षा का सफ़र अच्छा नहीं रहा, चाहे वह 8 वीं फेल न्यूटन हों या 9 वीं फेल आइस्टीन हों।
43. *माँस खाने वालों* के शरीर से अम्ल-स्राव करने वाली ग्रंथियाँ प्रभावित होती हैं।
44. *तेल हमेशा* गाढ़ा खाना चाहिएं सिर्फ लकडी वाली घाणी का, दूध हमेशा पतला पीना चाहिए।
45. *छिलके वाली दाल-सब्जियों से कोलेस्ट्रोल हमेशा घटता है।* 
46. *कोलेस्ट्रोल की बढ़ी* हुई स्थिति में इन्सुलिन खून में नहीं जा पाता है। ब्लड शुगर का सम्बन्ध ग्लूकोस के साथ नहीं अपितु कोलेस्ट्रोल के साथ है।
47. *मिर्गी दौरे* में अमोनिया या चूने की गंध सूँघानी चाहिए। 
48. *सिरदर्द* में एक चुटकी नौसादर व अदरक का रस रोगी को सुंघायें।
49. *भोजन के पहले* मीठा खाने से, बाद में खट्टा खाने से शुगर नहीं होता है।
50. *भोजन* के आधे घंटे पहले सलाद खाएं उसके बाद भोजन करें। 
51. *अवसाद* में आयरन, कैल्शियम, फास्फोरस की कमी हो जाती है। फास्फोरस गुड और अमरुद में अधिक है। 
52. *पीले केले* में आयरन कम और कैल्शियम अधिक होता है। हरे केले में कैल्शियम थोडा कम लेकिन फास्फोरस ज्यादा होता है तथा लाल केले में कैल्शियम कम आयरन ज्यादा होता है। हर हरी चीज में भरपूर फास्फोरस होती है, वही हरी चीज पकने के बाद पीली हो जाती है जिसमे कैल्शियम अधिक होता है।
53. *छोटे केले* में बड़े केले से ज्यादा कैल्शियम होता है।
54. *रसौली* की गलाने वाली सारी दवाएँ चूने से बनती हैं।
55. हेपेटाइट्स A से E तक के लिए चूना बेहतर है।
56. *एंटी टिटनेस* के लिए हाईपेरियम 200 की दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दे।
57. *ऐसी चोट* जिसमे खून जम गया हो उसके लिए नैट्रमसल्फ दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दें। बच्चो को एक बूंद पानी में डालकर दें।
58. *मोटे लोगों में कैल्शियम* की कमी होती है अतः त्रिफला दें। त्रिकूट (सोंठ + कालीमिर्च + मघा पीपली) भी दे सकते हैं।
59. *अस्थमा में नारियल दें।* नारियल फल होते हुए भी क्षारीय है। दालचीनी + गुड + नारियल दें।
60. *चूना* बालों को मजबूत करता है तथा आँखों की रोशनी बढाता है।
61. *दूध* का सर्फेसटेंसेज कम होने से त्वचा का कचरा बाहर निकाल देता है।
62. *गाय का घी सबसे अधिक पित्तनाशक फिर कफ व वायुनाशक है।*
63. *जिस भोजन* में सूर्य का प्रकाश व हवा का स्पर्श ना हो उसे नहीं खाना चाहिए।
64. *गौ-मूत्र अर्क आँखों में ना डालें।*
65. *गाय के दूध* में घी मिलाकर देने से कफ की संभावना कम होती है, लेकिन चीनी मिलाकर देने से कफ बढ़ता है।
66. *मासिक के दौरान* वायु बढ़ जाता है, 3-4 दिन स्त्रियों को उल्टा सोना चाहिए इससे गर्भाशय फैलने का खतरा नहीं रहता है। दर्द की स्थति में गर्म पानी में देशी घी दो चम्मच डालकर पियें।
67. *रात* में आलू खाने से वजन बढ़ता है।
68. *भोजन के* बाद बज्रासन में बैठने से *वात* नियंत्रित होता है।
69. *भोजन* के बाद कंघी करें कंघी करते समय आपके बालों में कंघी के दांत चुभने चाहिए। बाल जल्द सफ़ेद नहीं होगा।
70. *अजवाईन* अपान वायु को बढ़ा देता है जिससे पेट की समस्यायें कम होती है।
71. *अगर पेट* में मल बंध गया है तो अदरक का रस या सोंठ का प्रयोग करें।
72. *कब्ज* होने की अवस्था में सुबह पानी पीकर कुछ देर एडियों के बल चलना चाहिए। 
73. *रास्ता चलने*, श्रम कार्य के बाद थकने पर या धातु गर्म होने पर दायीं करवट लेटना चाहिए।
74. *जो दिन मे दायीं करवट लेता है तथा रात्रि में बायीं करवट लेता है उसे थकान व शारीरिक पीड़ा कम होती है।* 
75. *बिना कैल्शियम* की उपस्थिति के कोई भी विटामिन व पोषक तत्व पूर्ण कार्य नहीं करते है।
76. *स्वस्थ्य व्यक्ति* सिर्फ 5 मिनट शौच में लगाता है।
77. *भोजन* करते समय डकार आपके भोजन को पूर्ण और हाजमे को संतुष्टि का संकेत है।
78. *सुबह के नाश्ते* में फल, *दोपहर को दही* व *रात्रि को दूध* का सेवन करना चाहिए।
79. *रात्रि* को कभी भी अधिक प्रोटीन वाली वस्तुयें नहीं खानी चाहिए। जैसे - दाल, पनीर, राजमा, लोबिया आदि।
80. *शौच और भोजन* के समय मुंह बंद रखें, भोजन के समय टीवी ना देखें।
81. *मासिक चक्र* के दौरान स्त्री को ठंडे पानी से स्नान, व आग से दूर रहना चाहिए।
82. *जो बीमारी जितनी देर से आती है, वह उतनी देर से जाती भी है।*
83. *जो बीमारी अंदर से आती है, उसका समाधान भी अंदर से ही होना चाहिए।*
84. *एलोपैथी* ने एक ही चीज दी है, दर्द से राहत। आज एलोपैथी की दवाओं के कारण ही लोगों की किडनी, लीवर, आतें, हृदय ख़राब हो रहे हैं। एलोपैथी एक बिमारी खत्म करती है तो दस बिमारी देकर भी जाती है।
85. *खाने* की वस्तु में कभी भी ऊपर से नमक नहीं डालना चाहिए, ब्लड-प्रेशर बढ़ता है।
86. *रंगों द्वारा* चिकित्सा करने के लिए इंद्रधनुष को समझ लें, पहले जामुनी, फिर नीला... अंत में लाल रंग।
87. *छोटे* बच्चों को सबसे अधिक सोना चाहिए, क्योंकि उनमें वह कफ प्रवृति होती है, स्त्री को भी पुरुष से अधिक विश्राम करना चाहिए।
88. *जो सूर्य निकलने* के बाद उठते हैं, उन्हें पेट की भयंकर बीमारियां होती है, क्योंकि बड़ी आँत मल को चूसने लगती है।
89. *बिना शरीर की गंदगी* निकाले स्वास्थ्य शरीर की कल्पना निरर्थक है, मल-मूत्र से 5%, कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ने से 22%, तथा पसीना निकलने लगभग 70% शरीर से विजातीय तत्व निकलते हैं।
90. *चिंता, क्रोध, ईर्ष्या करने से गलत हार्मोन्स का निर्माण होता है जिससे कब्ज, बबासीर, अजीर्ण, अपच, रक्तचाप, थायरायड की समस्या उतपन्न होती है।* 
91. *गर्मियों में बेल, गुलकंद, तरबूजा, खरबूजा व सर्दियों में सफ़ेद मूसली, सोंठ का प्रयोग करें।*
92. *प्रसव* के बाद माँ का पीला दूध बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को 10 गुना बढ़ा देता है। बच्चो को टीके लगाने की आवश्यकता नहीं होती है।
93. *रात को सोते समय* सर्दियों में देशी मधु लगाकर सोयें, त्वचा में निखार आएगा। 
94. *दुनिया में कोई चीज व्यर्थ नहीं, हमें उपयोग करना आना चाहिए।*
95. *जो अपने दुखों* को दूर करके दूसरों के भी दुःखों को दूर करता है, वही मोक्ष का अधिकारी है।
96. *सोने से* आधे घंटे पूर्व जल का सेवन करने से वायु नियंत्रित होती है, लकवा, हार्ट-अटैक का खतरा कम होता है।
97. *स्नान से पूर्व और भोजन के बाद पेशाब जाने से रक्तचाप नियंत्रित होता है।*
98. *तेज धूप* में चलने के बाद, शारीरिक श्रम करने के बाद, शौच से आने के तुरंत बाद जल का सेवन निषिद्ध है।
99. *त्रिफला अमृत है* जिससे *वात, पित्त, कफ* तीनो शांत होते हैं। इसके अतिरिक्त भोजन के बाद पान व चूना।  देशी गाय का घी, गौ-मूत्र भी त्रिदोष नाशक है।
100. इस विश्व की सबसे मँहगी *दवा - लार* है, जो प्रकृति ने तुम्हें अनमोल दी है, इसे ना थूके।  मेरी पुस्तक से संग्रहित, पढ़ने के बाद साझा अवश्य करें*