Wednesday, August 23, 2017

कछुआ और ख़रगोश की वो कहानी जो आपने नहीं सुनी..


आपने कछुए और ख़रगोश की कहानी ज़रूर सुनी होगी,

एक बार ख़रगोश को अपनी तेज़ चाल पर घमंड हो गया और वो जो मिलता उसे रेस लगाने के लिए challenge करता रहता..
कछुए ने उसकी चुनौती स्वीकार कर ली..
रेस शुरू हुई, ख़रगोश तेज़ी से भागा और काफी आगे जाने पर पीछे मुड़ कर देखा, कछुआ कहीं आता नज़र नहीं आया..
उसने मन ही मन सोचा कछुए को तो यहाँ तक आने में बहुत समय लगेगा, चलो थोड़ी देर आराम कर लेते हैं,
और वह एक पेड़ के नीचे लेट गया..
लेटे-लेटे कब उसकी आँख लग गयी पता ही नहीं चला..
उधर कछुआ धीरे-धीरे मगर लगातार चलता रहा। बहुत देर बाद जब खरगोश की आँख खुली तो कछुआ फिनिशिंग लाइन तक पहुँचने वाला था..
ख़रगोश तेजी से भागा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और कछुआ रेस जीत गया..

Moral of the story: Slow and steady wins the race..

धीमा और लगातार चलने वाला रेस जीतता है..
ये कहानी तो हम सब जानते हैं, अब आगे की कहानी देखते हैं:
रेस हारने के बाद खरगोश निराश हो जाता है, वो अपनी हार पर चिंतन करता है और उसे समझ आता है कि वो over-confident होने के कारण ये रेस हार गया..
उसे अपनी मंज़िल तक पहुँच कर ही रुकना चाहिए था..
अगले दिन वो फिर से कछुए को दौड़ की चुनौती देता है..
कछुआ पहली रेस जीत कर आत्मविश्वाश से भरा होता है और तुरंत मान जाता है..
रेस फ़िर शुरू होती है, इस बार ख़रगोश बिना रुके अंत तक दौड़ता जाता है, और कछुए को एक बहुत बड़े अंतर से हराता है..

Moral of the story: Fast and consistent will always beat the slow and steady..

तेज और लगातार चलने वाला धीमे और लगातार चलने वाले से हमेशा जीत जाता है..
यानि slow and steady होना अच्छा है, लेकिन fast and consistent होना और भी अच्छा है..

कहानी अभी बाकी है साहब..
इस बार कछुआ कुछ सोच-विचार करता है और उसे ये बात समझ आती है कि जिस तरह से अभी रेस हो रही है वो कभी-भी इसे जीत नहीं सकता..
वो एक बार फिर ख़रगोश को एक नयी रेस के लिए चैलेंज करता है, पर इस बार वो रेस का रूट अपने मुताबिक रखने को कहता है.. ख़रगोश तैयार हो जाता है..
रेस एक बार फ़िर शुरू होती है..
ख़रगोश तेज़ी से तय स्थान की और भागता है, पर उस रास्ते में एक तेज धार नदी बह रही होती है, बेचारे ख़रगोश को वहीँ रुकना पड़ता है..
कछुआ धीरे-धीरे चलता हुआ वहां पहुँचता है, आराम से नदी पार करता है और लक्ष्य तक पहुँच कर रेस फ़िर जीत जाता है..

Moral of the story: Know your core competencies and work accordingly to succeed..

पहले अपनी strengths को जानो और उसके मुताबिक काम करो, जीत ज़रुर मिलेगी..
कहानी अभी भी बाकी है साहब..
इतनी रेस करने के बाद अब कछुआ और ख़रगोश अच्छे दोस्त बन गए थे और एक दुसरे की ताक़त और कमज़ोरी समझने लगे थे..
दोनों ने मिलकर विचार किया कि अगर हम एक दुसरे का साथ दें, तो कोई भी रेस आसानी से जीत सकते हैं..
इसलिए दोनों ने आख़िरी रेस एक बार फिर से मिलकर दौड़ने का फैसला किया,
पर इस बार as a Competitor नहीं बल्कि as a Team काम करने का निश्चय लिया..
दोनों स्टार्टिंग लाइन पे खड़े हो गए..
Get set go, और तुरंत ही ख़रगोश ने कछुए को ऊपर उठा लिया और तेज़ी से दौड़ने लगा..
दोनों जल्द ही नदी के किनारे पहुँच गए..
अब कछुए की बारी थी, कछुए ने ख़रगोश को अपनी पीठ पर बैठाया और दोनों आराम से नदी पार कर गए..
अब एक बार फिर ख़रगोश कछुए को उठा फिनिशिंग लाइन की ओर दौड़ पड़ा और दोनों ने साथ मिलकर रिकॉर्ड टाइम में रेस पूरी कर ली..
दोनों बहुत ही ख़ुश और संतुष्ट थे, आज से पहले कोई रेस जीत कर उन्हें इतनी ख़ुशी नहीं मिली थी..

Moral of the story: Team Work is always better than individual performance..

टीम वर्क हमेशा व्यक्तिगत प्रदर्शन से बेहतर होता है..
Individually चाहे हम जितने भी बड़े Performer हों, लेकिन अकेले दम पर हर मैच नहीं जीता सकते..
अगर लगातार जीतना है तो हमको टीम में काम करना सीखना होगा,
हमको अपनी क़ाबिलियत के आलावा, दूसरों की ताक़त को भी समझना होगा,
और जब जैसी Situation हो, उसके हिसाब से की Strengths को Best Use करना होगा..

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