Thursday, May 23, 2019

उत्तर प्रदेश 2019 lokshabha election

*उत्तर प्रदेश result*

*आगरा*
सत्यपाल सिंह बघेल बीजेपी 242654
मनोज कुमार सोनी बीएसपी 195734
प्रीता हरित आईएनसी 17345

*अकबरपुर*
देवेन्द्र सिंह ' भोले ' बीजेपी 66294
निशा सचान बीएसपी 31290
राजाराम पाल आईएनसी 15288

*अलीगढ़*
सतीश कुमार गौतम बीजेपी 441800
डॉ0 अजीत बालियान बीएसपी 228739
बिजेन्‍द्र सिंह चौधरी आईएनसी 79798

*प्रयागराज*
रीता बहुगुणा जोशी बीजेपी 382555
राजेन्द्र सिंह पटेल एसपी 234343
योगेश शुक्ल आईएनसी 25386

*आम्बेडकर नगर*
रितेश पाण्डेय बीएसपी 492101
मुकुट बिहारी बीजेपी 397924

*अमेठी*
स्मृति इरानी बीजेपी 211820
राहुल गांधी आईएनसी 192102

*अमरोहा*
कुँवर दानिश अली बीएसपी 543597
कंवर सिंह तंवर बीजेपी 472709
सचिन चौधरी आईएनसी 11451

*ऑवला*
धर्मेन्द्र कश्यप बीजेपी 324307
रुचिवीरा बीएसपी 249288
कुँवर सर्वराज सिंह आईएनसी 40176

*आज़मगढ़*
अखिलेश यादव एसपी 353217
दिनेश लाल यादव निरहुआ बीजेपी 207655

*बदायूं*
डा0 संघमित्रा मौर्या बीजेपी 344020
धर्मेन्द्र यादव एसपी 327708
सलीम इक़वाल शेरवानी आईएनसी 30359

*बागपत*
जयन्‍त चौधरी आरएलडी 356838
डा० सत्‍यपाल सिंह बीजेपी 353613

*बहराइच*
अक्षयवर लाल बीजेपी 525512
शब्बीर बाल्मीकि एसपी 396843
सावित्री बाई फूले आईएनसी 34383

*बलिया*
सनातन पाण्डेय एसपी 98892
वीरेन्द्र सिह बीजेपी 76169

*बांदा*
आर० के० सिंह पटेल बीजेपी 234413
श्यामा चरण गुप्त एसपी 176026
बालकुमार पटेल आईएनसी 36567

*बांसगांव*
कमलेश पासवान बीजेपी 311273
सदल प्रसाद बीएसपी 214461

*बाराबंकी*
उपेन्द्र सिंह रावत बीजेपी 159311
राम सागर रावत एसपी 130087
तनुज पुनिया आईएनसी 40109

*बरेली*
संतोष कुमार गंगवार बीजेपी 448050
भगवत सरन गंगवार एसपी 313209
प्रवीण सिंह ऐरन आईएनसी 59788

*बस्ती*
हरीश चन्द्र उर्फ हरीश द्विवेदी बीजेपी 102756
राम प्रसाद चौधरी बीएसपी 86538
राज किशोर सिंह आईएनसी 20308

*भदोही*
रमेश चन्द बीजेपी 146074
रंगनाथ मिश्र बीएसपी 123901
रमाकांत आईएनसी 5894

*बिजनौर*
मलूक नागर बीएसपी 387258
राजा भारतेन्द्र सिंह बीजेपी 337159
नसीमुद्दीन सिद्दीकी आईएनसी 18601

*बुलन्‍दशहर*
भोला सिंह बीजेपी 662839
योगेश वर्मा बीएसपी 378884
बंशी सिंह आईएनसी 28669

*चन्‍दौली*
डॉ0 महेन्द्र नाथ पाण्डेय बीजेपी 474235
संजय सिंह चौहान एसपी 463588

*देवरिया*
रमापति राम त्रिपाठी बीजेपी 176092
बिनोद कुमार जायसवाल बीएसपी 100808
नियाज अहमद आईएनसी 15229

*धौरहरा*
रेखा वर्मा बीजेपी 392381
अरशद इलियास सिद़दीकी बीएसपी 282200
कुॅवर जितिन प्रसाद आईएनसी 124494

*डुमरियागंज*
जगदंबिका पाल बीजेपी 450749
आफताब आलम बीएसपी 350360
चन्द्रश उर्फ चन्द्रेश कुमार उपाध्याय आईएनसी 57371

*एटा*
राजवीर सिंह (राजू भैय्या) बीजेपी 382316
कुँ. देवेन्द्र सिंह यादव एसपी 299221

*इटावा*
डॉ राम शंकर कठेरिया बीजेपी 387257
कमलेश कुमार एसपी 340260
अशोक कुमार दोहरे आईएनसी 12358

*फैजाबाद*
लल्लू सिंह बीजेपी 405028
आनन्द सेन एसपी 352942
निर्मल खत्री आईएनसी 41695

*फर्रूखाबाद*
मुकेश राजपूत बीजेपी 460065
मनोज अग्रवाल बीएसपी 278878
सलमान खुर्शीद आईएनसी 48131

*फतेहपुर*
निरंजन ज्योति बीजेपी 261631
सुखदेव प्रसाद वर्मा बीएसपी 158466
राकेश सचान आईएनसी 29264

*फतेहपुर सीकरी*
राजकुुुमार चाहर बीजेपी 339238
राज बब्‍बर आईएनसी 94324
श्रीभगवान शर्मा बीएसपी 90977

*फिरोज़ाबाद*
डा० चन्‍द्र सेेेन जादौन बीजेपी 329305
अक्षय यादव एसपी 322876
शिवपाल सिंह यादव प्रसपा 62092

*गौतम बुद्ध नगर*
डॉ0 महेश शर्मा बीजेपी 546608
सतवीर बीएसपी 349767
डॉ0 अरविन्‍द कुमार सिंह आईएनसी 28805

*गाजियाबाद*
विजय कुमार सिंह बीजेपी 879543
सुरेश बंसल एसपी 424276
डोली शर्मा आईएनसी 106334

*गाजीपुर*
अफजाल अंसारी बीएसपी 308120
मनोज सिन्हा बीजेपी 243753
अजीत प्रताप कुशवाहा आईएनसी 10594

*घोसी*
अतुल कुमार सिंह बीएसपी 276810
हरिनारायण बीजेपी 214951
बालकृष्ण आईएनसी 11456

*गोन्‍डा*
कीर्तिवर्धन सिंह उर्फ राजा भैया बीजेपी 366364
विनोद कुमार उर्फ़ पण्डित सिंह एसपी 247744
श्रीमती कृष्‍णा पटेल आईएनसी 19272

*गोरखपुर*
रविंद्र श्यामनारायण शुक्ला उर्फ रवि किशन बीजेपी 713253
रामभुआल निषाद एसपी 413162
मधुसुदन त्रिपाठी आईएनसी 22819

*हमीरपुर*
कुँवर पुष्पेन्द्र सिंह चन्देल बीजेपी 289543
दिलीप कुमार सिंह बीएसपी 156234
प्रीतम सिंह लोधी किसान आईएनसी 54716

*हरदोई*
जय प्रकाश बीजेपी 282768
ऊषा वर्मा एसपी 212209
वीरेन्द्र कुमार आईएनसी 9593

*हाथरस*
राजवीर दिलेर बीजेपी 413655
रामजी लाल सुमन एसपी 253830
त्रिलोकी राम आईएनसी 14203

*जालौन*
भानु प्रताप सिंह वर्मा बीजेपी 383245
अजय सिंह (पंकज) बीएसपी 293308
बृजलाल खाबरी आईएनसी 56718

*जौनपुर*
श्‍याम सिंह यादव बीएसपी 285641
कृष्‍ण प्रताप सिंह के.पी. बीजेपी 232187
देव व्रत मिश्रा आईएनसी 14408

*झांसी*
अनुराग शर्मा बीजेपी 436177
श्याम सुन्दर सिंह एसपी 245392
शिवशरन आईएनसी 54669

*कैराना*
प्रदीप कुमार बीजेपी 358810
तबस्‍सुम बेगम एसपी 305326
हरेन्‍द्र सिंह मलिक आईएनसी 46415

*कैसरगंज*
बृजभूषण शरण सिंह बीजेपी 362432
चन्द्रदेव राम यादव बीएसपी 200443
विनय कुमार पाण्डेय 'विन्नू' आईएनसी 22741

*कन्नौज*
सुबृत पाठक बीजेपी 354571
डिम्पल यादव एसपी 328118

*कानपुर*
सत्यदेव पचौरी बीजेपी 171185
श्रीप्रकाश जायसवाल आईएनसी 116381
राम कुमार एसपी 17200

*कौशाम्‍बी*
विनोद कुमार सोनकर बीजेपी 255390
इन्द्रजीत सरोज एसपी 222582
गिरीश पासी आईएनसी 10618

*खीरी*
अजय कुमार बीजेपी 285392
डा0 पूर्वी वर्मा एसपी 174514
ज़फर अली नक़वी आईएनसी 49397

*कुशी नगर*
विजय कुमार दूूूूबे बीजेपी 368377
एन० पी० कुशवाहा उर्फ नथुनी प्रसाद कुशवाहा एसपी 160109
कुँ0 रतनजीत प्रताप नारायण सिंह आईएनसी 89297

*लालगंज*
संगीता आजाद बीएसपी 249347
नीलम सोनकर बीजेपी 159275
पंकज मोहन सोनकर आईएनसी 8196

*लखनऊ*
राजनाथ सिंह बीजेपी 598038
पुनम शत्रुघ्न सिन्हा एसपी 273525
आचार्य प्रमोद कृष्णम आईएनसी 173337

*मछलीशहर*
त्रिभुवन राम (टी०राम) बीएसपी 358918
भोलानाथ (बी.पी. सरोज) बीजेपी 353597

*महराजगंज*
पंकज चौधरी बीजेपी 344477
अखिलेश एसपी 183068
सुप्रिया श्रीनेत आईएनसी 33283

*मैनपुरी*
मुलायम सिंह यादव एसपी 391045
प्रेम सिंह शाक्य बीजेपी 340225

*मथुरा*
हेमा मालिनी बीजेपी 409325
कुँवर नरेन्‍द्र सिंंह आरएलडी 219108
महेश पाठक आईएनसी 14615

*मेरठ*
राजेन्द्र अग्रवाल बीजेपी 574494
हाजी मौहम्मद याकूब बीएसपी 563466
हरेन्द्र अग्रवाल आईएनसी 34017

*मिर्जापुर*
अनुप्रिया सिंह पटेल अदल 446649
रामचरित्र निषाद एसपी 284136
ललितेश पति त्रिपाठी आईएनसी 73854

*मिश्रिख*
अशोक कुमार रावत बीजेपी 386316
डॉ नीलू सत्यार्थी बीएसपी 302677
मंजरी राही आईएनसी 19317

*मोहनलालगंज*
कौशल किशोर बीजेपी 416770
सी० एल० वर्मा बीएसपी 359193
आर0 के0 चौधरी आईएनसी 37557

*मुरादाबाद*
डॉ एस0टी0हसन सपा 590661
कुँवर सर्वेश कुमार बीजेपी 506942
इमरान प्रतापगढी आईएनसी 55267

*मुजफ्फरनगर*
संजीव कुमार बालियान बीजेपी 566539
अजित सिंह रालोद 564549

*नगीना*
गिरीश चन्द्र बसपा 564428
डॉ यश्वन्त सिंह बीजेपी 397306
ओमवती देवी आईएनसी 19904

*फूलपुर*
केशरी देवी पटेल बीजेपी 356160
पन्धारी यादव सपा 240022
पंकज पटेल आईएनसी 19196

*पीलीभीत*
फिरोज वरूण गॉंधी बीजेपी 674729
हेमराज वर्मा सपा 426621

*प्रतापगढ़*
संगम लाल गुप्ता बीजेपी 428676
अशोक त्रिपाठी बसपा 310592
राजकुमारी रत्ना सिंह आईएनसी 75914

*राय बरेली*
सोनिया गांधी आईएनसी 523718
दिनेश प्रताप सिंह बीजेपी 359207

*रामपुर*
मोहम्मद आज़म खां सपा 525098
जयाप्रदा नाहटा बीजेपी 390904
संजय कपूर आईएनसी 33837

*राबर्ट्सगंज*
पकौड़ी लाल कोल अपना दल 422456
भाई लाल सपा 359779
भगवती प्रसाद चौधरी आईएनसी 33626

*सहारनपुर*
हाजी फजर्लुरहमान बसपा 497206
राघव लखनपाल बीजेपी 453693
इमरान मसूद आईएनसी 197275

*सलेमपुर*
रविन्दर बीजेपी 338035
आर० एस० कुशवाहा बसपा 241346
राजेश कुमार मिश्र आईएनसी 20405

*सम्‍भल*
डॉ शफीकुर्रहमान बर्क़ सपा 538413
परमेश्‍वर लाल सैनी बीजेपी 406316
मेजर जगत पाल सिंह आईएनसी 10224

*सन्‍त कबीर नगर*
प्रवीन कुमार निषाद बीजेपी 383476
भीष्म शंकर बसपा 364681
भाल चन्द्र यादव आईएनसी 99526

*शाहजहाँपुर*
अरुण कुमार सागर बीजेपी 526263
अमर चन्द्र जौहर बसपा 313553
ब्रह्म स्वरुप सागर आईएनसी 27660

*श्रावस्ती*
राम शिरोमणि बसपा 384305
दद्दन मिश्रा बीजेपी 374597
धीरेन्द्र प्रताप सिंह आईएनसी 48491

*सीतापुर*
राजेश वर्मा बीजेपी 317886
नकुल दुबे बसपा 260416
कैसर जहाँ आईएनसी 68377

*सुल्तानपुर*
मेनका संजय गांधी बीजेपी 384187
चन्द्र भद्र सिंह "सोनू" बसपा 367845
डॉ संजय सिंह आईएनसी 34241

*उन्नाव*
स्वामी साक्षी जी महाराज बीजेपी 703507
अरुण शंकर शुक्ला सपा 302551
अन्नू टण्डन आईएनसी 185634

*वाराणसी*
नरेन्द्र मोदी बीजेपी 642060
शालिनी यादव सपा 188143
अजय राय आईएनसी 145544

Wednesday, May 22, 2019

हिन्दू द्वेष व भारत विभाजन की कार्यशाला- जे एन यू

बौद्धिक कर्म के लिए ‘अवकाश’ एक प्राथमिक शर्त है I इसी अवकाश को प्रदान करने के लिए एक आदर्श, कृत्रिम परिवेश की रचना करने हेतु जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय की परिकल्पना की गयी I जे एन यू द्वारा परिसर के अंदर ही सस्ती एवं रियायती भोजन, आवास एवं अध्ययन की सुविधा उपलब्ध है। यह सब भारत सरकार द्वारा उपलब्ध वित्तीय सहायता से संभव हुआ I कालांतर में गारंटी कृत ‘अवकाश’ की परिणिति से एक ‘कृत्रिम पारिस्थितिकी’ या ‘कैम्पस-हैबिटस’ (Campus-Habitus) की रचना हुई है, जो कि ऐसी विचार प्रक्रिया में छात्र-समुदाय के ‘सामाजीकरण’ को बढ़ावा देने के लिये अनुकूल है, जो वास्तविकता में सभी सुविधाओं के लिए भारतीय राज्य पर निर्भरता को एक कृत्रिम परिस्थिति न समझ कर स्वभाविक विशेषाधिकार (या नैसर्गिक विधान) समझता है. समस्त संसाधनों के लिए राज्य पर निर्भरता, “समाजवाद” की आड़ में अंततोगत्वा “राजकीय पूंजीवाद” है, और यही विचारधारा अपने अतिवादी अवतार “माओवाद” के रूप में प्रकट होती है। इस तरह के वैचारिक दृष्टिकोण का ‘परम लक्ष्य’, किसी भी प्रकार के साधन से ‘राज्य’ पर अपना कब्जा करना होता है।

भारतीय सन्दर्भ में ऐसा वैचारिक दृष्टिकोण ‘हिन्दू-द्वेष’ तथा ‘भारत-तोड़ो’ अभियान के रूप में अपघटित हो जाता है, और ऐसा दो ऐतिहासिक कारणों से संभव हुआ है. प्रथम कारण था नेहरु एवं उनके उत्तराधिकारियों का सोवियत मॉडल की तथाकथित समाजवादी अर्थ-व्यवस्था को भारत में लागू करने का निर्णय, एवं सोवियत ब्लाक से उनकी घनिष्ठता. इस कारण अकादमिक संस्थानों के ‘उत्पाद’ जो नेहरु एवं इंदिरा के राजनितिक एवं आर्थिक कार्यक्रम को एक वैचारिक कलेवर पहना सकें, ‘समाजवादी’ विचारधारा की फैक्ट्री के रूप में उच्च-शिक्षण एवं शोध संस्थाओं को बढावा दिया गया. यहाँ गौर करने की बात यह है कि भले ही साम्यवादी/समाजवादी विचारधारा के जो चाहे एक राजनीतिक दल के रूप में कांग्रेस का विरोध करें उनके अन्य विचलन वाले रूप (नक्सली,मावोवादी) एक अतिवादी आन्दोलन के रूप में भारतीय राज्य से लड़ते हो, परन्तु भारतीय घरेलु राजनीति में कांग्रेस राजनीति (विभिन्न वर्गों को राष्ट्रीय हित की कीमत पर तुष्टिकरण करने की नीति तथा 'निर्धनवाद ' व राज्याश्रित रखकर प्रश्रय की बंदरबाट) को प्रति-संतुलित करने वाली संस्कृतिक व सामाजिक शक्तियों (यथा राष्टवादी शक्तियां जो तुष्टिकरण की नीति की विरोधी हैं , तथा मनो-वैज्ञानिक, आध्यात्मिक, सामाजिक स्वावलंबन की पक्षधर रही है, से अँध-घृणा, अंततः साम्यवादियों/समाजवादीयों को राजनीति दृष्टि से कांग्रेस को ही परोक्ष या प्रत्यक्ष समर्थन देने पर विवश करती है । और "हिन्दू-द्वेष " व "भारतछोड़ो " अभियान में साम्यवादियों/समाजवादीयों के अपघटन का दूसरा ऐतिहासिक कारण स्वयं साम्यवादी/समाजवादी विचारधारा की दुर्बलता एवं अंतर्विरोध से उपजा है, राज्य नियंत्रित अर्थव्यवस्था एवं विशाल-नौकरशाही तंत्र के इस्पाती ढांचे से उतपन्न गतिरोध, निम्न उत्पादकता व निम्न कार्यकुशलता के बोझ से सोवियत माॅडल धराशायी हो गया, नब्बे के दशक आते-आते वामपंथ व समाजवाद का किला विश्व में दो ध्रुवी-व्यवस्था का एक स्तंभ, सोवियत संघ धराशायी हो गया, भारत में भी राज्य-नियंत्रित अर्थव्यवस्था से खुली अर्थव्यवस्था की ओर दिशा-परिवर्तन करने का कारण भी निम्न-उत्पादकता व निम्न-कार्यकुशलता ही थी, कुछ अंशो में राजीव गांधी की आर्थिक नीति व नरसिम्हा राव के अंतर्गत कांग्रेस द्वारा अपनायी गई नीतियों के मूल में यहीं तत्व प्रधान रहें , यह भारत के भू-मंडलीकरण की शुरूआत कही जाती है साम्यवादियों के लिए यह वैचारिक व राजनीतिक पराजय थी ।                                       भारतीय सन्दर्भ में साम्यवादियों को राजनीतिक दल के रूप में अन्तर्राष्ट्रीय समर्थन के विलोप होने से केवल घरेलू राजनीतिक गुणा-भाग तक सीमित कर दिया । इस बीच घरेलू राजनीति में राजनीतिक शक्ति-संतुलन में आये परिवर्तनों ने उन्हें राष्ट्रवादी शक्तियों के उभार से कमजोर हुई कांग्रेस को समर्थन देने की राजनीति या फिर कांग्रेस से इतर, 'अस्मिता' की राजनीति से उभरे दलों से तालमेल करने के दो भिन्न ध्रुवों में डोलने के लिए विवश कर दिया । अस्मिताओं के आंदोलनों के जोर पकड़ने पर साम्यवादियों/समाजवादीयों को भी अपने राजनीतिक नारे  को "क्लाश-स्ट्रगल " यानि "वर्ग-संघर्ष " से बदलकर "कास्ट-स्ट्रगल " यानि "वर्ण-संघर्ष " में परिवर्तित करना पड़ा । अब उन्होंने एक नयी प्रतिस्थापना दी कि भारतीय संदर्भ में "वर्ण " अथवा "जाति-भेद " ही सही अर्थों में "वर्ग-विभेद " हैं , और इस तथ्य को न समझ पाने के कारण ही उनका राजनीतिक पराभव हुआ है । ठीक यही निष्कर्ष साम्यवादी/समाजवादी राजनीतिक दलों के रूप में "क्रांतिकारी " परिवर्तन लाने में अपनी असफता से निराश वामपंथी-अतिवादी, हिंसक, भूमीगत आन्दोलन चलाने निकल पड़े वाम-समूहों ने भी निकाला, अस्मिता की राजनीति ने भारतीय संविधान व राज-व्यवस्था द्वारा नागरिक अधिकारों के संरक्षण हेतु सृजित कोटियों (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग) को अपरिवर्तनीय एवं परस्पर संघर्षरत नस्ली समूहों (यथा "दलित " , "आदिवासी ", "बहुजन ", "मूलनिवासी आदि) के अर्थों में रूढ़ कर दिया ।                                     परन्तु क्यां वास्तव में "अस्मिता " की राजनीति बिना किसी वैश्विक राजनीतिक संदर्भ के भारत में अचानक से हावी हो गई? और क्या यह राजनीति , एक-ध्रुवीय अमेरिकी वर्चस्व वाली निर्बाध-अर्थव्यवस्था वाली, भू-मंडलीय, विश्व-व्यवस्था में प्रवेश करते भारत में उसकी विशिष्ट घरेलू, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाली समाज-व्यवस्था से उतपन्न तनावों की चरम परिणति थी ?                                    परन्तु जैसा कि सोवियत संघ के पतन से भी पहले साम्यवादियों की "विश्व-श्रमिकों " की क्रांतिकारी एकता का आवाहन , पश्चिमी-पूंजीवादी राष्ट्रों द्वारा अपनाए गए कल्याणकारी-राज्य की भूमिका अपनाए जाने के बाद उन राष्ट्रों में श्रमिकों के उच्च जीवनस्तर के कारण फलीभूत न हो पाया, अतः पश्चिमी राष्ट्रों में वामपंथी विचारधारा ने आर्थिक आधार पर राजनीतिक विशलेषण के स्थान पर सामाजिक-सांस्कृतिक के आधार पर विश्व-दृष्टि विकसित कर नया राजनीतिक रूप धारण करना प्रारम्भ किया , जिसे नया वामपंथ (New Left) के नाम से जाना गया । नव-वामपंथ ने अपना राजनीतिक आधार पूँजी व श्रम के संघर्ष पर न टिका कर, अस्मिता व पहचान के संघर्षों को मूल आधार बनाकर खोजना शुरू किया , इसी दौर में नव-साम्राज्यवादी युद्धों (यथा वियतनाम युद्ध) से उपजी थकान व विश्व तेलसंकट के परिणाम स्वरूप अनिश्चितता व आर्थिक गिरावट से उतपन्न मोहभंग ने अमेरिका, व पश्चिमी राष्ट्रों में कई छात्र व सामाजिक आन्दोलन सामाजिक अशांति को व्यक्त करने लगे , नव-वामपंथ को श्रमिकों की क्रांतिकारी विश्व-एकता के अप्राप्य आदर्श के स्थान पर, यवा समूहों , जातीय समूहों, स्त्री मुक्ति आन्दोलनों व बाद में समलैंगिक अधिकार के आन्दोलनों, पर्यावरण आन्दोलनों इत्यादि में अपनी राजनीति के लिए अपना सामाजिक अधिकार दिखने लगा ।  और यहीं से पश्चिमी-पोषित नव-वामपंथ का भारत जैसे देशों में निर्यात अपने राष्ट्रीय हितों को साधने के लिए, पश्चिमी राष्ट्रों की विदेश नीति के कूट-अस्त्र के रूप में शामिल हो गया ।  जेएनयू जैसे संस्थानों में इस नयी राजनीतिक विचारधारा का स्वागत पूरे जोर-शोर से हुआ । क्यूंकि एक तो सोवियत संघ के अवसान व भारत की समाजवादी अर्थव्यवस्था का प्रयोग क्षीण होने से कमजोर हुई कांग्रेस के बदले नये आका पश्चिमी अकादमिक संस्थानों में संरक्षण देने में सक्षम थे, वहीं कुकुरमुत्तों की तरह उग आये एनजीओ (गौर सरकारी संस्थाओं) के माध्यम से चारागाह भी उपलब्ध करा रहें थे, एक अन्य सुविधा यह भी रही कि पुराने वामपंथ का निर्धनतावादी वंचितों की लाठी बने रहने का चोंगा भी उन्हें नहीं उतारना पड़ा ।                                                            'नव-वामपंथ ' के आकाओं के शास्त्रागार में उनका एक और भी पुराना कूट-अस्त्र था, अन्तर्राष्ट्रीय ईसाई मत में परिवर्तन कराने वाली संस्थाओं का वृहत तंत्र, मतान्तरित भारतीय इन राष्ट्रों के राजनीतिक प्रभाव के लिए एक मजबूत सामाजिक आधार प्रदान करते हैं । आपको शायद यह जानकर अटपटा लगेगा कि भारत के घरेलू मुद्दों पर अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर हस्ताक्षेप हेतु दबाव डलवाने के लिए , निपट कट्टर दक्षिणपंथी ईसाई संस्थाओं व उतने ही निपट , घोषित अनीश्वरवादी नव-वामपंथ अकादमिक बुद्धिजीवियों व उनके सहगामी एनजीओ का असहज तालमेल किस प्रकार संभव होता है?                इन्हीं दोनों कूट-अस्त्रों का प्रयोग कर अमेरिका के नेतृत्व में जोशुआ प्रोजेक्ट 1, जोशुआ प्रोजेक्ट 2,AD 2000 प्रोजेक्ट , मिशनरी संस्थाएं सीआईए (अमेरिकी गुप्तचर संस्थान) के मार्गदर्शन व दिशा-निर्देश में मतांतरण के कार्य में प्रवृत्त है, (तहलका जैसी पत्रिका जो घोषित तौर पर कांग्रेसी संरक्षण में चलती है , उसकी 2004 की खोजी रिपोर्ट में इसका विस्तार से वर्णन किया गया है, ) . इन संस्थाओं के पास भारत में निवास करने वाले असंख्य मानव समुदायों की परंपरा, विश्वास, रीति-रिवाजों तथा जनसंख्या वितरण को एक छोटे से छोटे क्षेत्र को भी पिनकोड में विभाजित कर जानकारी उन लोगों तक अपने संपर्क सूत्रों का त्वरित पहुँच रखने का विशाल तंत्र है ।   नयी मतान्तरण नीति को दो चरणों में विभाजित किया गया है , प्रथम चरण में भारत की सामाजिक विभेद की दरारों को चौड़ा करने का लक्ष्य रखा गया है । इसके लिए 'दलित ', 'अनार्य ', 'बहुजन ' , 'मूलनिवासी ', इत्यादि नयी अस्मिताओं का निर्माण कर 'हिन्दू-धर्म ' को तथाकथित आर्यों (जिन्हें बाहरी आक्रमणकारी प्रदर्शित किया गया व उनका साम्य आज के तथाकथित निम्न वर्ण/जातियों से मिलाया गया है) को सांस्कृतिक, सामाजिक , आर्थिक तथा राजनीतिक रूप से दास बनाये रखने की एक वर्चस्ववादी षड्यंत्र के रूप में प्रस्तुत करने का एक बलशाली अभियान चलाया हुआ है । इस व्यूह -योजना में कुछ हिन्दू धर्म के तत्वों को अंगीकार किया जाता है , व उन तत्वों में नये अर्थों को प्रक्षेपित कर दिया जाता है । यथा महाराष्ट्र में "शूद्रों-शूद्रों " के 'बलि-राजा ' को  ब्राह्मण देवता वामन द्वारा एक शहीद राजा के रूप में प्रचारित करना, (इसके लिए 'फुले ' जो e मिशनरी के विद्यालय के पढ़े हुए व उनसे प्रभावित एक समाज-सुधारक थे, उनके लिखे साहित्य को आधार बनाया जाता है) तदुपरांत शहीद राजा का साम्य बलिदान हुए , क्रास पे लटके , स्वर्ण के राजा यीशु से जोड़ना दुसरा चरण है । यही रणनीति महिषासुर को पहले जाति-विशेष (यादव) जो मूल निवासी कही गई , उसका राजा बताना, फिर दुर्गा देवी को ब्राहमणों की भेजी हुई गणिका बताना, फिर छल से न्यायप्रिय राजा महिषासुर के वध, को बलिदान हुए राजा यानि यीशु से साम्य स्थापित कर उत्तर भारत में दोहराई गई है ।                                     हिन्दू धर्म की परंपराओं से हिन्दू उप-समुदायों को विमुख करना प्रथम चरण है, और तब इन परंपराओं मे , नव-ईसाई साम्य-अर्थ भरना द्वितिय चरण है, परन्तु इस दुष्प्रचार से पहले जातिगत संगठनों का गठन मिशनरी रणनीति के हिस्से सदा से रहें हैं । सामाजिक न्याय के आदर्श का अपहरण मिशनरी अपनी कूटनीति चाल से कर चुके हैं । जेएनयू में भी 'प्रेम-चूंबन ' अभियान अथवा "किस आफ लव " नव-वामपंथ का उदाहरण है , व "गौ-मांस " व शूकर मांस " समारोह अथवा "बीफ एंड पोर्क फैस्टिवल " की मांग करना "महिषासुर शहादत " दिवस मनाना विजयादशमी में भगवान राम के पुतले को फांसी पर लटका कर , रामजी की ग्लानी से भरकर आत्म-हत्या करनेवाला पर्चा लिखना इत्यादि उदाहरण मिशनरी तंत्र द्वारा परोक्ष माध्यमों से संचालित, जेएन यू के जाति आधारित छात्रसंगठनों का नव-वाम संगठनों के सक्रिय से किया-धरा वितंडा -कार्य हैं । परन्तु जेएनयू में यह सब कार्यक्रम होने से और भी बड़ी गंभीर समस्या देश के लिए उतपन्न होने वाली है क्योंकि जेएनयू , पूर्व-वर्णित भारत विरोधी समूहों को "वैधता एवं अभ्यारण्य " दोनों प्रदान करता है , ऐसे समूहों के पक्ष में "सैधान्तिक परिचर्चा " को जन्म देकर , जेएनयू के विद्वान देश के विद्यालयों की पाठ्यपुस्तकों, संघ लोक सेवा आयोग के पाठ्यक्रम तथा न्यायपालिका के निर्णयों के लिए तार्किक आधार बनाकर; नौकरशाही , नागरिक समाज (सिविल सोसाइटी) व संचार माध्यम (मीडिया) के द्वारा संम्पूर्ण भारतीय राजनीति की मूल्य प्रणाली को प्रभावित करते हैं ।                                                       रविन्द्र बसेरा