Sunday, April 3, 2022

चंदा 2022



जय  हो माई
जय  हो माई


*।।जय चउरा माता।।🚩*
*【तीसरा दौर अप्रैल 2022】*
(बघेड़ी) update: 03 April 2022

श्री धीरज मिश्र   >> *2200+2100₹..+2100₹...=6400₹*
श्री शरदा प्रसाद मिश्र >> *500₹+ 6001₹..+2100₹...= 8601₹*
श्री माता प्रसाद मिश्र >> *500₹+ 3200₹..+2100₹...=5800₹*
श्री राम प्रसाद मिश्र >> *100₹*
श्री संजय मिश्र >>  *600₹*
श्री लोलारखनाथ यादव >> *501₹+ 1002₹..= 1503*
श्री सुभम सिंह >> *500₹+501₹= 1001₹*
राजकुमार यादव >> *21₹*
श्री संतोष कुमार मिश्र >> *501₹ + 501₹..=1002₹*
श्री सर्वेश मिश्र >> *501₹*
श्री शैलेश मिश्र >> *501₹+ 1011₹..+1000₹...=2512₹*
श्री पवन कुमार मिश्र >> *1002₹+2100₹...=3102₹*
श्री काशीनाथ यादव >> *501₹+1100₹..= 1601₹*
श्री कमलेश मिश्र >> *551₹*
श्री बाल जी मिश्र >> *501₹+1100₹..= 1601₹*
श्री लोकमनी सिंह >> *511₹+2551₹=3062₹*
श्री रमेश सिंह >> *501₹*
श्री गंगा प्रसाद मिश्र >> *500₹*
श्री धनराज यादव >> *1001₹ + 500₹*
श्री शेर बहादुर सिंग >> *101₹+501₹..=602₹*
श्री सुजीत मोरया (मड़वा) >> *50₹*
श्री हरिकेश मिश्र >> *511₹*
श्री महेंद्र प्रताप सिंग >> *501₹*
श्री दिनेश मिश्र (मास्टर) >> *2100₹+3100₹..5200₹*
श्री अभयराज यादव >> *300₹*
श्री गोपाल मिश्र >> *200₹+1001₹..+501₹...= 1702₹*
श्री राज बाहदुर यादव >> *2151₹ + 3111₹..=5263₹*
श्री राममोहन मिश्र >> *2111₹*
श्री प्रिंस मिश्र >> *501₹ + 501₹..=1002*
श्री दिनेश मिश्र >> *1100₹+501₹..=1601₹*
श्री प्रीतम सिंग >> *501₹..*
श्री शिलाजीत मिश्र >>*501₹..*
अंशू मिश्र >> *101₹..*
श्री कृष्णा मिश्र >> *2100₹..*
श्री भगवानदीन यादव >> *501₹*
श्री संतोसी यादव >> *101₹*
श्री अजय मिश्र >> *501₹..*
श्री महेश मिश्र >> *501₹...*
श्री राजेश मिश्र >> *1100₹...*
श्री राजेश मिश्र (लाल)>> *1500₹...*
श्री गौरीशंकर >> *500₹...*
श्री भानुप्रताप सिंग >> *11000₹...*
@77709₹


+
जन्मास्टमी का चंदा +950₹

अभी तक की जमा राशी = 78660₹ (3 April)


2021- की खर्च राशी = 16567₹

_____________________

6 Sept 2021

# 6 इंच का पाइप 24फुट = 2350₹ + 50₹ रिक्शा चार्ज= 2400₹
# आधी टाली मीडियम बालू = 1750₹
# अल्ट्राटेक सीमेंट (३ बोरी) =1095₹ 
# 6 पीस सरिया 44kg = 2332₹
# लेबर 100₹ टेम्पो 250₹ =350₹
# आधी टाली मोटी बालू = 3400₹ (मोरया मड़वा)
# मजदूरों का खर्च अभी तक (1150₹)
*25 तरीक से काम सुरु*
# 3 बोरी सीमेंट 980₹
# 2 दीन की मजदूरी 1800₹
# 4 फिट पाइप ४" और L पाइप ४" 270₹
# 3 टाली मिट्टी @180₹ × 3 = 540₹
# पेंट + w सीमेंट 150₹, plastic त्रिपाल 150₹ आदि.. = लगभग 500₹

Total = 16567₹
कुल समान व मजदूर की लागत!

---------------------
3 अप्रैल 2022

✅150₹ 12 hook
✅1500₹ दिनु और मज़दूर 2 दिन का
✅7050₹  तार, 50kg sariya, 10 बोरी cement।
✅600₹ लाइटिंग पाइप एंड other
✅1400₹ लिंटर के दिन का खर्च 
✅ 5780₹ 14kg सरिया और बालू
✅300 स्टील तार , 2 कन्नी , मटकी आदि
✅ 700₹ खर्चा मजदूरी(500 नान्हू)
✅ 2300₹ (24 feb से 14 मार्च तक 40 balli और 350 पट्टी)
✅*11000₹ (मार्बल@36₹ ग्रेनाइट@125₹ 10750 + Addtional charge)
✅*200 (बसूली और टाइल्स कटर)
✅मार्बल फ्रॉम बदशपुर to बहेड़ी (800₹)
✅1550₹ 4 bori cement
✅**** एक्स्ट्रा खर्च
✅ *1500₹ मज़दूरी
✅ 2551₹ 500 ईंट
@*टोटल:* *लगभग 37521₹ (37500₹)20 मार्च तक

470₹ 15kg white cement (पोताई व टाइल्स के लिए)
365₹ ```180 gram``` Aerolite
14500₹ रेलिंग (भाड़ा आदि)
6000₹ टाइल्स ( भाड़ा व टूल सहित )
600₹ मजदूरी (2 दिन छोटे)
*1400₹ (4 टाइल्स rubbing व 3 cutting किट)
1500₹ (4 बोरी सीमेंट *370₹)
1500₹ (पेंट व stikers व ब्रश)
*1400₹ (700 मुकोठा व 700 घंटी व चैन)
@27735₹

16567+36380+27735+210
=80892₹ (81000₹)

*जय चउरा माई🚩*

🪔🪔🪔🪔

Saturday, February 26, 2022

मैं सांड़ हूं

जरा मेरी भी सुनो
मैं सांड़ हूं , लोग कहते हैं कि मैं तुम्हारी फसल उजाड़ रहा हूँ , सड़कों पर कब्जा कर रहा हूँ ,मैं तुम मनुष्यों से पूंछता हूँ कि कितने कम समय में मैं इतना अराजक हो गया,मे तो हजारो वर्षो से तुम्हारे पूर्वजों की सेवा करता आया हू ! मैं मनुष्यों का दुश्मन कैसे बन गया ।
अभी कुछ सालों पहले तो लोग मुझे पालते थे ,चारा देते थे , लेकिन मनुष्य ज्यादा सभ्य हो गया ट्रैक्टर ले आया ,पम्पिंग सेट से पानी निकालने लगा और मुझे खुला छोड़ दिया , मैं कहाँ जाता ? कहाँ चरता ? मनुष्य ने चरागाहों पर कब्जा कर लिया , अब पापी पेट का सवाल है  अपने पेट के लिए अपने मित्र मनुष्य से संघर्ष शुरू हो गया। मैं तो दुनिया में आना भी नहीं चाहता किंतु तुम मनुष्यों के लिए दूध की आवश्यकता है, तुम्हारे बच्चों के पोषण के लिए मेरा आना निहायत जरूरी है।
यहां तक कि कुछ लोगों ने अपना पेट भरने के लिए मुझे काटना भी शुरू कर दिया ,मैं फिर भी चुप रहा ,चलो किसी काम तो आया तुम्हारे।मेरी माँ ने मेरे हिस्से का दूध देकर तुम्हे और तुम्हारे बच्चों को पाला लेकिन अब तो तुमने उसे भी खुला छोड़ दिया ।
इधर पिछले सालों से कई मनुष्य मित्रों ने मुझे कटने से बचाने के लिए अभियान चलाया , लेकिन जब मैं अपना पेट भरने खातिर उनकी फसल खा गया तो वही मित्र मुझे बर्बादी का कारण बताने लगे , शायद अब यही चाहते हैं कि मैं काट ही दिया जाता ।
मित्रों बस इतना कहना चाहता हूं कि मैं तुम्हारी जीवन भर सेवा करूंगा तुम्हारे घर के सामने बंधा रहूँगा।‌ थोड़े से चारे के बदले तुम्हारे खेत जोत दूंगा । रहट से पानी निकाल दूंगा , गाड़ी से सामान ढो दूंगा। बस मुझे अपना लो 
लेकिन क्या मेरे इस निवेदन का तुम पर कोई असर होगा ?
अरे तुम लोग तो अपने लाचार मां बाप को भी घर से बाहर निकाल देते हो , फिर मेरी क्या औकात..??

जय गौ वंश।

Tuesday, February 22, 2022

हम अपनी स्वतंत्रता का मूल्य अपने रक्त से चुकाएंगे

यह #घटना उस समय की है जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने विदेश जाकर देश को आजाद कराने के लिए आजाद हिंद फौज के गठन का कार्य प्रारंभ किया।
उसी दौरान उन्होंने रेडियो प्रसारण पर एक आह्वान किया था कि "हम अपनी स्वतंत्रता का मूल्य अपने रक्त से चुकाएंगे"
उस समय वे बर्मा मे थे।

आजाद हिंद फौज के गठन व युवाओं को भरती करने के लिए उन्होंने अपना एक कमांडर भारत में नियुक्त किया.. कैप्टन ढिल्लों।
कैप्टन को विशेष निर्देश दिए कि ऐसे युवक को फौज में भर्ती न किया जाए जो अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र हो। उपयुक्त नियम का सख्ती से पालन करना है...

उस दिन कैप्टन ढिल्लों भर्ती होने के लिए सैकड़ों युवक जो पंक्ति मे खड़े थे उनका शारीरिक नापजोख करते थे और उनसे अंत में एक प्रश्न पूछते थे कि क्या आप अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र हो?
उपयुक्त उत्तर मिलने पर भर्ती कर लिया जाता था उस दिन उन्होंने अन्य युवकों की भांति एक युवक की छाती को मापकर तोल लेने वाली मशीन पर उसका वजन लिया, सब कुछ ठीक-ठाक पाया,  वह युवक फौज में ले लिए जाने की आशा से मुस्कुरा रहा था अंत में कैप्टन ढिल्लो ने उससे पूछा..

तुम्हारे ओर कितने भाई हैं?

उस नौजवान ने कहा " मैं तो अकेला हूं, मेरे पिता भी इस समय जीवित नहीं है घर में सिर्फ मेरी मां है"

"क्या करते हो तुम" कैप्टन ढिल्लों ने पूछा..
"मैं गाय भैंस पालता हूं खेती भी करता हूं"
"हिंदुस्तान में कहां के रहने वाले हो" ?
"पंजाब(आज का हरियाणा) से हूँ"

तुम्हारा नाम?
"अर्जुन सिंह"
कैप्टन ढिल्लो ने कुछ उदास होकर कहा..
अर्जुन सिंह मुझे अफसोस है कि तुम्हें फौज में नहीं लिया जा सकता मुझे तुम्हारी देशभक्ति पर कोई संदेह नहीं है लेकिन तुम अपनी मां के अकेले बेटे हो, जाओ अपना खेत और अपने पशुओं को संभालो मां की सेवा करो अर्जुन की खुशी उदासी में बदल गई...
वह घर लौटा तो मां ने पूछा क्यों अर्जुन तुम तो आजाद हिंद सेना  में गए थे भर्ती होने इतनी जल्दी आ गए क्या?
अर्जुन सिंह ने अपनी बूढ़ी मां को सब कुछ बता दिया..
सुनकर मां शांत होकर बोली घबराओ मत बेटे एक-दो दिन बाद फौज में तुम जरूर जाना तुम ले लिए जाओगे तुम देश के सच्चे सपूत बनकर दिखाओ, दिल को छोटा मत करो।

तीसरे दिन पुनः अर्जुन सिंह फौज में भर्ती होने वाले युवकों की पंक्ति में खड़ा था... सामने से आते ही कैप्टन ढिल्लों ने उसे पहचान लिया और बोला कि तुम फिर आ गए तुम्हें याद नहीं है... मैंने तुम्हें क्या कहा था,,
अर्जुन सिंह ने  भरे हुए गले से कहा..
"कैप्टन साहब मुझे आपकी बात खूब याद है किंतु मेरी बूढ़ी मां ने कुएं में कूदकर अपनी जान ही दे दी, कुएं में कूदने के पहली रात को उसने मुझसे कहा था कि यह मेरे लिए बड़ी लज्जा की बात है कि मेरे कारण से तुम आजाद हिंद सेना में नहीं लिए जा सके नेताजी का सहयोगी बनकर देश के काम नहीं आ सके"...
इतना सुनते ही कैप्टन ढिल्लो की आंखों में आंसू भर गए उन्होंने उसी समय अर्जुन को भर्ती कर लिया और 2 दिन बाद जब सुभाष बाबू निरीक्षण के लिए आए तो कैप्टन ने अर्जुन को नेताजी से मिलवाया।
अर्जुन सिंह को देखकर नेता जी ने कहा की अपने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए हमें यह जीवन अंतिम सांस तक दुश्मन से लड़ते हुए मोर्चे पर बिताना है इसमें यदि हमारी मृत्यु भी होती है तो भी पीछे नहीं हटना है...
अर्जुन सिंह ने नेताजी को वचन दिया और अपना वादा निभाया मोर्चे पर वह तब तक लड़ता रहा जब तक कि उसकी राइफल में एक भी गोली बाकी थी..
अर्जुन सिंह के शहीद होने का समाचार  नेताजी सुभाष को जब मिला तो वे स्वयं गये जहां अर्जुन सिंह की मे स्मृति में एक छोटा सा स्मारक उन्होंने बनवाया और उस पर उन्होंने लिखा था "मृत्यु से खेलने वाले इन मां और पुत्र दोनों को मेरा प्रणाम"....

ऐसे ऐसे महान रत्नों को खोकर मिली आजादी का श्रेय कुछ  स्वार्थी लोगो ने  गांधी की झूठी अहिंसा को दे दिया...
जिन नेताजी ने गांधी का सम्मान करते हुए उन्हें "राष्ट्रपिता" कह दिया था उस गांधी ने ही हस्ताक्षर कर नेहरू व जिन्ना दोनों की मनोकामना पूरी कर भारत को टुकड़े टुकड़े कर दिया।

Saturday, August 14, 2021

शांति और अहिंसा


*शांति और अहिंसा के सबसे बड़े नाम गौतम बुद्ध* ...और उनकी मूर्ति के पास हथियार सहित बैठा कोई तालिबानी .!!

*यही सत्य है, अहिंसा का उपदेश केवल सभ्य समाज के लिये है, कट्टरपंथी सोच की किसी भी समाज को शांति व अहिंसा का उपदेश देने की कोशिश करेंगे तो आपके बच्चों को इसका हिसाब अपने कटे सिरों से गिरते खून से, और आपकी बेटियों को भेडियों द्वारा अपने शरीर को नोंचे जाने से देना पड़ेगा .!!*

*अपने बच्चों को गौतम बुद्ध की तरह शांति व अहिंसा का उपदेश मत दीजिये, गांधी बाबा की तरह एक थप्पड़ मारे जाने पर दूसरा गाल आगे करने को मत कहिए .....*
*प्रभु श्रीराम की तरह धनुष बाण उठाने, श्रीकृष्ण की तरह परम संहारक चक्र उठाने, देवों के देव महादेव शिव जी की तरह अपनी तीसरी आंख खोलने की शिक्षा दीजिए .!!*
*उसके साथ ही यह अवश्य बताइए कि शेर भी अकेला हो तो उसे जंगली कुत्ते घेरकर मार डालते हैं, इसलिये सभी हिन्दुओं को आपस में संगठित अवश्य होना होगा .!!*

*पिछले 650-700 वर्ष का इतिहास हमें यही बताता है कि हमारे अनेकों वीर हिन्दू राजाओं ने लाखों करोड़ों वीर सैनिकों के साथ अपने-अपने राज्य की रक्षा के लिये अपने जीवन का बलिदान किया......*
*लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा लगभग न के बराबर हुआ कि सभी राजा एक साथ मिलकर अरब से आये खूंखार लुटेरों से लड़ते. इसी कारण एक लम्बे समय तक विदेशी आक्रांता हमारे देश पर राज करते रहे, हमें लूटते रहे .!!*

*हिन्दू हो, तो आपस में मिल जुलकर रहिए और अपने हिन्दू भाइयों की छोटी मोटी गलतियों को नजरअंदाज करना सीखिए ......*
*और राजनैतिक रूप से संगठित होने के लिये भाजपा के बड़े नेताओं पर विश्वास कीजिए, अगले यूपी चुनाव में भाजपा को वोट दीजिए .!!*

  *जय हिंद*
*वन्दे मातरम्*

🙏🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏🙏

Friday, August 13, 2021

ग्राम बघेड़ी जंघई प्रयागराज।



जय  हो माई
*बारिश के कारन काम धीमा चल रहा है!

*।।जय चउरा माता।।🚩*
*【दूसरा दौर मई 2021】*
(बघेड़ी) update: 06 September 2021 

श्री धीरज मिश्र   >> *1100₹ +1100₹= 2200*
श्री शरदा प्रसाद मिश्र >> *500₹*
श्री माता प्रसाद मिश्र >> *500₹*
श्री राम प्रसाद मिश्र >> *100₹*
श्री संजय मिश्र >>  *600₹*
श्री लोलारखनाथ यादव >> *501₹*
श्री सुभम सिंह >> *500₹*
राजकुमार यादव >> *21₹*
श्री संतोष कुमार मिश्र >> *501₹*
श्री सर्वेश मिश्र >> *501₹*
श्री शैलेश मिश्र >> *501₹*
श्री पवन कुमार मिश्र >> *501₹ + 501₹ =1002₹*
श्री काशीनाथ यादव >> *501₹*
श्री कमलेश मिश्र >> *551₹*
श्री बाल जी मिश्र >> *501₹*
श्री लोकमनी सिंह >> *511₹*
श्री रमेश सिंह >> *501₹*
श्री गंगा प्रसाद मिश्र >> *500₹*
श्री धनराज यादव >> *1001₹*
श्री शेर बहादुर सिंह >> *101₹*
श्री सुजीत मोरया (मड़वा) >> *50₹*
श्री हरिकेश मिश्र >> *511₹*
श्री महेंद्र प्रताप सिंह >> *501₹*
श्री दिनेश मिश्र (मास्टर) >> *2100₹*
श्री अभयराज यादव >> *300₹*
श्री गोपाल मिश्र >> *200₹*
श्री राज बाहदुर यादव >> *2151₹*
श्री राममोहन मिश्र >> *2111₹*
श्री प्रिंस मिश्र >> *501₹*
श्री दिनेश मिश्र >> *1100₹*

जन्मास्टमी का चंदा +950₹

अभी तक की जमा राशी = 22069₹


अभी तक की खर्च राशी = 16567₹

_____________________

6 Sept 2021

# 6 इंच का पाइप 24फुट = 2350₹ + 50₹ रिक्शा चार्ज= 2400₹
# आधी टाली मीडियम बालू = 1750₹
# अल्ट्राटेक सीमेंट (३ बोरी) =1095₹ 
# 6 पीस सरिया 44kg = 2332₹
# लेबर 100₹ टेम्पो 250₹ =350₹
# आधी टाली मोटी बालू = 3400₹ (मोरया मड़वा)
# मजदूरों का खर्च अभी तक (1150₹)
*25 तरीक से काम सुरु*
# 3 बोरी सीमेंट 980₹
# 2 दीन की मजदूरी 1800₹
# 4 फिट पाइप ४" और L पाइप ४" 270₹
# 3 टाली मिट्टी @180₹ × 3 = 540₹
# पेंट + w सीमेंट 150₹, plastic त्रिपाल 150₹ आदि.. = लगभग 500₹

Total = 16567₹
कुल समान व मजदूर की लागत!

---------------------
3 अप्रैल 2022

✅150₹ 12 hook
✅1500₹ दिनु और मज़दूर 2 दिन का
✅7050₹  तार, 50kg sariya, 10 बोरी cement।
✅600₹ लाइटिंग पाइप एंड other
✅1400₹ लिंटर के दिन का खर्च 
✅ 5780₹ 14kg सरिया और बालू
✅300 स्टील तार , 2 कन्नी , मटकी आदि
✅ 700₹ खर्चा मजदूरी(500 नान्हू)
✅ 2300₹ (24 feb से 14 मार्च तक 40 balli और 350 पट्टी)
✅*11000₹ (मार्बल@36₹ ग्रेनाइट@125₹ 10750 + Addtional charge)
✅*200 (बसूली और टाइल्स कटर)
✅मार्बल फ्रॉम बदशपुर to बहेड़ी (800₹)
✅1550₹ 4 bori cement
✅**** एक्स्ट्रा खर्च
✅ *1500₹ मज़दूरी
✅ 1530₹ 300 ईंट
@*टोटल:* *लगभग 36380₹ (36500₹)20 मार्च तक

470₹ 15kg white cement (पोताई व टाइल्स के लिए)
365₹ ```180 gram``` Aerolite
14500₹ रेलिंग (भाड़ा आदि)
6000₹ टाइल्स ( भाड़ा व टूल सहित )
600₹ मजदूरी (2 दिन छोटे)
*1400₹ (4 टाइल्स rubbing व 3 cutting किट)
1500₹ (4 बोरी सीमेंट *370₹)
1500₹ (पेंट व stikers व ब्रश)
*1400₹ (700 मुकोठा व 700 घंटी व चैन)
2551₹ (500 इट)
@30286₹

16567+36380+30286
=83353₹




Friday, July 30, 2021

दलितों तो पूरे विस्व में है! पर भारत के दलित सब से सूखी है?

अंबेडकर को लेकर बहुत से मिथक हैं जिन्हें सच माना जाता है। कल एंड टीवी पर शुरू होने वाले अंबेडकर पर आधारित शो का टीज़र मित्र ने भेजा।  कल उस मित्र से इस संदर्भ में बात हो रही थी तो सोचा क्यों न उन मिथकों और उनकी सच्चाई पर एक सार्वजनिक पोस्ट की जाए। आइए जानते हैं क्या हैं वो मिथक और क्या है सच्चाई-

●मिथक- अंबेडकर बहुत मेधावी थे।

सच्चाई- अंबेडकर ने अपनी सारी शैक्षणिक डिग्रियाँ तीसरी श्रेणी में पास की।

●मिथक- अंबेडकर बहुत गरीब थे।

सच्चाई- जिस ज़माने में लोग फोटो तक नहीं खींचा पाते थे उस ज़माने में अंबेडकर की बचपन की बहुत सी फोटो हैं वह भी कोट पैंट में!

●मिथक- अंबेडकर ने शूद्रों को पढ़ने का अधिकार दिया।

सच्चाई- अंबेडकर के पिता जी ख़ुद उस ज़माने में आर्मी में सूबेदार मेजर थे जो यह बताता है कि उस समय पढ़ने का अधिकार शूद्रों के पास था।

●मिथक- अंबेडकर को पढ़ने नहीं दिया गया।

सच्चाई- उस ज़माने में अंबेडकर को गुजरात वडोदरा के क्षत्रिय राजा सीयाजी गायकवाड़ ने स्कॉलरशिप दी और विदेश पढ़ने तक भेजा और ब्राह्मण गुरु जी ने अपना नाम अंबेडकर भी दिया।

●मिथक- अंबेडकर ने नारियों को पढ़ने का अधिकार दिया।

सच्चाई- अंबेडकर के समय ही 20 पढ़ी लिखी औरतों ने संविधान लिखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया!

●मिथक- अंबेडकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे।

सच्चाई- अंबेडकर ने सदैव अंग्रेजों का साथ दिया।भारत छोड़ो आंदोलन की जम कर खिलाफत की। अंग्रेजों को पत्र लिखकर बोला कि आप और दिन तक देश में राज करिए। उन्होंने जीवन भर हर जगह आजादी की लड़ाई का विरोध किया।

●मिथक- अम्बेडकर बड़े शक्तिशाली थे।

सच्चाई- 1946 के चुनाव में पूरे भारत भर में अंबेडकर की पार्टी की जमानत जप्त हुई थी।

●मिथक- अंबेडकर ने अकेले आरक्षण दिया।

सच्चाई- आरक्षण संविधान सभा ने दिया जिसमें कुल 389 लोग थे।अंबेडकर का उसमें सिर्फ एक वोट था। आरक्षण सब के वोट से दिया गया था।

●मिथक- अंबेडकर राष्ट्रवादी थे।

सच्चाई- 1931 में गोलमेज सम्मेलन में गाँधी जी के भारत के टुकड़े करने की बात कर दलितों के लिए अलग दलितस्तान की माँग अंबेडकर ने की थी।

●मिथक- अंबेडकर ने भारत का संविधान लिखा।

सच्चाई- जो संविधान अंग्रेजों के 1935 के मैग्नाकार्टा से लिया गया हो और विश्व के 12 देशों से चुराया गया है। उसे आप मौलिक संविधान कैसे कह सकते हैं? अभी भी सोसायटी एक्ट में 1860 लिखा जाता है।

●मिथक- आरक्षण को लेकर संविधान सभा के सभी सदस्य सहमत थे।

सच्चाई- इसी आरक्षण को लेकर सरदार पटेल से अंबेडकर की कहा सुनी हो गई थी। पटेल संविधान सभा की मीटिंग छोड़कर बाहर चले गये थे, बाद में नेहरू के कहने पर पटेल वापस आये थे।

सरदार पटेल ने कहा कि जिस भारत को अखण्ड भारत बनाने के लिए भारतीय देशी राजाओं, महराजाओं, रियासतदारों, तालुकेदारों ने अपनी 546 रियासतों को भारत में विलय कर दिया जिसमें 513 रियासतें क्षत्रिय राजाओं की थी। इस आरक्षण के विष से भारत भविष्य में खण्डित होने के कगार पर पहुँच जाएगा और आज हम वैसा होते देख भी रहे हैं।

●मिथक- अंबेडकर स्वेदशी विचारधारा के थे।

सच्चाई- देश के सभी नेताओं का तत्कालीन पहनावा भारतीय पोशाक धोती -कुर्ता, पैजामा-कुर्ता, सदरी व टोपी,पगड़ी, साफा, आदि हुआ करता था। गाँधी जी ने विदेशी पहनावा व वस्तुओं की होली जलवाई थी। यद्यपि नेहरू, गाँधी व अन्य नेता विदेशी विश्वविद्यालय व विदेशों में रहे भी थे फिर भी स्वदेशी आंदोलन से जुड़े रहे। वहीं अंबेडकर की कोई भी तस्वीर भारतीय पहनावे में देखने को नहीं मिलती है। अंबेडकर अंग्रेजियत के हिमायती थे।

नोट- मेरा उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुचाना नहीं है बल्कि सच्चाई बयां करने की कोशिश करना है।तथ्यों की जानकारी आप स्वयं भी प्राप्त कर सकते हैं।

Saturday, July 24, 2021

"देविका रोटवान" भारत की एक शेरनी

आईये आज और ऐक "छिपे हुये हिरो" कि दास्तान से अवगत कराता हूँ , 
और एक सडी हुई व्यवस्था, मरी हुई कौम, गलीच, स्वार्थी और भ्रष्टाचारी लोगों की वजह से एक जिंदगी कैसे बर्बाद हो रही है। दास्ताँ पढिए..

जबसे मैंने मुंबई की "देविका रोटवान" के बारे में पढ़ा है .....तबसे सिस्टम और उसके हरामी नौकरशाही से नफरत दस गुना बढ़ गयी है .......

देविका रोटवांन वही लड़की है जिसकी गवाही पे कसाब को फांसी हुई थी .....
आपको बता दें की देविका मुंबई हमलों के दौरान महज 9 साल की थी ..उसने अपनी आँखों से कसाब को गोली चलाते देखा था ..

लेकिन जब उसे सरकारी गवाह बनाया गया तो उसे पाकिस्तान से धमकी भरे फोन कॉल आने लगे .....देविका की जगह अगर कोई और होता तो वो गवाही नहीं देता ..लेकिन इस बहादुर लड़की ने ना सिर्फ कसाब के खिलाफ गवाही दी बल्कि सीना तान के बिना किसी सुरक्षा के मुंबई हमले के बाद भी 5 साल तक अपनी  उसी झुग्गी झोपडी में रही ...

लेकिन इस देश भक्ति के बदले उसे क्या मिला ??....लोगों ने साथ तक नही दिया

आपको बता दें की देविका रोटवान जब सरकारी गवाह बनने को राजी हो गयी तो उसके बाद उसे उसके स्कुल से निकाल दिया गया ..क्यों की स्कूल प्रशासन का कहना था की आपकी लड़की को आतंकियों से धमकी मिलती है ..जिससे हमारे दुसरे स्टूडेंट्स को भी जान का खतरा पैदा हो सकता है ....

देविका के रिश्तेदारों ने उससे दूरी बना ली ..क्यों की उन्हें पाकिस्तानी आतंकियों से डर लगता था जो लगातर देविका को धमकी देते थे ....देविका को सरकारी सम्मान जरुर मिला ..
उसे हर उस समारोह में बुलाया जाता था जहाँ मुंबई हमले के वीरों और शहीदों को सम्मानित किया जाता था ..लेकिन देविका बताती है की सम्मान से पेट नहीं भरता ...
मकान मालिक उन्हें तंग करता है उसे लगता है की सरकार ने देविका के परिवार को सम्मान के तौर पे करोडो रूपये दिए हैं ..
जबकि असलियत ये हैं की देविका को अपनी देशभक्ति की बहुत भरी कीमत चुकानी पड़ी है ...

देविका का परिवार देविका का नाम अपने घर में होने वाली किसी शादी के कार्ड पे नहीं लिखवाता ..क्यों की उन्हें डर है की इससे वर पक्ष शादी उनके घर में नहीं करेगा ..क्यों की देविका आतंकियों के निशाने पे है ......

देविका के परिवार ने अपनी आर्थिक तंगी की बात कई बार राज्य सरकार और पीएमओ तक भी पहुचाई लेकिन परिणाम ढाक के तीन पात निकला ...
देविका की माँ 2006 में ही गुजर गयी है ...

देविका के घर में आप जायेंगे तो उसके साथ कई नेताओं ने फोटो खिचवाई है ..कई मैडल रखे हैं ..लेकिन इन सब से पेट नहीं चलता ...देविका बताती है की उसके रिश्तेदारों को लगता है की हमें सरकार से करोडो रूपये इनाम मिले है ..लेकिन असल स्थिति ये हैं की दो रोटी के लिए भी उनका परिवार महंगा है .....
आतंकियों से दुश्मनी के नाम पर देविका के परिवार से उसके आस पास के लोग और उसकी कई दोस्तों ने उससे दूरी बना ली ..की कहीं आतंकी देविका के साथ साथ उन्हें भी ना मार डाले ........

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और डीएम ऑफिस के कई चक्कर लगाने के बाद उधर से जवाब मिला की हमारे जिम्मे एक ही काम नहीं है .......

देविका के पिता बताते हैं की उन्होंने अधिकारीयों से कहा की cm साहब ने मदद करने की बात कही थी .....सरकारी बाबू का कहना है की रिटन में लिखवा के लाइए ........
तब आगे कार्यवाही के लिए भेजा जाएगा ..........

अब आप बताइये की क्या ऐसे देश ..ऐसे समाज ..और ऐसी ही भ्रष्ट सरकारी मशीनरी के लिए देविका ने पैर में गोली खायी थी ...??
उसे क्या जरूरत थी सरकारी गवाह बनने की ??
उसे स्कुल से निकाल दिया गया ??
क्यों की उसने एक आतंकी के खिलाफ गवाही दी थी .....

 .....ऐसे खुद गरज समाज ..सरकार ....और नेताओं के लिए अपनी जान दाव पे लगाने की कोई जरूरत नहीं है ...

देविका तुमने बिना मतलब ही अपनी जिन्दगी नरक बना ली ......
सलमान खान एक देशद्रोही संजय दत्त ..और अब एक वैश्या सन्नी लियोन के ऊपर बायोपिक बनाने वाला बॉलीवुड तो देविका के मामले में महा मा**चो निकला ...

आपको बता दें की देविका का interview लेने के लिए  बॉलीवुड निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने देविका को अपने घर बुलाया लेकिन उसे आर्थिक मदद देना तो दूर उसे ऑटो के किराए के पैसे तक नहीं दिए ....ऐसा संवेदन हीन है अपना समाज ...थूकता हूँ मै ऐसे समाज पे ....

शायद कितनो को तो देविका के बारे पता भी नहीं होगा की देविका  रोटवान कौन है ........

थू है ऐसी व्यवस्था पे ..
ज्यादा से ज्यादा "शेयर" किजीये hकि इस शेर दिल बच्ची को इस समाज मे इज्जत के साथ इसे उचित सम्मान मिले...
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