Tuesday, December 29, 2020
Saturday, December 12, 2020
एक पागल भिखारी
जब बुढ़ापे में अकेला ही रहना है तो औलाद क्यों पैदा करें उन्हें क्यों काबिल बनाएं जो हमें बुढ़ापे में दर-दर के ठोकरें खाने के लिए छोड़ दे ।
क्यों दुनिया मरती है औलाद के लिए, जरा सोचिए इस विषय पर।
मराठी भाषा से हिन्दी ट्रांसलेशन की गई ये सच्ची कथा है ।
जीवन के प्रति एक नया दृष्टिकोण आपको प्राप्त होगा।समय निकालकर अवश्य पढ़ें।
👇
हमेशा की तरह मैं आज भी, परिसर के बाहर बैठे भिखारियों की मुफ्त स्वास्थ्य जाँच में व्यस्त था। स्वास्थ्य जाँच और फिर मुफ्त मिलने वाली दवाओं के लिए सभी भीड़ लगाए कतार में खड़े थे।
अनायाश सहज ही मेरा ध्यान गया एक बुजुर्ग की तरफ गया, जो करीब ही एक पत्थर पर बैठे हुए थे। सीधी नाक, घुँघराले बाल, निस्तेज आँखे, जिस्म पर सादे, लेकिन साफ सुथरे कपड़े।
कुछ देर तक उन्हें देखने के बाद मुझे यकीन हो गया कि, वो भिखारी नहीं हैं। उनका दाँया पैर टखने के पास से कटा हुआ था, और करीब ही उनकी बैसाखी रखी थी।
फिर मैंने देखा कि,आते जाते लोग उन्हें भी कुछ दे रहे थे और वे लेकर रख लेते थे। मैंने सोचा ! कि मेरा ही अंदाज गलत था, वो बुजुर्ग भिखारी ही हैं।
उत्सुकतावश मैं उनकी तरफ बढ़ा तो कुछ लोगों ने मझे आवाज लगाई :
"उसके करीब ना जाएँ डॉक्टर साहब,
वो बूढा तो पागल है । "
लेकिन मैं उन आवाजों को नजरअंदाज करता, मैं उनके पास गया। सोचा कि, जैसे दूसरों के सामने वे अपना हाथ फैला रहे थे, वैसे ही मेरे सामने भी हाथ करेंगे, लेकिन मेरा अंदाज फिर चूक गया। उन्होंने मेरे सामने हाथ नहीं फैलाया।
मैं उनसे बोला : "बाबा, आपको भी कोई शारीरिक परेशानी है क्या ? "
मेरे पूछने पर वे अपनी बैसाखी के सहारे धीरे से उठते हुए बोले : "Good afternoon doctor...... I think I may have some eye problem in my right eye .... "
इतनी बढ़िया अंग्रेजी सुन मैं अवाक रह गया। फिर मैंने उनकी आँखें देखीं।
पका हुआ मोतियाबिंद था उनकी ऑखों में ।
मैंने कहा : " मोतियाबिंद है बाबा, ऑपरेशन करना होगा। "
बुजुर्ग बोले : "Oh, cataract ?
I had cataract operation in 2014 for my left eye in Ruby Hospital."
मैंने पूछा : " बाबा, आप यहाँ क्या कर रहे हैं ? "
बुजुर्ग : " मैं तो यहाँ, रोज ही 2 घंटे भीख माँगता हूँ सर" ।
मैं : " ठीक है, लेकिन क्यों बाबा ? मुझे तो लगता है, आप बहुत पढ़े लिखे हैं। "
बुजुर्ग हँसे और हँसते हुए ही बोले : "पढ़े लिखे ?? "
मैंने कहा : "आप मेरा मजाक उड़ा रहे हैं, बाबा। "
बाबा : " Oh no doc... Why would I ?... Sorry if I hurt you ! "
मैं : " हर्ट की बात नहीं है बाबा, लेकिन मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा है। "
बुजुर्ग : " समझकर भी, क्या करोगे डॉक्टर ? "
अच्छा "ओके, चलो हम, उधर बैठते हैं, वरना लोग तुम्हें भी पागल हो कहेंगे। "(और फिर बुजुर्ग हँसने लगे)
करीब ही एक वीरान टपरी थी। हम दोनों वहीं जाकर बैठ गए।
" Well Doctor, I am Mechanical Engineer...."--- बुजुर्ग ने अंग्रेजी में ही शुरुआत की--- "
मैं, ***** कंपनी में सीनियर मशीन ऑपरेटर था।
एक नए ऑपरेटर को सिखाते हुए, मेरा पैर मशीन में फंस गया था, और ये बैसाखी हाथ में आ गई। कंपनी ने इलाज का सारा खर्चा किया, और बाद में कुछ रकम और सौंपी, और घर पर बैठा दिया। क्योंकि लंगड़े बैल को कौन काम पर रखता है सर ? "
"फिर मैंने उस पैसे से अपना ही एक छोटा सा वर्कशॉप डाला। अच्छा घर लिया। बेटा भी मैकेनिकल इंजीनियर है। वर्कशॉप को आगे बढ़ाकर उसने एक छोटी कम्पनी और डाली। "
मैं चकराया, बोला : " बाबा, तो फिर आप यहाँ, इस हालत में कैसे ? "
बुजुर्ग : " मैं...?
किस्मत का शिकार हूँ ...."
" बेटे ने अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए, कम्पनी और घर दोनों बेच दिए। बेटे की तरक्की के लिए मैंने भी कुछ नहीं कहा। सब कुछ बेच बाचकर वो अपनी पत्नी और बच्चों के साथ जापान चला गया, और हम जापानी गुड्डे गुड़िया यहाँ रह गए। "
ऐसा कहकर बाबा हँसने लगे। हँसना भी इतना करुण हो सकता है, ये मैंने पहली बार अनुभव किया।
फिर बोला : " लेकिन बाबा, आपके पास तो इतना हुनर है कि जहाँ लात मारें वहाँ पानी निकाल दें। "
अपने कटे हुए पैर की ओर ताकते बुजुर्ग बोले : " लात ? कहाँ और कैसे मारूँ, बताओ मुझे ? "
बाबा की बात सुन मैं खुद भी शर्मिंदा हो गया। मुझे खुद बहुत बुरा लगा।
प्रत्यक्षतः मैं बोला : "आई मीन बाबा, आज भी आपको कोई भी नौकरी दे देगा, क्योंकि अपने क्षेत्र में आपको इतने सालों का अनुभव जो है। "
बुजुर्ग : " Yes doctor, और इसी वजह से मैं एक वर्कशॉप में काम करता हूँ। 8000 रुपए तनख्वाह मिलती है मुझे। "
मेरी तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा था। मैं बोला :
"तो फिर आप यहाँ कैसे ? "
बुजुर्ग : "डॉक्टर, बेटे के जाने के बाद मैंने एक चॉल में एक टीन की छत वाला घर किराए पर लिया। वहाँ मैं और मेरी पत्नी रहते हैं। उसे Paralysis है, उठ बैठ भी नहीं सकती। "
" मैं 10 से 5 नौकरी करता हूँ । शाम 5 से 7 इधर भीख माँगता हूँ और फिर घर जाकर तीनों के लिए खाना बनाता हूँ। "
आश्चर्य से मैंने पूछा : " बाबा, अभी तो आपने बताया कि, घर में आप और आपकी पत्नी हैं। फिर ऐसा क्यों कहा कि, तीनों के लिए खाना बनाते हो ? "
बुजुर्ग : " डॉक्टर, मेरे बचपन में ही मेरी माँ का स्वर्गवास हो गया था। मेरा एक जिगरी दोस्त था, उसकी माँ ने अपने बेटे जैसे ही मुझे भी पाला पोसा। दो साल पहले मेरे उस जिगरी दोस्त का निधन हार्ट अटैक से हो गया तो उसकी 92 साल की माँ को मैं अपने साथ अपने घर ले आया तब से वो भी हमारे साथ ही रहती है। "
मैं अवाक रह गया। इन बाबा का तो खुद का भी हाल बुरा है। पत्नी अपंग है। खुद का एक पाँव नहीं, घरबार भी नहीं,
जो था वो बेटा बेचकर चला गया, और ये आज भी अपने मित्र की माँ की देखभाल करते हैं।
कैसे जीवट इंसान हैं ये ?
कुछ देर बाद मैंने समान्य स्वर में पूछा : " बाबा, बेटा आपको रास्ते पर ले आया, ठोकरें खाने को छोड़ गया। आपको गुस्सा नहीं आता उस पर ? "
बुजुर्ग : " No no डॉक्टर, अरे वो सब तो उसी के लिए कमाया था, जो उसी का था, उसने ले लिया। इसमें उसकी गलती कहाँ है ? "
" लेकिन बाबा "--- मैं बोला "लेने का ये कौन सा तरीका हुआ भला ? सब कुछ ले लिया। ये तो लूट हुई। "
" अब आपके यहाँ भीख माँगने का कारण भी मेरी समझ में आ गया है बाबा। आपकी तनख्वाह के 8000 रुपयों में आप तीनों का गुजारा नहीं हो पाता अतः इसीलिए आप यहाँ आते हो। "
बुजुर्ग : " No, you are wrong doctor. 8000 रुपए में मैं सब कुछ मैनेज कर लेता हूँ। लेकिन मेरे मित्र की जो माँ है, उन्हें, डाइबिटीज और ब्लडप्रेशर दोनों हैं। दोनों बीमारियों की दवाई चल रही है उनकी। बस 8000 रुपए में उनकी दवाईयां मैनेज नहीं हो पाती । "
" मैं 2 घंटे यहाँ बैठता हूँ लेकिन भीख में पैसों के अलावा कुछ भी स्वीकार नहीं करता। मेडिकल स्टोर वाला उनकी महीने भर की दवाएँ मुझे उधार दे देता है और यहाँ 2 घंटों में जो भी पैसे मुझे मिलते हैं वो मैं रोज मेडिकल स्टोर वाले को दे देता हूँ। "
मैंने अपलक उन्हें देखा और सोचा, इन बाबा का खुद का बेटा इन्हें छोड़कर चला गया है और ये खुद किसी और की माँ की देखभाल कर रहे हैं।
मैंने बहुत कोशिश की लेकिन खुद की आँखें भर आने से नहीं रोक पाया।
भरे गले से मैंने फिर कहा : "बाबा, किसी दूसरे की माँ के लिए, आप, यहाँ रोज भीख माँगने आते हो ? "
बुजुर्ग : " दूसरे की ? अरे, मेरे बचपन में उन्होंने बहुत कुछ किया मेरे लिए। अब मेरी बारी है। मैंने उन दोनों से कह रखा है कि, 5 से 7 मुझे एक काम और मिला है। "
मैं मुस्कुराया और बोला : " और अगर उन्हें पता लग गया कि, 5 से 7 आप यहाँ भीख माँगते हो, तो ? "
बुजुर्ग : " अरे कैसे पता लगेगा ? दोनों तो बिस्तर पर हैं। मेरी हेल्प के बिना वे करवट तक नहीं बदल पातीं। यहाँ कहाँ पता करने आएँगी.... हा....हा... हा...."
बाबा की बात पर मुझे भी हँसी आई। लेकिन मैं उसे छिपा गया और बोला : " बाबा, अगर मैं आपकी माँ जी को अपनी तरफ से नियमित दवाएँ दूँ तो ठीक रहेगा ना। फिर आपको भीख भी नहीं मांगनी पड़ेगी। "
बुजुर्ग : " No doctor, आप भिखारियों के लिए काम करते हैं। माजी के लिए आप दवाएँ देंगे तो माजी भी तो भिखारी कहलाएंगी। मैं अभी समर्थ हूँ डॉक्टर, उनका बेटा हूँ मैं। मुझे कोई भिखारी कहे तो चलेगा, लेकिन उन्हें भिखारी कहलवाना मुझे मंजूर नहीं। "
" OK Doctor, अब मैं चलता हूँ। घर पहुँचकर अभी खाना भी बनाना है मुझे। "
मैंने निवेदन स्वरूप बाबा का हाथ अपने हाथ में लिया और बोला : " बाबा, भिखारियों का डॉक्टर समझकर नहीं बल्कि अपना बेटा समझकर मेरी दादी के लिए दवाएँ स्वीकार कर लीजिए। "
अपना हाथ छुड़ाकर बाबा बोले : " डॉक्टर, अब इस रिश्ते में मुझे मत बांधो, please, एक गया है, हमें छोड़कर...."
" आज मुझे स्वप्न दिखाकर, कल तुम भी मुझे छोड़ गए तो ? अब सहन करने की मेरी ताकत नहीं रही...."
ऐसा कहकर बाबा ने अपनी बैसाखी सम्हाली। और जाने लगे, और जाते हुए अपना एक हाथ मेरे सिर पर रखा और भर भराई, ममता मयी आवाज में बोले : "अपना ध्यान रखना मेरे बच्चे..."
शब्दों से तो उन्होंने मेरे द्वारा पेश किए गए रिश्ते को ठुकरा दिया था लेकिन मेरे सिर पर रखे उनके हाथ के गर्म स्पर्श ने मुझे बताया कि, मन से उन्होंने इस रिश्ते को स्वीकारा था।
उस पागल कहे जाने वाले मनुष्य के पीठ फेरते ही मेरे हाथ अपने आप प्रणाम की मुद्रा में उनके लिए जुड़ गए।
हमसे भी अधिक दुःखी, अधिक विपरीत परिस्थितियों में जीने वाले ऐसे भी लोग हैं।
हो सकता है इन्हें देख हमें हमारे दु:ख कम प्रतीत हों, और दुनिया को देखने का हमारा नजरिया बदले....
हमेशा अच्छा सोचें, हालात का सामना करे...।
🙏🏻🌹🌹🙏🏻
Friday, November 27, 2020
डाकू भूपत सिंग
*कहानी गुजरात के सौराष्ट्र इलाके के कुख्यात डाकू भूपत सिंह की जिसे पाकिस्तान ने मुस्लिम बनने की शर्त पर अपने यहां शरण दे दिया था*
गुजरात के सौराष्ट्र इलाके के कुख्यात डकैत भूपत सिंह की कहानी बेहद दिलचस्प है।
सन 1939 में बड़ौदा के महाराजा थे प्रताप सिंह राव गायकवाड उन्होंने अपने यहां एक घुड़सवारी की प्रतियोगिता रखी जिसमें एक युवक भूपत सिंह ने इनाम जीता था।
भूपत सिंह अमरेली के एक रियासत के राज दरबार में घोड़ों की देखभाल करने का काम करता था और जब राजा शिकार पर जाते तब भूपत उनके साथ जाता था इसी तरह भूपत ने बचपन से ही बंदूक चलाना सीख लिया था और उसका निशाना अचूक हो गया था।
फिर देश आजाद हो गया और रजवाड़े खत्म हो गए उसी दौरान राजकोट के गोंडल कस्बे में एक अमीर मुस्लिम व्यापारी ने उस जमाने में 9 लाख रुपये खर्च करके अपना घर बनाया था और उस जमाने में इलाके के लोग उसे नौलखा घर करते थे क्योंकि यह नौ लाख में बना था।
और इस घर में डकैती पड़ी और इस डकैती का आरोप भूपत सिंह पर लगा और भूपत सिंह फरार हो गया और अपने कुछ साथियों को मिलाकर अपना एक गैंग बना लिया और फिर उसके बाद उसने कत्ल और डकैती की कई वारदातों को अंजाम दिया।
धीरे-धीरे उसके गैंग में 42 डकैत शामिल हो गए और एक के बाद एक भूपत गैंग ने 90 हत्याएं और उस जमाने में साढे आठ लाख की डकैती की जो उस जमाने में बहुत बड़ी रकम हुआ करती थी।
अपने इन कारनामों के चलते भूपत राष्ट्रीय अखबारों और विदेशी मीडिया में सुर्खी बन गया था और उस समय सौराष्ट्र के गृह मंत्री पुलिस की नाकामी से बहुत खफा हुए और उन्होंने यह घोषणा कर दिया कि जब तक भूपत सिंह पकड़ा नहीं जाएगा तब तक पुलिस के वेतन में 25% की कटौती कर दी जाएगी।
उस समय गुजरात मुंबई प्रेसीडेंसी राज्य का हिस्सा हुआ करता था फिर सरकार ने पुणे में काम कर रहे 1933 बैच के IPS अफसर विष्णु गोपाल कटिनकर को भूपत गैंग का खात्मा करने के लिए सौराष्ट्र भेजा और काटीनकर को आउट आफ टर्न प्रमोशन देकर राजकोट रेंज का आईजी बनाया गया।
पुलिस अधिकारी का काटिनकर साहब ने नए सिरे से भूपत गैंग को खत्म करने का प्लान रख रचा और पुलिस में कई विश्वसनीय मुखबीर भर्ती किए।
काटीनकर ने बहुत कोशिश किया लेकिन उन्हें भूपत गैंग का कोई सुराग नहीं मिल रहा था।
तभी राजकोट में लूट की एक वारदात हुई और पता चला कि इस लूट को भूपत गैंग ने अंजाम दिया है और डकैतों का यह दल कार से फरार हुआ है।
घटनास्थल पर एक गैराज की पर्ची मिली और इस पर्ची से पता चला कि वारदात में इस्तेमाल की गई कार एक भूतपूर्व राजकुमार की है कटिनकर साहब ने भूतपूर्व राजकुमार पर दबाव डाला और राजकुमार ने बता दिया कि उन्होंने भूपत के साथी डाकू कालू देवायत को पनाह दी है उसके बाद काटीनकर उस राजपरिवार के फार्म हाउस गए फिर गोलीबारी में भूपत के साथी डकैत कालू देवायत को गोली मार दी गई और गैंग के कई डकैत फरार हो गए ।
लेकिन पुलिस ने पीछा करते-करते उन्हें चारों तरफ से घेर लिया और पुलिस ने कई डकैतों को मार दिया हालांकि पुलिस के 2 जवान भी शहीद हुए थे
इस तरह एक के बाद एक भूपत गैंग के कई डकैतों को का खात्मा कर दिया गया।
उसी दरम्यान भूपत सिंह डकैत के सबसे भरोसेमंद साथी राणा किसी काम से बड़ोदरा गया पुलिस को सूचना मिली और 700 जवानों की मदद से राणा की घेराबंदी किया गया और राणा को गोली मार दी गई ।
अपने गैंग के सभी विश्वसनीय साथियों के खात्मे के बाद भूपत एकदम डर गया अब उसे भी एहसास हो गया था कि या तो उसका भी एनकाउंटर कर दिया जाएगा या यदि वह पकड़ा गया तो उसे फांसी होगी।
उसके बाद वह कच्छ की सीमा से पाकिस्तान भाग गया। पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने उसे पकड़ लिया और उसे गैरकानूनी तरीके से सीमा पार करने के जुर्म में 1 साल की कैद और ₹100 का जुर्माना हुआ।
मुकदमे के दौरान भूपत सिंह ने खुद को पाकिस्तान में शरण दिए जाने की अपील की। फिर पाकिस्तानी सरकार ने उसे इस शर्त पर पाकिस्तान में शरण देने की अर्जी स्वीकार की कि भूपत सिंह इस्लाम कुबूल कर लेगा उसके बाद भूपत सिंह ने इस्लाम कुबूल करने का वादा किया और कराची की एक मस्जिद में कलमा पढ़ कर मुसलमान बन गया और अपना नाम युसूफ रख लिया।
उस समय भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे और कुख्यात डकैत भगत सिंह को पाकिस्तान से प्रत्यर्पण की कई कोशिशें हुई।
उस जमाने में पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त रहे डॉक्टर पी सी ए राघवन बताते हैं कि खुद नेहरू भूपत सिंह के प्रत्यर्पण में काफी रूचि लिए लेकिन जब भारत सरकार भूपत डाकू को भारत वापस लाने में विफल रहे तब नेहरू ने भूपत का मुद्दा दूसरे देशों के सामने भी उठाये।
इधर गुजरात में गुजरात के नेताओं के दबाव की वजह से भूपत का मुद्दा लगातार मीडिया में चर्चा में बना हुआ था इतना ही नहीं कई विदेशी मीडिया जैसे न्यूयॉर्क टाइम्स और बीबीसी भी भूपत सिंह के मुद्दे पर खूब लिख रहा था।
उसके बाद जुलाई 1956 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री मोहम्मद अली डोगरा के बीच भूपत के प्रत्यर्पण को लेकर बातचीत हुई, लेकिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने नेहरू को एकदम मना कर दिया कि भूपत को भारत के हवाले नहीं किया जाएगा ।
फिर उसी समय प्रख्यात अखबार ब्लिट्ज ने अप्रैल 1953 के अंक में एक स्टोरी छाप कर भारत को हिला दिया कि डकैत भूपत उर्फ यूसुफ को पाकिस्तानी सेना में भारतीय डाकुओं की भर्ती करने का काम सौंपा गया है और भूपत कई कुख्यात भारतीय डाकुओं के संपर्क में है जिन्हें पाकिस्तानी सेना में भर्ती करके भारत के खिलाफ इस्तेमाल किया जाएगा।
भूपत की पहली पत्नी गुजरात के सौराष्ट्र इलाके में रहती थी लेकिन पाकिस्तान जाने के बाद ऊपर इस्लाम कुबूल कर लिया तब पाकिस्तान में उसने दोबारा शादी की और उसके बच्चे भी हुए।
इस कुख्यात डकैत भूपत पर बहुत सी फिल्में बनी है जिसमें सबसे सुपरहिट फिल्म तेलुगू अभिनेता एनटी रामा राव ने बनाई थी जिसमें उन्होंने खुद अभिनय भी किया था। इसके अलावा भूपत पर बहुत सी किताबें लिखी गई है और भूपत गैंग का खात्मा करने वाले पुलिस अधिकारी 1933 बैच के आईपीएस ऑफिसर काटिनकर ने भी मराठी भाषा में एक किताब लिखी है।
भूपत का पाकिस्तान में बाद में बहुत बुरा हाल हो गया पाकिस्तानी फौज और पाकिस्तानी सरकार को जब लगा कि भूपत उसके लिए फायदेमंद नहीं है तब उन्होंने भूपत को उसके हाल पर छोड़ दिया।
बुढ़ापे में भूपत उर्फ यूसुफ दूध बेचकर गुजारा करता था और भारत आने की बहुत कोशिश किया लेकिन तब भारत सरकार ने ही मना कर दिया।
वह दो बार भारत की सीमा में घुसने की कोशिश किया लेकिन पाकिस्तानी रेंजरो ने उसे पकड़कर जेल में बंद कर दिया अंत में 2006 में बुढ़ापे में कई बीमारियों से पीड़ित कुख्यात डकैत भूपत सिंह उर्फ यूसुफ की पाकिस्तान में मौत हो गई और उसे कराची के कब्रिस्तान में दफना दिया गया
Saturday, November 7, 2020
मेरे संग करें माँ वैष्णो देवी धाम की पूरी यात्रा || Maa VaisnoDevi Yatra
Mere sang kare Maa Vaishno Devi yatra
#matavaishnodevi
Thursday, May 28, 2020
This "Swara Sthambha" (Musical Pillar) of Hampi is not just a stone & Sculpture.
When you visit a temple each "Shila" has volumes of information to convey us.
This single amazing work on the hardest rock in the world has more than 30 elements of which I chose 8 to explain.
1) Bhitta - Base, with events related to trade, commerce & Military.
2) Jaadyakumbha - is the invertion of a Bud opening generally the Padma/Lotus.
3) Graasapatta - a band of Kirtimukhas, Simhamukhas, Asva or Gaja to avoid Drishti or Dosha.
4) Kapota - Usually birds like pigeons sit in this area, so the name.
5) Mancha Bhadra - Square shaped pedestal/base.
6) Swara Sthambha - the main part of pillar sculpted in to 12 different smaller pillars that produce music nodes
7) Seersha - the final or the head, with different yalis
8) Dandachadya - the Chajja/Eave. This Chajja is unique because the design that's only possible on wood construction is brought on to stone. "Mera Bharath Mahan"
.
.
When you visit a temple each "Shila" has volumes of information to convey us.
This single amazing work on the hardest rock in the world has more than 30 elements of which I chose 8 to explain.
1) Bhitta - Base, with events related to trade, commerce & Military.
2) Jaadyakumbha - is the invertion of a Bud opening generally the Padma/Lotus.
3) Graasapatta - a band of Kirtimukhas, Simhamukhas, Asva or Gaja to avoid Drishti or Dosha.
4) Kapota - Usually birds like pigeons sit in this area, so the name.
5) Mancha Bhadra - Square shaped pedestal/base.
6) Swara Sthambha - the main part of pillar sculpted in to 12 different smaller pillars that produce music nodes
7) Seersha - the final or the head, with different yalis
8) Dandachadya - the Chajja/Eave. This Chajja is unique because the design that's only possible on wood construction is brought on to stone. "Mera Bharath Mahan"
.
.
Monday, May 11, 2020
अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस (International Nurses Day)
वितरण नोबेल नर्सिंग सेवा की शुरुआत करने वाली "फ्लोरेंस नाइटइंगेल" के जन्म दिवस पर हर वर्ष पूरी दुनिया में 12 मई को अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस मनाया जाता है।
जिसकी शुरुआत 1965 से हुई जिसका उद्देश्य इंटरनेशनल काउंसिल आफ नर्सेस, नर्सों के लिए एक विषय की शैक्षिक और सार्वजनिक सूचना की जानकारी की सामग्री का निर्माण और वितरण करके इस दिन को याद करना।
नर्सों को सराहनीय सेवा के लिए भारत सरकार के परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगल पुरस्कार की शुरुआत किया गया। यह पुरस्कार प्रतिवर्ष माननीय राष्ट्रपति के द्वारा प्रदान किया जाता है।
जय हिंद
🙏🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏🙏
आम कि बात
बग में आम गिरे थे बहुत सारे,
मेने एक भी पत्थर नहीं मारे,
अंधी तूफ़ां का ये चपेट था,
प्रकृति माँ का दिया भेंट था,
बीन बीनकर, में थक सा गया था!
आम गिरेथे काफी वहा पर!! कोई ना था!
याद आ गई दो दिन पेहेले की बात
यू ही तूफा गर्जी थी! दीन की ये बात,
जमा थे काफि लोग पेड़ के नीचे,
में रह गया था सब से पीछे!
सब भर भर ले गये आम से थैली,
उदास रह गया था में! खाली झोली,
दिल ने बस कहीं इतनिसि बात! प्रकृति माँ से!
"मन मुझे भी था एक आम खाने का यहाँ से"
प्रकृति माँ ने सुन ली मेरी छोटी फरियाद!
पेहली वाली पंक्ति है, किस्सा! दो दीन बाद!!
||राम राम||
जय माँ प्रकृति
जय कलयुग
Subscribe to:
Posts (Atom)