Thursday, October 31, 2019

शराब की घातकता


"एक षड्यंत्र और शराब की घातकता...
"हिंदू धर्म ग्रंथ नहीँ कहते कि देवी को शराब चढ़ाई जाये.., ग्रंथ नहीँ कहते की शराब पीना ही क्षत्रिय धर्म है..ये सिर्फ़ एक मुग़लों का षड्यंत्र था हिंदुओं को कमजोर करने का !

जानिये एक अनकही ऐतिहासिक घटना..
."एक षड्यंत्र और शराब की घातकता...."कैसे हिंदुओं की सुरक्षा प्राचीर को ध्वस्त किया मुग़लों ने ??

जानिये और फिर सुधार कीजिये !!

मुगल बादशाह का दिल्ली में दरबार लगा था और हिंदुस्तान के दूर दूर के राजा महाराजा दरबार में हाजिर थे । उसी दौरान मुगल बादशाह ने एक दम्भोक्ति की "है कोई हमसे बहादुर इस दुनिया में है ?"

सभा में सन्नाटा सा पसर गया ,एक बार फिर वही दोहराया गया !

तीसरी बार फिर उसने ख़ुशी से चिल्ला कर कहता" कोई है हमसे बहादुर जो हिंदुस्तान पर सल्तनत कायम कर सके ??

सभा की खामोशी तोड़ती एक बुलन्द शेर सी दहाड़ गूंजी तो सबका ध्यान उस शख्स की ओर गया ! वो जोधपुर के महाराजा राव रिड़मल राठौड़ थे ! रिड़मल जी राठौड़ ने कहा, "मुग़लों में बहादुरी नहीँ कुटिलता है..., सबसे बहादुर तो राजपूत है दुनियाँ में ! मुगलो ने राजपूतो को आपस में लड़वा कर हिंदुस्तान पर राज किया! 

कभी सिसोदिया राणा वंश को कछावा जयपुर से तो कभी राठोड़ो को दूसरे राजपूतो से...। बादशाह का मुँह देखने लायक था ,ऐसा लगा जैसे किसी ने चोरी करते रंगे हाथो पकड़ लिया हो।

"बातें मत करो राव...उदाहरण दो वीरता का।
"रिड़मल राठौड़ ने कहा "क्या किसी कौम में देखा है किसी को सिर कटने के बाद भी लड़ते हुए ??"

बादशाह बोला ये तो सुनी हुई बात है देखा तो नही, रिड़मल राठौड़ बोले " इतिहास उठाकर देख लो कितने वीरो की कहानिया है सिर कटने के बाद भी लड़ने की... 

"बादशाह हंसा और दरबार में बैठे कवियों की ओर देखकर बोला "इतिहास लिखने वाले तो मंगते होते है । मैं भी १०० मुगलो के नाम लिखवा दूँ इसमें क्या ? मुझे तो जिन्दा ऐसा राजपूत बताओ जो कहे की मेरा सिर काट दो में फिर भी लड़ूंगा।

"राव रिड़मल राठौड़ निरुत्तर हो गए और गहरे सोच में डूब गए। रात को सोचते सोचते अचानक उनको रोहणी ठिकाने के जागीरदार का ख्याल आया।

रात  रोहणी ठिकाना (जो की जेतारण कस्बे जोधपुर रियासत) में दो घुड़सवार बुजुर्ग जागीरदार के पोल पर पहुंचे और मिलने की इजाजत मांगी। ठाकुर साहब काफी वृद्ध अवस्था में थे फिर भी उठ कर मेहमान की आवभगत के लिए बाहर पोल पर आये ,,

घुड़सवारों ने प्रणाम किया और वृद्ध ठाकुर की आँखों में चमक सी उभरी और मुस्कराते हुए बोले" जोधपुर महाराज... आपको मैंने गोद में खिलाया है और अस्त्र शस्त्र की शिक्षा दी है.. इस तरह भेष बदलने पर भी में आपको आवाज से पहचान गया हूँ। हुकम आप अंदर पधारो...मैं आपकी रियासत का छोटा सा जागीरदार, आपने मुझे ही बुलवा लिया होता। राव रिड़मल राठौड़ ने उनको झुककर प्रणाम किया और बोले एक समस्या है , और बादशाह के दरबार की पूरी कहानी सुना दी !

अब आप ही बताये की जीवित योद्धा का कैसे पता चले की ये लड़ाई में सिर कटने के बाद भी लड़ेगा ?

रोहणी जागीदार बोले ," बस इतनी सी बात..मेरे दोनों बच्चे सिर कटने के बाद भी लड़ेंगे और आप दोनों को ले जाओ दिल्ली दरबार में ये आपकी और राजपूती की लाज जरूर रखेंगे..

"राव रिड़मल राठौड़ को घोर आश्चर्य हुआ कि एक पिता को कितना विश्वास है अपने बच्चो पर.. , मान गए राजपूती धर्म को। सुबह जल्दी दोनों बच्चे अपने अपने घोड़ो के साथ तैयार थे!

उसी समय ठाकुर साहब ने कहा ," महाराज थोडा रुकिए !!

मैं एक बार इनकी माँ से भी कुछ चर्चा कर लूँ इस बारे में। "राव रिड़मल राठौड़ ने सोचा आखिर पिता का ह्रदय है कैसे मानेगा ! अपने दोनों जवान बच्चो के सिर कटवाने को ,एक बार रिड़मल जी ने सोचा की मुझे दोनों बच्चो को यही छोड़कर चले जाना चाहिए।

ठाकुर साहब ने ठकुरानी जी को कहा" आपके दोनों बच्चो को दिल्ली मुगल बादशाह के दरबार में भेज रहा हूँ सिर कटवाने को ,दोनों में से कौनसा सिर कटने के बाद भी लड़ सकता है ? आप माँ हो आपको ज्यादा पता होगा !

ठकुरानी जी ने कहा"बड़ा लड़का तो क़िले और क़िले के बाहर तक भी लड़ लेगा पर छोटा केवल परकोटे में ही लड़ सकता है क्योंकि पैदा होते ही इसको मेरा दूध नही मिला था। लड़ दोनों ही सकते है, आप निश्चित् होकर भेज दो 

"दिल्ली के दरबार में आज कुछ विशेष भीड़ थी और हजारो लोग इस दृश्य को देखने जमा थे। बड़े लड़के को मैदान में लाया गया औरमुगल बादशाह ने जल्लादो को आदेश दिया की इसकी गर्दन उड़ा दो..तभी बीकानेर महाराजा बोले "ये क्या तमाशा है ?

राजपूती इतनी भी सस्ती नही हुई है , लड़ाई का मौका दो और फिर देखो कौन बहादुर है ? बादशाह ने खुद के सबसे मजबूत और कुशल योद्धा बुलाये और कहा ये जो घुड़सवार मैदान में खड़ा है उसका सिर् काट दो...२० घुड़सवारों को दल रोहणी ठाकुर के बड़े लड़के का सिर उतारने को लपका और देखते ही देखते उन २० घुड़सवारों की लाशें मैदान में बिछ गयी।दूसरा दस्ता आगे बढ़ा और उसका भी वही हाल हुआ ,मुगलो में घबराहट और झुरझरि फेल गयी ,इसी तरह बादशाह के ५०० सबसे ख़ास योद्धाओ की लाशें मैदान में पड़ी थी और उस वीर राजपूत योद्धा के तलवार की खरोंच भी नही आई।ये देख कर मुगल सेनापति ने कहा" ५०० मुगल बीबियाँ विधवा कर दी आपकी इस परीक्षा ने अब और मत कीजिये हजुर , इस काफ़िर को गोली मरवाईए हजुर...तलवार से ये नही मरेगा...कुटिलता और मक्कारी से भरे मुगलो ने उस वीर के सिर में गोलिया मार दी।सिर के परखचे उड़ चुके थे पर धड़ ने तलवार की मजबूती कम नही करीऔर मुगलो का कत्लेआम खतरनाक रूप से चलते रहा। बादशाह ने छोटे भाई को अपने पास निहत्थे बैठा रखा था ये सोच कर की ये बड़ा यदि बहादुर निकला तो इस छोटे को कोई जागीर दे कर अपनी सेना में भर्ती कर लूंगा लेकिन जब छोटे ने ये अंन्याय देखा तो उसने झपटकर बादशाह की तलवार निकाल ली। उसी समय बादशाह के अंगरक्षकों ने उनकी गर्दन काट दी फिर भी धड़ तलवार चलाता गया और अंगरक्षकों समेत मुगलो का काल बन गए।

बादशाह भाग कर कमरे में छुप गया और बाहर मैदान में बड़े भाई और अंदर परकोटे में छोटे भाई का पराक्रम देखते ही बनता था। हजारो की संख्या में मुगल हताहत हो चुके थे और आगे का कुछ पता नही था। बादशाह ने चिल्ला कर कहा अरे कोई रोको इनको..।

राजा के दरबार का एक मौलवी आगे आया और बोला इन पर शराब छिड़क दो। राजपूत का इष्ट कमजोर करना हो तो शराब का उपयोग करो। दोनों भाइयो पर शराब छिड़की गयी ऐसा करते ही दोनों के शरीर ठन्डे पड़ गए ।

मौलवी ने बादशाह को कहा " हजुर ये लड़ने वाला इनका शरीर नही बल्कि इनकी कुल देवी है और ये राजपूत शराब से दूर रहते है और अपने धर्म और इष्ट को मजबूत रखते है। यदि मुगलो को हिन्दुस्तान पर शासन करना है तो इनका इष्ट और धर्म भ्रष्ट करो और इनमे दारु शराब की लत लगाओ। यदि मुगलो में ये कमियां हटा दे तो मुगल भी मजबूत बन जाएंगे। उसके बाद से ही राजपूतो में मुगलो ने शराब का प्रचलन चलाया और धीरे धीरे राजपूत शराब में डूबते गए और अपनी इष्ट देवी को आराधक से खुद को भ्रष्ट करते गए। और मुगलो ने मुसलमानो को कसम खिलवाई की शराब पीने के बाद नमाज नही पढ़ी जा सकती। इसलिए इससे दूर रहिये।

हिन्दू भाइयों ये सच्ची घटना है और हमे हिन्दू समाज को इस कुरीति से दूर करना होगा। तब ही हम पुनः खोया हुआ वैभव पा सकेंगे और हिन्दू धर्म की रक्षा कर सकेंगे।तथ्य एवं श्रुति पर आधारित। नमन ऐसी वीर परंपरा को नमन..
आग्रह शराब से दूर रहे सभी..! 
हुक्म आप सभी से निवेदन है  पोस्ट ज्यादा से ज्यादा शेयर जरूर करें।
    जय श्री राम,🚩
 जय मां भवानी🚩
 जय राजपूताना🚩

Wednesday, October 30, 2019

भारत! मूर्खो का देश।

बुद्धि हिन कहे कि, सीधा! हिंदुस्तान वालो को!, हिन्द के लोगो ने अपने इसी हरकत से 800 साल से जादा की गुलामी सही!
कभी ये शिव और विष्णु के नाम पे लड़ते थे। तो कभी शिव और शक्ति, फिर मूर्ति और निरंकार पे, कभी भाषाओं पे लड़े थे!... जिसका फायदा मुगलों ने और फिर अंग्रेजो ने लिया!
मंद तो है ही हिन्दुस्तानी लोग सत ही सत धन वैभव से संपन है! चलो थोड़ा दिमाग लगते है! मुगलों(भूखे सूखे लोग) ने पहले दुतो को भेज माहौल पढ़ा फिर जाना की इनकी एकता तो अहंकार के कारण बहुत कमजोर है! फिर क्या कमजोरी पे आक्रमण किया अपने भूखे नंघे भीड़(50 से 60 हजार भूखे लोग) जिसका परिणाम वहीं हुआ जो होना था! उनकी भूख भारत के अहंकारी संप्पन लोगो से जीत गई। और फिर क्या वो समझ गए थे भारतीयों का चरित्र! फिर सदा के लिऐ राज करना था तो बस कुछ लालचियों को पकड़ा और गुरुकुल की पड़ाही पे हमला कर दिया! बीज बो दिया नफरत का गरीबों को छोटी जात घोषित कर दिया और अमीरों को बड़ी, फिर क्या होना था अहंकार में बने बड़ी जातियों ने अपने ही भाई बंधुवो को नीचा दिखाना शुरू कर दिया! लालची पंडित केहेलाए और शोषित दलित! यहां तक इन लालचियों ने वेद जैसे पवित्र प्राकृतिक ग्रंथ को भी नहीं छोड़ा, उसमे के समाज वेवस्था वर्ण को जात(cast) बना दिया अंग्रेजो ने इसका बहुत समर्थन किया, वेदों को तोड मड़ोड के पुर्तगाली, फ्रेंच, Dutch,   अंग्रेजी व अन्य यूरोपीय भाषा में प्रकाशित भी किया! वो जानते थे कैसे समाज को तोड़ा जाता है, जिसे हम "Divide and Rule policy" कहेते है।.......और आज भी वो चालू है बस उल्टा हो गया है।
Ha Ha Ha
 पूरी किताब बन रही है "भारत एक बेवकूफ देश" पर इंतेज़ार करों।
समजने वालो के लिऐ इतना article बहुत है, और जो समजना ही नहीं चाहता या तो वो मानसिक रोगी है या तो फिर वो कुछ फायदे में है इस जात पात के topic  से...

बाकी कलयुग की मर्जी जहां नचाए मंदो को!
*मेरी हिन्दी मत देखना बेवकूफों ये भाव रश है! कोई कविता या शायरी नहीं।

"ढोल, गंवार, शुद्र, पशु, नारी | सकल ताड़ना के अधिकारी ||" अर्थ

"ढोल, गंवार, शुद्र, पशु, नारी |
  सकल ताड़ना के अधिकारी ||"

मानस की इस चौपाई की सदियों से मीमांसा होती रही है और अद्यतन जारी हैं। तुलसीदास जी स्वयं भी नहीं जानते होंगे कि मेरी लिखी किसी चौपाई पर इतना विवाद एवं समीक्षा होगी।

सारा विवाद "ताड़ना" शब्द का है। जिसका सही अर्थ तो शब्दकोश में उपलब्ध हैं। किन्तु हम इसे समझना ही नहीं चाहते अथवा दुसरे शब्दों में कहें तो "ताड़ना" शब्द को लेकर भारतीय जनमानस में इस प्रकार से दुष्प्रचार कर अंग्रेजों की नीति के तहत विधर्मियों द्वारा फुट डालो और राज करो की रणनीति की तरह इसका भरपूर इस्तेमाल किया गया जो आज भी बदस्तूर जारी है। जो भारतीय समाज एवं जनमानस को विभक्त किये हुए हैं।

मीमांसा के समीक्षकों को चौपाई के शेष शब्दों में कोई रूचि नहीं है, केवल "नारी" शब्द पर ही समस्त बुद्धिजीवियों की ज्ञानाग्नि प्रज्वलित होती है।  

नारी स्वभाव से लज्जावान एवं संकोची स्वभाव की होती है एवं अपनी भावाभिव्यक्ति हेतु शब्दों की अपेक्षा नयनों की भाषा की उपयोग करती है।
नारी के मनोभावों को ज्ञात करने हेतु "ताड़ना" होता है ना कि मारना-पिटना।

चूंकि काव्य में छंद, दोहे, चौपाई में अनुशासित शब्द विन्यास होता है, अतः काव्यमय भावाभिव्यक्ति में बहुअर्थी शब्दों का प्रयोग बाध्यकारी बन जाता है।
यही बात इस चौपाई पर लागू होती है।

जय जय सियाराम                                   🙏🙏🙏

Tuesday, October 29, 2019

#justiceforvijay

#justiceforvijay

आप लोग का ध्यान मुंबई पुलिस की एक बहोत शर्मनाक करतुत की तरफ खीच रहा हूं

दीवाली की रात 27th oct  को रात 11 बजे Vijay Singh ( working as MR in Pharma Company ) जो सायन कोलीवाड़ा का रहने वाला है ,अपने 2 cousins के साथ खाने के बाद टहलने के लिए और अपनी होने वाली बीवी से बात करने के लिए घर से कुछ दूर (वडाला ट्रक टर्मिनल ) आया.
जब उसने अपनी बाइक खड़ी की तो सामने एक couple जो वहा का लोकल था बैठा हुआ था और उनके ऊपर इसकी बाइक की लाइट चली गयी । लाइट चहरे पे जाने के बाद couple में से लड़के ने विजय सिंह को गाली दी और थोड़ी बहस चालू हो गयी । उसने अपने 2 दोस्तों को बुला लिया और बात आगे बढ़ गयी यहाँ तक कि हाथापाई पे आ गयी।

जब वहा पुलिस पहोंची तो लड़की ने बस ये बोल दिया कि ये तीनो लड़के( विजय और उसके cousin ) मुझे छेड़ रहे थे और पुलिस ने बिना किसी डिटेल्ड इन्क्वायरी के विजय ओर उसके दोस्तों को मारा । यहाँ तक कि उस वक्त भी लड़की और उसके साथ के लड़के ने इन तीनो पे हाथ उठाया ।

पुलिस मारते मारते विजय सिंह और उसके साथ वालो को पुलिस चौकी ले गयी और ले जा के तीनों को बिना किसी इन्क्वायरी के अलग अलग लॉकअप में डाल दिया । विजय सिंह को हाथ पैर से सीने पे भी मारा जब कि oppsite वालो को अच्छा खासा VIP treatment दिया गया । उनमे से एक लड़के ने पुलिस चौकी में ये तक कहा कि तुम लोग को इधर ही खत्म कर दूंगा लेकिन इसपे भी पुलिस की कोई प्रतिक्रिया नही दी।

2.30 बजे विजय सिंह ने पुलिस स्टाफ से कहा कि मुजे सीने में दर्द हो रहा है और पानी दे दो पीने के लिए लेकिन स्टाफ ने पानी नही दिया बल्कि जब विजय की माँ ने पानी देने की कोशिस की तो उसे भी डाटा। विजय का एक छोटा cousin (12 age) जब पानी देने गया तो उससे भी बहोत बुरा व्यवहार किया । घरवालो से भी बहोत गाली गलौच की  ।
विजय ने पुलिस स्टाफ से कहा कि अपने बेटे जैसा समझ के पानी पिला दो लेकिन इंसानियत मर चुकी थी इन लोगो में शायद।
विजय ने ये भी कहा कि मुजे घुटन सी हो रही है , पंखा चला सकते है क्या लेकिन फिर वही गली गलौज वाली भाषा 

जब वो बेहोश हो गया तो उसे lockup से बाहर निकाला गया और लिटाया गया ।
जब उसे घरवालो को सौपा गया तो विजय दम तोड़ चुका था

शायद आपको ये जान के और धक्का लगे कांस्टेबल ने ये कहा कि गाड़ी नही है हमारे पास , ola मार के जाओ 
विजय के पापा ने एक ola वाले को रिक्वेस्ट कर के जब गाड़ी रुकवायी तब उस ड्राइवर ने उसकी साँसे चेक कर के कहा कि यर मार चुका है ।आप शायद ही उसके बाप की  हालत समझ पाए

सवाल ये है की क्या सिर्फ उस लड़की का ही बयान मायने रखता है
बिना जुर्म साबित हुए पुलिस ने विजय ओर उसके भाइयो को क्यों मारा
पानी पिलाना जुर्म हो गया है क्या ।
एक बाप को उसके बेटे की लाश दे के ये कहना जरूरी है क्या की ola मार के जाओ ।

लोगो को टैग कर औरइसे share करे
 विजय को इंसाफ दिलाने की कोशिस करे।

इससे पहले भी wadala truck terminal police station का नाम कई कामो में बदनाम हो चुका है

Wednesday, October 23, 2019

जाने धुले सिक्के व नये नोट ही क्यों दान धर्म के कार्य में चड़ाया जाता है।

अक्सर पूजा या धर्म कार्यों में विद्वान पंडित लोग दक्षिण में, धुले सिक्के व नये नोट ही क्यों चड़ावे के लिऐ केहेते है!
जानते है क्यों?🤔

जवाब है!
नोट गिनते समय ज़्यादातर लोग थूक🤤 का इस्तेमाल करते हैं, ये किसे पता कि किन-किन लोगों का *थूक नोटों* पर लगा हुआ है??
नोट *शराब से लेकर माँस की दुकान* 🥵👺 तक से होकर गुज़रते हैं, इसलिए नोटों को किसी भी धार्मिक कार्यक्रम मे, धर्म के पूजास्थल पर न चढ़ाएँ, ना ही किसी भी पंडे पुजारियों को दे, अन्यथा पाप लगेगा। और अगर देना ही है तो!
पूजास्थलों पर सिर्फ धुले सिक्के, अनाज, फल या कुछ ना होने पर सिर्फ इज्जत सम्मान का पुष्प🌺 भी चढ़ा सकते है।
 

       
*मंदिर व धर्मस्थल के सुद्धी के लिऐ कृपया पुराने नोट या सिक्के ना चढ़ाये।*

मंदिर भारत का हृदय है, उसके मान, मर्यादा व सुद्धता का जिम्मा हमें स्वाम लेना चाहिए।  ज्ञान का लाभ उठाइये और पाप कर्म से दूर रहे ||

बाकी सब राम की माया!🙏🏻

Sunday, October 20, 2019

Vinayak Damodar Savarkar's Batch of Andaman Jail

50 वर्षो कैद का जेल बिल्ला और सेलुलर जेल की यातनाएं, इस देश की आज़ादी के लिए जिसने भोगी उसको गुमनामी में धकेल कर कांग्रेस ने अपने लोगो को भारत रत्न बनाया। 
कटु सत्य था, है, और रहेगा।
आजादी का श्रेय लेने वालों में से किसी के पास है ऐसा कोई बैज, बिल्ला या यादगार?

Saturday, October 19, 2019

Money..Honesty.. Happiness



1 Graduate person working for a company with heart & honestly....
with out excepting a huge increment or any extra bonus ....
He become Permanent one day After 6 years working for that same company
his salary increased little bit .. He is Happy with that ...
increment ... increment .... increment 
every year !
Do u believe that ! now his Payment should be what ?....
Just a 10 note of 1000 rs (10,000 rs)
every Mumbaikar(family runner) know that what is a value of 10 thousand rupees now a days ..
"2 cheapest Smart Phone" forget this ..
Insted of this all, He have no complaint for that company in heart , he is working with happyy mood..
But A shoking Day of Life
As regular .. He came to office ..
One call came to him
" Hello, Please don't come to Office you are fired . . ."

Can you Feel that Pain..... 12 years of precious Life times ... just ended by a Phone Call

Wait .... Presently his working Experience is of 12 years in same company

He is not alone in This Situation ... Many More are there
What to do For them? How to help them?
This is my way to Help By Posting Meassage and sharing it...
Please Dont Kill Honesty it is costly Than Money..

Sorry for my Bad English, Just Feel The Pain!!
 
............
After 4 years  I am Writing again with My Poor English.

 That Man is Working There Only... With increment of 2 thousand only He is Still A Happy Guy!

He Was Taken After A Short Tension Period with Involving of Political Party in ( Thanks to MNS ).