Friday, November 27, 2020

डाकू भूपत सिंग

*कहानी  गुजरात के सौराष्ट्र इलाके के कुख्यात डाकू भूपत सिंह की  जिसे पाकिस्तान ने मुस्लिम बनने की शर्त पर अपने यहां शरण दे दिया था*

गुजरात के सौराष्ट्र इलाके के कुख्यात डकैत भूपत सिंह की कहानी बेहद दिलचस्प है।

सन 1939 में बड़ौदा के महाराजा थे प्रताप सिंह राव गायकवाड उन्होंने अपने यहां एक घुड़सवारी की प्रतियोगिता रखी जिसमें एक युवक भूपत सिंह ने इनाम जीता था।

भूपत सिंह अमरेली के एक रियासत के राज दरबार में घोड़ों की देखभाल करने का काम करता था और जब राजा शिकार पर जाते तब भूपत उनके साथ जाता था इसी तरह भूपत ने बचपन से ही बंदूक चलाना सीख लिया था और उसका निशाना अचूक हो गया था।
फिर देश आजाद हो गया और रजवाड़े खत्म हो गए उसी दौरान राजकोट के गोंडल कस्बे में एक अमीर मुस्लिम व्यापारी ने उस जमाने में 9 लाख रुपये खर्च करके अपना घर बनाया था और उस जमाने में इलाके के लोग उसे नौलखा घर करते थे क्योंकि यह नौ लाख में बना था।

और इस घर में डकैती पड़ी और इस डकैती का आरोप भूपत सिंह पर लगा और भूपत सिंह फरार हो गया और अपने कुछ साथियों को मिलाकर अपना एक गैंग बना लिया और फिर उसके बाद उसने कत्ल और डकैती की कई वारदातों को अंजाम दिया।

धीरे-धीरे उसके गैंग में 42 डकैत शामिल हो गए और एक के बाद एक भूपत गैंग ने 90 हत्याएं और उस जमाने में साढे आठ लाख की डकैती की जो उस जमाने में बहुत बड़ी रकम हुआ करती थी।

अपने इन कारनामों के चलते भूपत राष्ट्रीय अखबारों और विदेशी मीडिया में सुर्खी बन गया था और उस समय सौराष्ट्र के गृह मंत्री पुलिस की नाकामी से बहुत खफा हुए और उन्होंने यह घोषणा कर दिया कि जब तक भूपत सिंह पकड़ा नहीं जाएगा तब तक पुलिस के वेतन में 25% की कटौती कर दी जाएगी।

उस समय गुजरात मुंबई प्रेसीडेंसी राज्य का हिस्सा हुआ करता था फिर सरकार ने पुणे में काम कर रहे 1933 बैच के IPS अफसर विष्णु गोपाल कटिनकर को भूपत गैंग का खात्मा करने के लिए सौराष्ट्र भेजा और काटीनकर को आउट आफ टर्न प्रमोशन देकर राजकोट रेंज का आईजी बनाया गया।

पुलिस अधिकारी का काटिनकर साहब ने नए सिरे से भूपत गैंग को खत्म करने का प्लान रख रचा और पुलिस में कई विश्वसनीय मुखबीर भर्ती किए।

काटीनकर ने बहुत कोशिश किया लेकिन उन्हें भूपत गैंग का कोई सुराग नहीं मिल रहा था।

तभी राजकोट में लूट की एक वारदात हुई और पता चला कि इस लूट को भूपत गैंग ने अंजाम दिया है और डकैतों का यह दल कार से फरार हुआ है।

घटनास्थल पर एक गैराज की पर्ची मिली और इस पर्ची से पता चला कि वारदात में इस्तेमाल की गई कार एक भूतपूर्व राजकुमार की है कटिनकर साहब ने भूतपूर्व राजकुमार पर दबाव डाला और राजकुमार ने बता दिया कि उन्होंने भूपत के साथी डाकू कालू देवायत को पनाह दी है उसके बाद काटीनकर उस राजपरिवार के फार्म हाउस गए फिर गोलीबारी में भूपत के साथी डकैत कालू देवायत को गोली मार दी गई और गैंग के कई डकैत फरार हो गए ।

लेकिन पुलिस ने पीछा करते-करते उन्हें चारों तरफ से घेर लिया और पुलिस ने कई डकैतों को मार दिया हालांकि पुलिस के 2 जवान भी शहीद हुए थे

इस तरह एक के बाद एक भूपत गैंग के कई डकैतों को का खात्मा कर दिया गया।

उसी दरम्यान भूपत सिंह डकैत के सबसे भरोसेमंद साथी राणा किसी काम से बड़ोदरा गया पुलिस को सूचना मिली और 700 जवानों की मदद से राणा की घेराबंदी किया गया और राणा को गोली मार दी गई ।

अपने गैंग के सभी विश्वसनीय साथियों के खात्मे के बाद भूपत एकदम डर गया अब उसे भी एहसास हो गया था कि या तो उसका भी एनकाउंटर कर दिया जाएगा या यदि वह पकड़ा गया तो उसे फांसी होगी।

उसके बाद वह कच्छ की सीमा से पाकिस्तान भाग गया। पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने उसे पकड़ लिया और उसे गैरकानूनी तरीके से सीमा पार करने के जुर्म में 1 साल की कैद और ₹100 का जुर्माना हुआ।

मुकदमे के दौरान भूपत सिंह ने खुद को पाकिस्तान में शरण दिए जाने की अपील की। फिर पाकिस्तानी सरकार ने उसे इस शर्त पर पाकिस्तान में शरण देने की अर्जी स्वीकार की कि भूपत सिंह इस्लाम कुबूल कर लेगा उसके बाद भूपत सिंह ने इस्लाम कुबूल करने का वादा किया और कराची की एक मस्जिद में कलमा पढ़ कर मुसलमान बन गया और अपना नाम युसूफ रख लिया।

उस समय भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे और कुख्यात डकैत भगत सिंह को पाकिस्तान से प्रत्यर्पण की कई कोशिशें हुई।

उस जमाने में पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त रहे डॉक्टर पी सी ए राघवन बताते हैं कि खुद नेहरू भूपत सिंह के प्रत्यर्पण में काफी रूचि लिए लेकिन जब भारत सरकार भूपत डाकू को भारत वापस लाने में विफल रहे तब नेहरू ने भूपत का मुद्दा दूसरे देशों के सामने भी उठाये।

इधर गुजरात में गुजरात के नेताओं के दबाव की वजह से भूपत का मुद्दा लगातार मीडिया में चर्चा में बना हुआ था इतना ही नहीं कई विदेशी मीडिया जैसे न्यूयॉर्क टाइम्स और बीबीसी भी भूपत सिंह के मुद्दे पर खूब लिख रहा था।

उसके बाद जुलाई 1956 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री मोहम्मद अली डोगरा के बीच भूपत के प्रत्यर्पण को लेकर बातचीत हुई, लेकिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने नेहरू को एकदम मना कर दिया कि भूपत को भारत के हवाले नहीं किया जाएगा ।

फिर उसी समय प्रख्यात अखबार ब्लिट्ज ने अप्रैल 1953 के अंक में एक स्टोरी छाप कर भारत को हिला दिया कि डकैत भूपत उर्फ यूसुफ को पाकिस्तानी सेना में भारतीय डाकुओं की भर्ती करने का काम सौंपा गया है और भूपत कई कुख्यात भारतीय डाकुओं के संपर्क में है जिन्हें पाकिस्तानी सेना में भर्ती करके भारत के खिलाफ इस्तेमाल किया जाएगा।

भूपत की पहली पत्नी गुजरात के सौराष्ट्र इलाके में रहती थी लेकिन पाकिस्तान जाने के बाद ऊपर इस्लाम कुबूल कर लिया तब पाकिस्तान में उसने दोबारा शादी की और उसके बच्चे भी हुए।

इस कुख्यात डकैत भूपत पर बहुत सी फिल्में बनी है जिसमें सबसे सुपरहिट फिल्म तेलुगू अभिनेता एनटी रामा राव ने बनाई थी जिसमें उन्होंने खुद अभिनय भी किया था। इसके अलावा भूपत पर बहुत सी किताबें लिखी गई है और भूपत गैंग का खात्मा करने वाले पुलिस अधिकारी 1933 बैच के आईपीएस ऑफिसर काटिनकर ने भी मराठी भाषा में एक किताब लिखी है।

भूपत का पाकिस्तान में बाद में बहुत बुरा हाल हो गया पाकिस्तानी फौज और पाकिस्तानी सरकार को जब लगा कि भूपत उसके लिए फायदेमंद नहीं है तब उन्होंने भूपत को उसके हाल पर छोड़ दिया।

बुढ़ापे में भूपत उर्फ यूसुफ दूध बेचकर गुजारा करता था और भारत आने की बहुत कोशिश किया लेकिन तब भारत सरकार ने ही मना कर दिया।

वह दो बार भारत की सीमा में घुसने की कोशिश किया लेकिन पाकिस्तानी रेंजरो ने उसे पकड़कर जेल में बंद कर दिया अंत में 2006 में बुढ़ापे में कई बीमारियों से पीड़ित कुख्यात डकैत भूपत सिंह उर्फ यूसुफ की पाकिस्तान में मौत हो गई और उसे कराची के कब्रिस्तान में दफना दिया गया

Thursday, May 28, 2020

This "Swara Sthambha" (Musical Pillar) of Hampi is not just a stone & Sculpture.

When you visit a temple each "Shila" has volumes of information to convey us.

This single amazing work on the hardest rock in the world has more than 30 elements of which I chose 8 to explain.

1) Bhitta - Base, with events related to trade, commerce & Military.
2) Jaadyakumbha - is the invertion of a Bud opening generally the Padma/Lotus.

3) Graasapatta - a band of Kirtimukhas, Simhamukhas, Asva or Gaja to avoid Drishti or Dosha.

4) Kapota - Usually birds like pigeons sit in this area, so the name.
5) Mancha Bhadra - Square shaped pedestal/base.
6) Swara Sthambha - the main part of pillar sculpted in to 12 different smaller pillars that produce music nodes

7) Seersha - the final or the head, with different yalis

8) Dandachadya - the Chajja/Eave. This Chajja is unique because the design that's only possible on wood construction is brought on to stone. "Mera Bharath Mahan"
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Monday, May 11, 2020

अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस (International Nurses Day)



वितरण नोबेल नर्सिंग सेवा की शुरुआत करने वाली "फ्लोरेंस नाइटइंगेल" के जन्म दिवस पर हर वर्ष पूरी दुनिया में 12 मई को अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस मनाया जाता है। 

जिसकी शुरुआत 1965 से हुई जिसका उद्देश्य इंटरनेशनल काउंसिल आफ नर्सेस, नर्सों के लिए  एक विषय की शैक्षिक और सार्वजनिक सूचना की जानकारी की सामग्री का निर्माण और वितरण करके इस दिन को याद करना। 

नर्सों को सराहनीय सेवा के लिए भारत सरकार के परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगल पुरस्कार की शुरुआत किया गया। यह पुरस्कार प्रतिवर्ष माननीय राष्ट्रपति के द्वारा प्रदान किया जाता है। 

जय हिंद
🙏🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏🙏

आम कि बात

बग में आम गिरे थे बहुत सारे,
मेने एक भी पत्थर नहीं मारे,
अंधी तूफ़ां का ये चपेट था,
प्रकृति माँ का दिया भेंट था,
बीन बीनकर, में थक सा गया था!
आम गिरेथे काफी वहा पर!! कोई ना था!

याद आ गई दो दिन पेहेले की बात
यू ही तूफा गर्जी थी! दीन की ये बात,
जमा थे काफि लोग पेड़ के नीचे,
में रह गया था सब से पीछे!
सब भर भर ले गये आम से थैली,
उदास रह गया था में! खाली झोली,
दिल ने बस कहीं इतनिसि बात! प्रकृति माँ से!
"मन मुझे भी था एक आम खाने का यहाँ से"
प्रकृति माँ ने सुन ली मेरी छोटी फरियाद!
पेहली वाली पंक्ति है, किस्सा! दो दीन बाद!!


||राम राम||
जय माँ प्रकृति
जय कलयुग

रामनामी जनजातियों कि राम नाम की श्रद्धा

ये है राम-नामी जनजाति.....जंगल में  रहने वाले ये लोग अपने लगभग पूरे शरीर पर भगवान राम का नाम गुदवाते हैं, वो भी स्थायी रूप से।

इस समुदाय को किसी पुराने समय में श्री राम में मन्दिर में नहीं जाने दिया गया था। तब इनके पूर्वजों ने कहा था कि राम को हमसे छीनकर बताओ तो जाने....राम को हमसे कोई अलग नहीं कर सकता।

इस तरह से जनजाति में पूरे शरीर पर राम का नाम गुदवाने की परंपरा चल बसी। आजतक ये जनजाति किसी दूसरे मनुष्य निर्मित तथाकथित धर्म में परिवर्तित न हो सकी।

ये लोग कट्टर रामपंथी होते हैं। अब इस जनजाति के लोग मन्दिर भी जाते हैं । अब परिस्थितियां बदल गयी मगर राम नाम लिखने की परंपरा आज तक न बदली।

इस राम नामी जनजाति को समस्त हिंदुओं की तरफ से कोटि कोटि नमन। 🙏🙏

Saturday, May 9, 2020

धर्म का मज्जाक उड़ाने वालों को माँ प्राकृत ने सबक सिखाया।

थोड़ा समय दीजिए, विषय पढ़ने लायक है..

जिस छुआछूत को बदनाम कर करके  उपन्यासो में फिल्मों में ब्राह्मणो को झूठा और फर्जी बदनाम किया गया वहीं छुआछूत आज ब्रह्मांड की ब्रह्मास्त्र बनकर रक्षा कर रहा है।।

आपने अपने शास्त्रों का एवं ब्राह्मणों का खूब मज़ाक उड़ाया था जब वह यह कहते थे कि जिस व्यक्ति का आप चरित्र न जानते हों, उससे जल या भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए ।

क्योंकि आप नहीं जानते कि अमुक व्यक्ति किस विचार का है , क्या शुद्धता रखता है ,कौन से गुण प्रधान का है , कौन सा कर्म करके वह धन ला रहा है , शौच या शुचिता का कितना ज्ञान है , किस विधा से भोजन बना रहा है , उसके लिए शुचिता या शुद्धता के क्या मापदंड हैं इत्यादि !!!

     किन्तु वर्तमान समय में एक करोना वायरस की वजह से सभी को एक मीटर तक की दूरी बनाए रखने की हिदायत पूरा विश्व दे रहा है और जो व्यक्ति दूरी नहीं बनाता है उसे सजा देने का काम कर रहे हैं पूरा विश्व लकड़ाउन का पालन करने को मजबूर है

जिसका चरित्र नहीं पता हो , उसका स्पर्श करने को भी मना किया गया है

यह बताया जाता था कि हर जगह पानी और भोजन नहीं करना चाहिए , तब English में american और british accent में आपने इसको मूर्खता और discrimination बोला था !!

बड़ी हँसी आती थी तब !!!! बकवास कहकर आपने अपने ही शास्त्र और ब्राह्मणों को दुत्कारा था ।

और आज ??????

यही जब लोग विवाह के समय वर वधु की 3 से 4 पीढ़ियों का अवलोकन करते थे कि वह किस विचारधारा के थे ,कोई जेनेटिक बीमारी तो नहीं , किस height के थे , कितनी उम्र तक जीवित रहे , खानदान में कोई वर्ण संकर का इतिहास तो नहीं रहा इत्यादि ताकि यह सुनिश्चित कर सकें कि आने वाली सन्तति विचारों और शरीर से स्वस्थ्य बनी रहे और बीमारियों से बची रहे , जिसे आज के शब्दों में GENETIC SELECTION बोला जाता है ।

जैसे आप अपने पशु चाहे वह कुत्ता हो या गाय हो का गर्भाधान कराते हैं तो यह ध्यान रखते हैं कि अमुक कुत्ता या बैल हृष्ट पुष्ट हो , बीमारी विहीन हो , अच्छे "नस्ल" का हो । इसीलिए वीर्य bank बना जहाँ अच्छे sperms की उपलब्धता होती है ।
ऐसा तो नहीं कहते न कि इसको जिससे प्रेम हो उससे गर्भाधान करा लें । तब तो समझ रहे हैं न कि आपकी कुतिया या गाय का क्या हश्र होगा और आने वाली generation क्या होगी  !!!!!

पर आप इन सब बातों पर हंसते थे ।।।

यही शास्त्र जब बोलते थे कि जल ही शरीर को शुद्ध करता है और कोई तत्व नहीं ,बड़ी हँसी आयी थी आपको !!

तब आपने बकवास बोलकर अपना पिछवाड़ा tissue paper से साफ करने लगे ,खाना खाने के बाद जल से हाथ धोने की बजाय tissue पेपर से पोंछ कर इतिश्री कर लेते थे ।

और अब ????
जब यही ब्राह्मण और शास्त्र बोलते थे कि भोजन ब्रह्म के समान है और यही आपके शरीर के समस्त अवयव बनाएंगे और विचारों की शुद्धता और परिमार्ज़िता इसी से संभव है इसलिए भोजन को चप्पल या जूते पहनकर न छुवें ।

बड़ी हँसी आयी थी आपको !! Obsolete कहकर आपने खूब मज़ाक उड़ाया !!!  
जूते पहनकर खाने का प्रचलन आपने दूसरे देशों के आसुरी समाज से ग्रहण कर लिया । Buffet system बना दिया ।

उन लोगों का मजाक बनाया जो जूते चप्पल निकालकर भोजन करते थे ।

अरे हमारी कोई भी पूजा , यज्ञ, हवन सब पूरी तरह स्वच्छ होकर , हाथ धोकर करने का प्रावधान है ।

पंडित जी आपको हाथ में जल देकर हस्त प्रक्षालन के लिए बोलते हैं ।आपके ऊपर जल छिड़ककर मंत्र बोलते हैं :-
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपिवा ।।
यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्यभ्यन्तरः शुचिः ॥

ॐ पुनातु पुण्डरीकाक्षः पुनातु पुण्डरीकाक्षः पुनातु ।।

तब भी आपने मजाक उड़ाया ।
जब सनातन धर्मी के यहाँ किसी के घर शिशु का  जन्म होता था तो सूतक लगता था । इस अवस्था में ब्राह्मण 10 दिन , क्षत्रिय 15 दिन , वैश्य 20 दिन और शूद्र 30 दिन तक सबसे अलग रहता है । उसके घर लोग नहीं आते थे , जल तक का सेवन नहीं किया जाता था जब तक उसके घर हवन या यज्ञ से शुद्धिकरण न हो जाये । प्रसूति गृह से माँ और बच्चे को निकलने की मनाही होती थी । माँ कोई भी कार्य नहीं कर सकती थी और न ही भोजनालय में प्रवेश करती थी ।
इसका भी आपने बड़ा मजाक उड़ाया ।।

ये नहीं समझा कि यह बीमारियों से बचने या संक्रमण से बचाव के लिए Quarantine किया जाता था या isolate किया जाता था ।

प्रसूति गृह में माँ और बच्चे के पास निरंतर बोरसी सुलगाई रहती थी जिसमें नीम की पत्ती, कपूर, गुग्गल इत्यादि निरंतर धुँवा दिया जाता था।

उनको इसलिए नहीं निकलने दिया जाता था क्योंकि उनकी immunity इस दौरान कमज़ोर रहती थी और बाहरी वातावरण से संक्रमण का खतरा रहता था ।

लेकिन आपने फिर पुरानी चीज़ें कहकर इसका मज़ाक उड़ाया और आज देखिये 80% महिलाएँ एक delivery के बाद रोगों का भंडार बन जाती हैं कमर दर्द से लेकर , खून की कमी से लेकर अनगिनत समस्याएं  ।

ब्राह्मण , क्षत्रिय , वैश्य , शुद्र के लिए अलग Quarantine या isolation की अवधी इसलिए क्योंकि हर वर्ण का खान पान अलग रहता था , कर्म अलग रहते थे जिससे सभी वर्णों के शरीर की immunity system अलग होता था जो उपरोक्त अवधि में balanced होता था ।

ऐसे ही जब कोई मर जाता था तब भी 13 दिन तक उस घर में कोई प्रवेश नहीं करता था । यही Isolation period था । क्योंकि मृत्यु या तो किसी बीमारी से होती है या वृद्धावस्था के कारण जिसमें शरीर तमाम रोगों का घर होता है । यह रोग हर जगह न फैले इसलिए 14 दिन का quarantine period बनाया गया ।

अरे जो शव को अग्नि देता था  या दाग देता था । उसको घर वाले तक नहीं छू सकते थे 13 दिन तक । उसका खाना पीना , भोजन , बिस्तर , कपड़े सब अलग कर दिए जाते थे । तेरहवें दिन शुद्धिकरण के पश्चात , सिर के बाल हटवाकर ही पूरा परिवार शुद्ध होता था ।

तब भी आप बहुत हँसे थे ।  bloody indians कहकर मजाक बनाया था !!!

जब किसी रजस्वला स्त्री को 4 दिन isolation में रखा जाता है ताकि वह भी बीमारियों से बची रहें और आप भी बचे रहें तब भी आपने पानी पी पी कर गालियाँ दी । और नारीवादियों को कौन कहे  , वो तो दिमागी तौर से अलग होती हैं , उन्होंने जो ज़हर बोया कि उसकी कीमत आज सभी स्त्रियाँ तमाम तरह की बीमारियों से ग्रसित होकर चुका रही हैं ।

जब किसी के शव यात्रा से लोग आते हैं घर में प्रवेश नहीं मिलता है और बाहर ही हाथ पैर धोकर स्नान करके , कपड़े वहीं निकालकर घर में आया जाता है ,  इसका भी खूब मजाक उड़ाया आपने ।

आज भी गांवों में एक परंपरा है कि बाहर से कोई भी आता है तो उसके पैर धुलवायें जाते हैं । जब कोई भी बहूं , लड़की या कोई भी दूर से आता है तो वह तब तक प्रवेश नहीं पाता जब तक घर की बड़ी बूढ़ी लोटे में जल लेकर , हल्दी डालकर उस पर छिड़काव करके वही जल बहाती नहीं हों , तब तक । खूब मजाक बनाया था न ?

इन्हीं सवर्णों को और ब्राह्मणों को अपमानित किया था जब ये गलत और गंदे कार्य करने वाले , माँस और चमड़ों का कार्य करने वाले लोगों को तब तक नहीं छूते थे जब तक वह स्नान से शुद्ध न हो जाये ।  ये वही लोग थे जो जानवर पालते थे जैसे सुअर, भेड़ , बकरी , मुर्गा , कुत्ता इत्यादि जो अनगिनत बीमारियाँ अपने साथ लाते थे ।
ये लोग जल्दी उनके हाथ का छुआ जल या भोजन नहीं ग्रहण करते थे तब बड़ा हो हल्ला आपने मचाया और इन लोगों को इतनी गालियाँ दी कि इन्हें अपने आप से घृणा होने लगी ।

यही वह गंदे कार्य करने वाले लोग थे जो प्लेग , TB , चिकन पॉक्स , छोटी माता , बड़ी माता , जैसी जानलेवा बीमारियों के संवाहक थे ,और जब आपको बोला गया कि बीमारियों से बचने के लिए आप इनसे दूर रहें तो आपने गालियों का मटका इनके सिर पर फोड़ दिया और इनको इतना अपमानित किया कि इन्होंने बोलना छोड़ दिया और समझाना छोड़ दिया ।

आज जब आपको किसी को छूने से मना किया जा रहा है तो आप इसे ही विज्ञान बोलकर अपना रहे हैं । Quarantine किया जा रहा है तो आप खुश होकर इसको अपना रहे हैं ।

जब शास्त्रों ने बोला था तो ब्राह्मणवाद बोलकर आपने गरियाया था और अपमानित किया था ।

आज यह उसी का परिणति है कि आज पूरा विश्व इससे जूझ रहा है ।

याद करिये पहले जब आप बाहर निकलते थे तो आप की माँ आपको जेब में कपूर या हल्दी की गाँठ इत्यादि देती थी रखने को ।
यह सब कीटाणु रोधी होते हैं।
शरीर पर कपूर पानी का लेप करते थे ताकि सुगन्धित भी रहें और रोगाणुओं से भी बचे रहें ।

लेकिन सब आपने भुला दिया ।।

आपको तो अपने शास्त्रों को गाली देने में और ब्राह्मणों को अपमानित करने में , उनको भगाने में जो आनंद आता है शायद वह परमानंद आपको कहीं नहीं मिलता ।

अरे गधों !! अपने शास्त्रों के level के जिस दिन तुम हो जाओगे न तो यह देश विश्व गुरु कहलायेगा ।

तुम ऐसे अपने शास्त्रों पर ऊँगली उठाते हो जैसे कोई मूर्ख व्यक्ति के मूर्ख 7 वर्ष का बेटा ISRO के कार्यों पर प्रश्नचिन्ह लगाए ।

अब भी कहता हूँ अपने शास्त्रों का सम्मान करना सीखो । उनको मानो  ।  बुद्धि में शास्त्रों की अगर कोई बात नहीं घुस रही है तो समझ जाओ आपकी बुद्धि का स्तर उतना नहीं हुआ है । उस व्यक्ति के पास जाओ जो तुम्हे शास्त्रों की बातों को सही ढंग से समझा सके ।

अरे कुछ भी हो मुझसे ही पूछ लिया करो शायद मैं ही कुछ मदद कर दूँ । लेकिन गाली मत दो , उसको जलाने  का दुष्कृत्य मत करो ।

आपको बता दूँ कि आज जो जो Precautions बरते जा रहे हैं , मनुस्मृति उठाइये , उसमें सभी कुछ एक एक करके वर्णित है ।

लेकिन आप पढ़ते कहाँ हैं , दूसरे गधों की बातों में आकर प्रश्नचिन्ह उठायेंगे और उन्हें जलाएंगे

यह पोस्ट वैसे ही लम्बी हो गयी है अन्यथा वह सारी बातें यहाँ श्लोक सहित डालता ।
काश एक platform मिलता और mic मिल जाता तो घण्टों घण्टों बोलता और आपको एक एक अवयव से रूबरू करवाता और पूरी तरह वैज्ञानिक दृष्टिकोण लेकर

क्योंकि जिसने विज्ञान का गहन अध्ययन किया होगा , वह शास्त्र वेद पुराण इत्यादि की बातों को बड़े ही आराम से समझ सकता है , corelate कर सकता है और समझा भी सकता है ।

भले अभी इस निकृष्ट / वैश्विक संविधान की आप लोग दुहाई दे रहे हों ।

लेकिन मेरी यह बात स्वर्ण अक्षरों में लिख लीजिये कि मनुस्मृति से सर्वश्रेष्ठ विश्व में कोई संविधान नहीं बना है और एक दिन पूरा विश्व इसी मनुस्मृति संविधान को लागू कर इसका पालन करेगा ।

Note it down !! Mark my words again !! 

मुझे आप गालियाँ दे सकते हैं । 

मुझे नहीं पता कि आप इतनी लंबी पोस्ट पढ़ेंगे या नहीं लेकिन मेरा काम है आप लोगों को जगाना , जिसको जगना है या लाभ लेना है वह पढ़ लेगा ।
यह भी अनुरोध करता हूँ कि सभी  ब्राह्मण बनिये ( भले आप किसी भी जाति से हों ) और  ब्राह्मणत्व का पालन कीजिये इससे इहलोक और परलोक दोनों  सुधरेगा...

सर्वे भवन्तु सुखिनःसवेँसनतु निरामया: